गंगा स्वच्छता के लिये 1500 करोड़ - नितिन गडकरी

Submitted by RuralWater on Fri, 07/08/2016 - 11:12


.‘मिशन फॉर क्लिन गंगा’ का शुभारम्भ ऋषिकुल विद्यापीठ मैदान हरिद्वार में विधिवत हो गया। आयोजन से ऐसा लग रह था कि अब गंगा स्वच्छ हो जाएगी और दूसरी ओर आयोजन में पहुँचे लोग चर्चा गरम कर रहे थे कि सरकार को आखिर स्वीकार करना पड़ा कि गंगा गन्दली हो चुकी है। गंगा को कौन से तत्व हैं जो सर्वाधिक गन्दा कर रहे हैं? जिनकी चर्चा आयोजन में वक्ताओं ने एक बार भी नहीं की। खैर गंगा की पवित्रता और स्वच्छता के लिये आखिर सरकार ने 1500 करोड़ की एक धनराशी स्वीकृत करके कार्यक्रम का शुभारम्भ केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में कर दिया।

खचा-खचा भरे ऋषिकुल विद्यापीठ के मैदान में केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नमामि गंगे के अन्तर्गत 43 विभिन्न परियोजनाओं का शुभारम्भ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि गंगा आस्था, इतिहास एवं संस्कृति का प्रतीक है। गंगा की शुद्धता, निर्मलता, अविरलता एवं गंगा से सम्बन्धित योजनाओं को अब पाठ्यक्रमों में लाया जाएगा।

श्री गडकरी ने मुज्जफरनगर से देहरादून तक राष्ट्रीय राजमार्ग का कार्य दिसम्बर तक पूरा करने का आश्वासन दिया। नमामि गंगे के तहत 1500 करोड़ की लागत से 100 विभिन्न स्थानों पर 231 कार्यों का शुभारम्भ किया जा रहा है। इसमें 50 बड़े प्रकल्प, 1142 छोटे प्रकल्प तथा 60 एसटीपी भी हैं। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता के लिये जन सहयोग भी आवश्यक है। कहा कि इस योजना में घाटों की मरम्मत, सुदृढ़िकरण एवं श्मशान घाटों का निर्माण भी शामिल है।

इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार गंगा को निर्मल एवं स्वच्छ बनाने के लिये राज्य सरकार को जो भी दायित्व सौंपेगी राज्य सरकार पूर्ण सहयोग की भावना से इस कार्य को करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार ‘नमामि गंगे’ योजना को सफल बनाने के लिये वृक्षारोपण करने एवं वर्षाजल को संरक्षण करने के लिये बोनस देने वाला पहला राज्य है।

आज प्रदेश में डेढ़ दर्जन सीवेज पर कार्य हेतु एसटीपी स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने केमिकल युक्त जल के ट्रीटमेंट के लिये इंटर सेप्टर कैनाल के माध्यम से मिट्टी द्वारा ट्रीटमेंट की योजना को स्वीकृत करने का आग्रह किया। श्री रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार जल संरक्षण हेतु विशेष प्रयास कर रही है, आने वाले समय में उत्तरकाशी की तरह हरिद्वार में भी स्वच्छ गंगा जल मिलेगा। उन्होंने गंगा की स्वच्छता व निर्मलता के लिये होलोस्टिक अप्रोच पर बल दिया। उन्होंने कहा कि खुले में शौच की प्रथा से 45 प्रतिशत क्षेत्र में दूर हो चुकी है। नमामि गंगे योजना के तहत राज्य में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों पर बसे गाँवों को भी खुले में शौच से मुक्ति के लिये आग्रह किया, ताकि सभी गाँवों को खुले में शौच से मुक्त किया जा सके।

इस अवसर पर जल संरक्षण, नदी विकास एवं गंगा सरंक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा की सफाई हेतु 1916 में मदन मोहन मालवीय जी ने गंगा की निर्मलता एवं अविरलता के लिये प्रयास प्रारम्भ किया था। कहा कि गंगा 50 करोड़ से अधिक लोगों के लिये आजीविका का संसाधन है। उद्योगों के प्रदूषण एवं सीवेज के कारण गंगा प्रदूषित हुई है। कहा कि 2018 तक गंगा को निर्मल बनाने का हमारा संकल्प है, इसकी प्रगति के परिणाम अक्टूबर 2016 से दिखाई देने लगेंगे। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वछता के लिये वृक्षारोपण, घाट निर्माण, सीवर ट्रीटमेंट प्लान आदि का कार्य गंगा एवं उसकी सहायक नदियों पर किया जाएगा।

केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गंगा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यदि हम नदियों के साथ कोई छेड़खानी करते हैं तो इसकी विभीषिका भी हमें देखने को मिलती है, इसलिये प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना आवश्यक है। हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि आज हमने गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा की अविरलता एवं निर्मलता का संकल्प को पूरा करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है। कहा कि पहले की ‘स्पर्श गंगा परियोजना नमामि गंगे योजना’ में बदल गई है।

इस अवसर पर स्थानीय विधायक स्वामी यतीश्वरानन्द, संजय गुप्ता, मदन कौशिक, चन्द्रशेखर, प्रेम अग्रवाल, विजया बड़थ्वाल, मेयर मनोज गर्ग, शंकराचार्य राजराजेश्वर महाराज, स्वामी हरिचेतनानन्द, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, गंगा सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा, कुंवर प्रणव चैंपियन, आदेश चौहान, डॉ. रजत भार्गव, डॉ आर.के. गुप्ता, हरिहर मिश्रा, जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ, एसएसपी राजीव स्वरूप, मुख्य विकास अधिकारी सोनिका आदि उपस्थित थे।
 

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प्रेम पेशे से स्वतंत्र पत्रकार और जुझारु व्यक्ति हैं, विभिन्न संस्थानों और संगठनों के साथ काम करते हुए बहुत से जमीनी अनुभवों से रूबरू हुए। उन्होंने बहुत सी उपलब्धियाँ हासिल की।

 

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