हस्तिनापुर को अभयारण्य का दर्जा क्यों नहीं, कई छोटी नदियों का अस्तित्व खतरे में 

Submitted by RuralWater on Thu, 04/25/2019 - 18:17
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प्रभात कुमार, नई दिल्‍ली, हिन्दुस्तान, 25 अप्रैल 2019  
 
हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य को अधिसूचित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 20 साल पहले एक  सौदा तैयार किया था, लेकिन इसे आज तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इसे गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के वन विभाग के प्रमुख सचिव को तलब किया है। ट्रिब्यूनल के सदस्य जस्टिस आर. एस. राठौड़ की अगुवाई वाली पीठ ने यूपी के प्रमुख सचिव (वन) को निजी रूप से पेश होकर इस बारे में सफाई देने को कहा है। पीठ ने प्रमुख सचिव से यह बताने के लिए कहा है कि 'दो दशक बीत जाने के बाद भी हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य अधिसूचित करने के लिए तैयार मसौदे को मंजूरी क्यों नहीं दी गई। ट्रिब्यूनल ने यह आदेश तब दिया जब पीठ को बताया गया कि हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य को अधिसूचित नहीं किए जाने की वजह से इसके आसपास नियमों की अनदेखी कर औद्योगिक इकाइयों का परिचालन हो रहा है। इससे न सिर्फ अभ्यारण्य बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही पर्यावरण हितों की अनदेखी से हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों की मौजूदगी से जैव विविधता के साथ-साथ हिरण की दो खास किस्म की प्रजाति भी खतरे में पड़ गई है।
 
पीठ ने यह आदेश अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। पर्यावरण हितों को दरकिनार कर हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों का परिचालन हो रहा है। बंसल ने आरोप लगाया कि अभ्यारण्य के संरक्षण के लिए न तो यूपी सरकार कोई कदम उठा रही है और न ही राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण।
 
ट्रिब्यूनल ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण से अभ्यारण्य का दौरा करने व वस्तुस्थिति से अवगत कराने का आदेश दिया। 

केन्द्र में 1986 से अटकी है हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य घोषणा

हस्तिनापुर वन अभ्यारण्य क्षेत्र का पहला आदेश 1986 में हुआ था। तब से केन्द्र सरकार की अधिसूचना का इंतजार है। हालांकि इसके लिए 20 साल पहले प्रदेश सरकार ने एक मसौदा भी तैयार किया था। हस्तिनापुर वन अभ्यारण्य का क्षेत्र 2073 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसमें मेरठ के साथ ही बिजनौर और अमरोहा जिले की सीमा लगती है। सरकार की ओर से अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण इस अभ्यारण्य क्षेत्र का विकास नहीं हो पा रहा है।
 
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमा को लेकर मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। इस सीमा के अंतर्गत शहर और उद्योग भी बेधड़ले से खड़े हो गए हैं। एक ओर वन्यजीव अभ्यारण्य है तो दूसरी ओर निर्माण एवं औद्योगिक गतिविधियां असमंजस की स्थिति पैदा करती हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए वन विभाग ने हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमा निर्धारण के प्रयास शुरू किए हैं। ले-देकर गंगा किनारे और जंगली पशुओं की आवाजाही वाले स्थल (एनीमल कॉरीडोर) तक ही सर्वे कराकर सीमा का निर्धारण किसी तरह किया गया। अधिकारियों के अनुसार, हस्तिनापुर अभ्यारण्य को लेकर पहली बार 1986 में आदेश जारी हुआ था।


इसके बाद केंद्र सरकार से जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना अब तक जारी नहीं हुई, जबकि 2073 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैले इस अभ्यारण्य में मृग, सांभर, चीतल, नीलगाय, तेंदुआ, जंगली बिल्ली आदि जंगली जानवरों के अलावा पक्षियों की भी अनेक प्रजातियाँ रहती हैं। अभ्यारण्य का कुछ हिस्सा बिजनौर के अलावा मेरठ एवं अमरोहा जिले की सीमा में भी आता है। रिजर्व फॉरेस्ट से दस किलोमीटर की परिधि में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, विद्युतीकरण या फिर निर्माण कार्यो पर पाबंदी है। हस्तिनापुर अभ्यारण्य के अंतर्गत बिजनौर और चांदपुर शहर पूरी तरह विकसित हो गए हैं। हस्तिनापुर अभ्यारण्य की अधिसूचना जारी नहीं होने से यह बढ़ता चला जा रहा है। इसके चलते वन विभाग भी विकास एवं औद्योगिक गतिविधियों को रोकने में ढिलाई बरतता है।
 
दरअसल अभ्यारण्य की स्थापना के समय बिजनौर से मंडावर रोड तथा बिजनौर से चांदपुर रोड को ही सीमा मान लिया गया था। इसमें बिजनौर और चांदपुर शहर भी शामिल हैं। वैसे सीमा निर्धारण को सही करने के लिए वन विभाग ने एक सर्वे और किया है, जिसे अधूरा माना जा रहा है।
 
एनजीटी में मौजूद रहे डीएफओः एनजीटी में हस्तिनापुर सेंचुरी को लेकर सुनवाई के दौरान कई जिलों के  जिला वन अधिकारी मौजूद रहे। इनमें मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़ बिजनौर और अमरोहा के अफसर शामिल थे।

अधिसूचना के लिए दाखिल करना होगा जवाब

एनजीटी ने 20 मई को यूपी के प्रमुख सचिव वन को तलब किया है। वह एनजीटी में हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य को लेकर अपना पक्ष रखेंगे। वन विभाग के अफसरों को कोर्ट में स्पष्ट करना है कि
फाइनल नोटिफिकेशन जारी करने में क्यों देरी हुई। और अब कब तक यह नोटिफिकेशन फाइनल जारी करेंगे। 

एक साल पहले कराया था सर्वे

वन विभाग ने हस्तिनापुर सेंचुरी में एक साल पहले बारहसिंघा के क्षेत्रों को लेकर एक सर्वे कराया था। इस दौरान डब्ल्यूएफएफ और वन विभाग की टीम ने पाया था कि हस्तिनापुर सेंचुरी में बिजनौर और गजरौला शहर क्षेत्र होने के साथी कई स्थानों पर इंडस्ट्री भी लगी है। एनजीटी में दायर याचिका में यह तथ्य भी शामिल है। अब वन विभाग को फाइनल नोटिफिकेशन जारी करना होगा। 

एनजीटी के आदेश का पालन करेंगे

हस्तिनापुर सेंचुरी को लेकर एनजीटी के आदेश का पालन कराया जाएगा। अब अगली तारीख 20 मई लगी है। - अदिति शर्मा डीएफओ