बुन्देलखण्ड क्षेत्र में वर्षाजल संचयन हेतु खेत तालाब की योजना

Submitted by RuralWater on Sat, 11/26/2016 - 11:35
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

प्रस्तावना


.बुन्देलखण्ड क्षेत्र में औसत सामान्य वार्षिक वर्षा 875 मिमी. है। वर्षा ऋतु में लगभग 50 से 55 दिन में ही पूरी वर्षा हो जाती है तथा इसका वितरण भी अत्यन्त ही असमान होता है। विगत वर्षों के वर्षा के स्वरूप (Rainfall pattern) के आधार पर यह देखा गया है कि माह अगस्त के किसी एक सप्ताह के 01 अथवा 02 दिनों में ही कुल वर्षा की लगभग 40 प्रतिशत वर्षा हो जाती है।

वर्षाजल का अपवाह (Run off) अत्यधिक होने से अधिकांश जल बहकर नदी एवं नालों में चला जाता है तथा जल के साथ-साथ मृदा भी कटकर चली जाती है जिससे उपजाऊ भूमि का क्षरण अधिक होता है। इस वर्षाजल का अधिक-से-अधिक मात्रा में खेत तालाब के माध्यम से संचयन करके संचित जल से अधिकाधिक क्षेत्र की सिंचाई करते हुए अधिक उत्पादन भी प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही मनुष्यों तथा जानवरों के लिये पेयजल की सुविधा प्राप्त हो सकती है।

योजना के अन्तर्गत चिन्हित क्षेत्रों में वर्षाजल के संचयन एवं संरक्षण के साथ ही इनके सम्यक एवं वैज्ञानिक उपयोग पर भी विशेष बल दिया जाएगा। उक्त हेतु कृषकों को उपयुक्त सिंचाई की विधियों यथा स्प्रिंकलर सिंचाई, ड्रिप सिंचाई आदि के बारे में तकनीकी रूप से अवगत कराते हुए उक्त के प्रयोग हेतु प्रेरित किया जाएगा। खेत तालाब निर्माण एवं वर्षाजल के सम्यक उपयोग के प्रति कृषकों को जागरूक करने हेतु प्रशिक्षण भी कराए जाएँगे।

इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2016-17 में योजनान्तर्गत वर्षाजल संचयन हेतु संरचनाओं के निर्माण हेतु कुल रु. 7386.00 लाख का व्यय अनुमानित है जिसमें रु. 3711.00 लाख परियोजना अंश एवं रु. 3675.00 लाख कृषक अंश प्रस्तावित है।

योजना की रूपरेखा


बुन्देलखण्ड क्षेत्र की अधिकांश कृषि वर्षा पर आधारित है। यहाँ कुल कृषि योग्य क्षेत्रफल 20.34 लाख हेक्टेयर है जिसमें से 10.18 हेक्टेयर क्षेत्र के लिये सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। इस क्षेत्र में नहरों से 4.66 लाख हेक्टेयर, तथा राजकीय व निजी नलकूपों से 1.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होता है, जिनकी सिंचन क्षमता में अवर्षण के कारण लगातार कमी हो रही है। योजना के माध्यम से अधिकतम वर्षाजल को संरक्षित एवं संचित करते हुए सुरक्षित एवं आधुनिक सिंचाई के साधनों के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध कराया जाना है।

योजना के उद्देश्य


1. कृषकों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए उन्हें जल के संरक्षण एवं उसके समुचित प्रयोग हेतु प्रेरित करना।
2. वर्षाजल को अधिकाधिक संचित कर पलेवा अथवा जीवनदायिनी सिंचाई हेतु प्रयोग करना।
3. संचित वर्षाजल को सुरक्षित जल संवाहक प्रणाली द्वारा खेतों तक पहुँचना, जिससे जल का ह्रास कम-से-कम हो एवं उपलब्ध जल से अधिकाधिक क्षेत्र की सिंचाई भी हो सके।
4. वैकल्पिक कृषि के लिये कृषकों को प्रशिक्षित करना जिससे कम पानी के प्रयोग से अधिक-से-अधिक आय प्राप्त हो सके।
5. परियोजना क्षेत्र में सिंचन क्षमता में वृद्धि।

योजना का कार्य क्षेत्र


बुन्देलखण्ड क्षेत्र के समस्त जनपद यथा झाँसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा एवं चित्रकूट।

क्षेत्र/लाभार्थी चयन


इस योजना का मुख्य उद्देश्य उत्पादकता में वृद्धि करते हुए सकल फसल उत्पादन बढ़ाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना है। अतः सभी कृषकों को इसकी पात्रता श्रेणी में रखा जाएगा किन्तु चयन के समय अनुसूचित जाति/जनजाति तथा लघु एवं सीमान्त कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

स्थल का चयन माइक्रोवाटरशेड आधार पर किया जाय एवं यह सुनिश्चित किया जाय कि तालाब का निर्माण वाटरशेड के लोअर रिज पर या ड्रेनेज प्वाइंट पर किया जाएगा जिससे बरसात के समय तालाब में वर्षाजल संग्रहित हो सके। स्थल चयन एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है इसलिये स्थल का चयन अन्तिम रूप से अवर अभियन्ता एवं वरिष्ठ प्राविधिक सहायक (ग्रुप-ए) के सत्यापन के उपरान्त ही अनुमोदित किया जाय। जनपद में व्यापक रूप से योजना का प्रचार-प्रसार करते हुए इच्छुक कृषकों से आवेदन आमंत्रित किया जाय। इसके पश्चात ऐसे कृषक जो तालाब बनाने में रुचि रखते हों के साथ वाटरशेड स्तर पर बैठक कर स्थल का चयन किया जाएगा।

स्थल चयन की सूची का अनुमोदन जनपद के जिलाधिकारी द्वारा किया जाएगा। स्थल चयन में निम्न बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक है :-

(1) तालाब का स्थल ऐसी जगह होनी चाहिए जहाँ प्राकृतिक रूप से वर्षाजल बहकर एकत्रित हो सके।

(2) प्रस्तावित तालाब की मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें क्ले (Clay) का प्रतिशत अच्छा हो जिससे एकत्रित जल संग्रहित रह सके। यदि तालाब के 2.5 से 3.0 मी. के मिट्टी की गहराई में बालू की मात्रा अधिक होगी तो एकत्रित पानी नीचे चला जाएगा जिससे तालाब की उपयोगिता समाप्त हो जाएगी। इसलिये चयन स्थल ऐसा हो जिसमें वर्षाजल एकत्रित होकर संग्रहित हो सके एवं मृदा की संरचना ऐसी हो कि संग्रहित जल अधिक समय तक तालाब में उपलब्ध रह सकें।

(3) बुन्देलखण्ड के अधिकांश क्षेत्रों में मिट्टी की गहराई कम है अर्थात खुदाई करते समय 1.0 मी. से नीचे जाने पर पथरीली चट्टान की परतें पाई जाती हैं इसलिये स्थल चयन में यह भी ध्यान दिया जाना आवश्यक होगा कि ऐसे स्थान पर तालाब निर्माण कराया जाये जहाँ कम-से-कम 3.0 मी. तक कोई चट्टान की परत न हो।

(4) लाभार्थी कृषक की कृषि कार्यों में पूर्ण रुचि होनी चाहिए जिससे कि वह संग्रहित जल का कृषि कार्य में पूर्ण उपयोग कर सके। साथ ही चयनित कृषक एक प्रगतिशील एवं सामाजिक कृषक होना चाहिए जिससे उसके द्वारा अंगीकृत किये गए योजना का लाभ अन्य कृषकों को भी मिले साथ ही संग्रहित जल का उपयोग अन्य कृषकों द्वारा भी किया जा सके।

(5) लाभार्थी एक जरूरतमन्द कृषक होना चाहिए जिससे योजना में कृषक अंश के रूप में वह श्रम एवं सामग्री का वहन कर सकें।

तकनीकी प्रशिक्षण


बुन्देलखण्ड क्षेत्र में असमान वर्षा का वितरण एवं वाष्पोत्सर्जन द्वारा पानी की हानि का प्रतिशत अत्यधिक होने के कारण कृषकों को खेती की विशेष तकनीक एवं वर्षाजल संचय एवं सूक्ष्म सिंचाई की पद्धतियों से अवगत कराने हेतु प्रत्येक परियोजना में दो एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किये जाएँगे। प्रत्येक जनपद में एक जनपदस्तरीय प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा।

आवश्यकतानुसार ग्राम पंचायत, विकासखण्ड एवं जनपद स्तर पर उपरोक्त लाभार्थियों के प्रशिक्षण आयोजित कराए जाएँगे। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जनपद में एक दृश्य दर्शन का कार्यक्रम आयोजित कराया जाएगा, जहाँ कृषकों ने विभाग/स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से वर्षाजल संचयन एवं स्प्रिंकलर सिंचाई विधि से क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।

योजना का संचालन


यह योजना बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सभी 7 जनपदों- झाँसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा एवं चित्रकूट में क्रियान्वित की जाएगी। वर्षाजल संचयन हेतु फार्मपॉण्ड के निर्माण का कार्य कृषि विभाग की भूमि संरक्षण इकाइयों एवं बांदा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कराया जाएगा।

परियोजना लागत


प्रस्तावित योजनान्तर्गत कार्यों के समय से सम्पादन कराने हेतु विभिन्न मदों की लागत के साथ-साथ प्रशिक्षण आदि हेतु धनराशि की व्यवस्था की गई है।

परियोजना लागत का विवरण निम्न तालिका में दिया गया है :-

 

क्र.सं.

कार्यमद

भौतिक लक्ष्य (हे./सं.)

प्रति इकाई लागत (रु.)

कुल लागत (लाख रु.)

परियोजना अंश (लाख रु.)

कृषक अंश (लाख रु.)

1

फार्म पॉण्ड (कृषि विभाग

1980

105000.00

2079.00

1039.50

1039.50

2

फार्म पॉण्ड (कृषि विश्वविद्यालय, बाँदा)

20

105000.00

21.00

21.00

0.00

3

अन्य/विविध व्यय-

-

8000.00

160.00

160.00

0.00

 

योग

2000

-

2260.00

1220.50

1039.50

 



योजनान्तर्गत कृषक अंश का वहन कृषक द्वारा श्रम के रूप में किया जाएगा। तालाब की खुदाई का कार्य मशीन के द्वारा किया जाएगा। यदि लाभार्थी कृषक अपने स्वयं के ट्रैक्टर एवं जेसीबी द्वारा खुदाई करता है तो उक्त कार्य पर किया गया व्यय मात्राकृत करते हुए कृषक अंश में सम्मिलित किया जाएगा।

तालाब का रेखांकन एवं तालाब निर्माण के पश्चात चारों भुजाओं की दरेसी श्रमिकों द्वारा कराई जाएगी जिसकी अधिकतम सीमा तालाब खुदाई के अन्तर्गत प्रति इकाई मृदा कार्य रु. 82600.00 का 10 प्रतिशत अर्थात रु. 8260.00 तक होगी। योजनान्तर्गत 2000 फार्म पॉण्ड का निर्माण कराया जाना है। अतः तालाब खुदाई पर श्रमिकों द्वारा लगभग रु. 165.20 लाख का कार्य कराया जाएगा।

कार्य सम्पादन, अनुश्रवण एवं समीक्षा


योजना के क्रियान्वयन का उत्तरदायित्व


योजना एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसका सफलतापूर्वक क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने हेतु विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों को उत्तरदायी बनाया गया है :

1. परियोजना स्तर पर भूमि संरक्षण अधिकारी द्वारा यह कार्यक्रम क्रियान्वित कराया जाएगा तथा सम्पूर्ण कार्य भूमि एवं जल संरक्षण अधिनियम 1963 तथा विभाग द्वारा जारी तकनीकी निर्देशिका के अनुसार किया जाएगा।

2. जनपद स्तर पर जिलाधिकारी कार्यक्रम के संचालन हेतु उत्तरदायी होंगे। विभिन्न कार्यों के क्रियान्वयन में सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित करेंगे तथा कार्यक्रम की समीक्षा कर मासिक प्रगति प्रतिवेदन मण्डलायुक्त एवं कृषि निदेशक (भूमि संरक्षण अनुभाग) कृषि भवन, लखनऊ को उपलब्ध कराएँगे।

मृदा संरचना के अनुरूप आवश्यक होने पर जिलाधिकारी अपने जनपद में बिना लाइनिंग फार्म पॉण्ड के स्थान पर लाइनिंग युक्त फार्म पॉण्ड का लक्ष्य निर्धारित कर सकेंगे। इस प्रकार निर्धारित वित्तीय लक्ष्य के अन्तर्गत ही बिना लाइनिंग के फार्म पॉण्ड के लक्ष्य में कमी करके लाइनिंग युक्त फार्म पॉण्ड का लक्ष्य निर्धारित कर सकेंगे।

3. मण्डल स्तर पर कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु उप कृषि निदेशक (भूमि संरक्षण) उत्तरदायी होंगे तथा मण्डलीय संयुक्त कृषि निदेशक एवं मण्डलायुक्त के निर्देशन में कार्यों का क्रियान्वयन करेंगे। जनपद में भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्यों में आवश्यकतानुसार परिवर्तन करने का अधिकार होगा। उक्त परिवर्तन मण्डल के अन्तर्गत विभिन्न जनपदों में किया जा सकेगा।

4. राज्य स्तर पर कार्यक्रम का संचालन कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश के मार्ग-निर्देशन में अपर कृषि निदेशक (भूमि संरक्षण) द्वारा किया जाएगा, जो नियमित रूप से शासन के निर्देशों के अनुरूप कार्यक्रम का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराएँगे तथा प्रदेश की संकलित सूचना शासन को उपलब्ध कराएँगे। मण्डलीय लक्ष्य में परिवर्तन मण्डलायुक्त द्वारा प्रेषित प्रस्ताव पर राज्य स्तर से किया जाएगा।

परिशिष्ट-1


वर्ष 2016-17 में खेत तालाब निर्माण का जनपदवार लक्ष्य

 

क्र.सं.

जनपद

भौतिक लक्ष्य (संख्या)

कुल वित्तीय लक्ष्य (लाख रु. में)

1

झाँसी

250

262.50

2

जालौन

250

262.50

3

ललितपुर

250

262.50

4

बांदा

230

241.50

5

चित्रकूट

250

262.50

6

हमीरपुर

250

262.50

7

महोबा

500

525.00

8

बांदा कृषि विश्वविद्यालय, बांदा

20

21.00

 

अन्य/विविध व्यय

-

160.00

 

योग

2000

2260.00

 



कार्य योजना (वर्ष 2016-17)
कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश।
(भूमि संरक्षण अनुभाग)
कृषि भवन, लखनऊ।


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