खुले में शौच मुक्त अभियान से कम होगा प्रदूषण

Submitted by RuralWater on Sun, 01/29/2017 - 10:46
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शौचालय बनवाने के साथ ही हमें देश के शहरों की सीवेज सिस्टम को भी सुधारना होगा। आज हमारे देश के सारे शहरों का मल एवं कचरा बिना शोधित किये नदियों में डाल दिया जाता है। जिससे हमारे देश की गंगा और यमुना जैसी बड़ी नदी भी गन्दे नाले जैसी बन गई हैं। शौचालय एवं सीवेज सिस्टम को सुधार कर हम एक साथ कई मोर्चों को सुधार सकते हैं। देश में आज भी खुले में शौच आम बात है। गाँवों से लेकर शहरों तक में यह जारी है।

स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत साफ-सफाई के साथ छोटे स्तर पर प्रारम्भ की गई थी। इसी अभियान को विस्तृत रूप देते हुए पूरे भारत में खुले में शौच से मुक्त करने का अभियान चलाया गया है। प्रधानमंत्री जी के अपील और शहरी विकास मंत्रालय की योजनाओं से देश के कई राज्यों में कुछ जिले खुले में शौच से अपने को पूरी तरह से मुक्त करने में लगे हैं।

खुले में शौच के कारण कई बीमारियाँ फैलती रही हैं। खुले में शौच से हमारे वातावरण में वायु प्रदूषण तो फैलता ही है। ठोस मल पानी में बहकर जल को प्रदूषित करता है। यह जल हमारे स्वास्थ को बुरी तरह से प्रभावित करता है। जलजनित बीमारियों के कारण ही खुले में शौच से जल का प्रदूषित होना है। जिससे कई तरह के कीटाणु फैलते हैं।

प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर देश के विद्यालय, स्थानीय पंचायत से लेकर नगर निगम तक इस अभिशाप से देश को मुक्त करने में लगे हैं। विशेषज्ञों एवं पर्यावरणविदों का मानना है कि खुले में शौच से यदि देश मुक्त हो जाये तो देश में वायु और जल प्रदूषण में कुछ कमी आ सकती है।

अभी तक गाँवों में सरकार के प्रयास से बने शौचालय प्रयोग में कम ही थे। ढेर सारे शौचालय तो गोदाम बन गए हैं। इसका कारण जागरूकता का अभाव है। गाँव के ग्रामीण ही नहीं शिक्षित शहरी क्षेत्रों में भी जागरूकता की कमी है। इस कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।

अब स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राओं से अभियान में खुलकर सामने आने की बात कही जा रही है। जो भी छात्र-छात्राएँ इस अभियान में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें जिला प्रशासन अभियान को वॉलंटियर बनाएगा। जो घर-मुहल्ला और गाँवों में जाकर स्वच्छता और शिक्षा के प्रति लोगोें को जागरूक करने का काम करेंगे।

महिलाएँ आज समाज के हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी निभा रही हैं। महिलाएँ शिक्षित होने के साथ-साथ स्वावलम्बन की ओर अग्रसर हैं। समाज के हर क्षेत्र से जुड़े लोग स्वच्छता अभियान में शामिल हो रहे हैं। अभी हाल ही में मथुरा में आयोजित एक कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने भारत के चैम्पियनों को सम्बोधित किया।

यह कार्यक्रम स्वच्छ भारत के चैम्पियन सरपंचों और कलेक्टरों को सम्मानित करने के लिये आयोजित की गई थी। दो दिवसीय स्वच्छता सम्मेलन में अपने सम्बोधन में अक्षय कुमार ने कहा कि जब उन्हें स्वच्छता चैम्पियनों को सम्बोधित करने का निमंत्रण मिला तो उन्होंने बिना हिचक इसे स्वीकार करने में एक क्षण भी नहीं लगाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टिकोण स्वच्छ भारत मिशन के लिए ग्रामीण स्वच्छता तथा 2019 तक खुले में शौच मुक्त भारत बनाने के अभियान में योगदान देने के लिये सड़कों पर निकलने वाले सभी सरकारी और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को मैं सलाम करता हूँ।

अक्षय कुमार इस समय मथुरा के आसपास ग्रामीण स्वच्छता और परिवार के लिये शौचालय तथा महिलाओं की सुरक्षा और प्रतिष्ठा पर आधारित एक फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी सन्देश का गहरा असर हो इसके लिये जन मनोरंजकों द्वारा सामाजिक सन्देशों को फैलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिये शर्म की बात है कि जिस युग में हम मंगल ग्रह पर जा रहे हैं उसी युग में इस देश में लोग खुले में शौच कर रहे हैं।

जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे जन आन्दोलन बनाने की कल्पना की है, समुदायों को इस दिशा में अपने से अगुवाई कर गाँवों में उन लोगों को शौचालय बनाने के लिये प्रेरित करना चाहिए जो अपने परिवार के स्वास्थ्य की तुलना में मोबाइल फोन को प्राथमिकता देते हैं।

खुले में शौच से जल की शुद्धता और गुणवत्ता खत्म हो जाती है। इसके बाद न तो पानी पीने लायक रहता है और नहाने लायक। गन्दगी से कई तरह के जीवाणु जल में पैदा हो जाते हैं जो हमारे स्वास्थ को प्रभावित करते हैं। आज भी भारत की आधी से अधिक आबादी खुले में शौच जाने को मजबूर है।

सरकारी योजनाओं में शौचालय निर्माण की बात तो जोर-शोर से की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह कामयाब नहीं हो पाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़ों के मुताबिक विश्व में प्रतिवर्ष करीब 6 करोड़ लोग डायरिया से पीड़ित होते हैं, जिनमें से 40 लाख बच्चों की मौत हो जाती है। डायरिया का मुख्य कारण गन्दा जल और हमारे आसपास की गन्दगी है। खुले में पड़े हुए मल-मूत्र से न केवल भूजल प्रदूषित होता है, बल्कि कृषि उत्पाद भी इस प्रदूषण से अछूते नहीं हैं।

यह डायरिया, हैजा, टाइफाइड जैसी घातक बीमारियों के कीटाणुओं को भी फैलाता है। उचित शौचालय न केवल प्रदूषण और इन बीमारियों से बचने के लिये जरूरी है बल्कि एक साफ-सुथरे सामुदायिक पर्यावरण के लिये भी जरूरी हैं। विकासशाील देशों में कई बीमारियों का कारण गन्दगी है। जिसमें जल प्रदूषण सर्वप्रमुख है।

शौचालय बनवाने के साथ ही हमें देश के शहरों की सीवेज सिस्टम को भी सुधारना होगा। आज हमारे देश के सारे शहरों का मल एवं कचरा बिना शोधित किये नदियों में डाल दिया जाता है। जिससे हमारे देश की गंगा और यमुना जैसी बड़ी नदी भी गन्दे नाले जैसी बन गई हैं। शौचालय एवं सीवेज सिस्टम को सुधार कर हम एक साथ कई मोर्चों को सुधार सकते हैं।

देश में आज भी खुले में शौच आम बात है। गाँवों से लेकर शहरों तक में यह जारी है। खुल में शौच से सबसे अधिक जल और वायु की शुद्धता प्रभावित होती है। जिससे बीमारियों के फैलने की सम्भावना अधिक होती है। यदि हम खुले में शौच से मुक्ति पा सके तो हमें एक साथ कई मोर्चों पर फतह मिल जाएगी। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता से हमें जलजनित बीमारियों से मुक्ति के साथ शुद्ध हवा भी मयस्सर होगी।

Comments

Submitted by ram gopal krishan (not verified) on Sat, 01/13/2018 - 01:18

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nagar nigam dwara banay gaye shouchalayon me logon se paise maange jaate hain. har shauchalay ke bahar bahut gandagi hai aur jo paise nahi deta usko shauchalay ke bahar khule me shauch karne ko shauchalay ka attrndent khud bolta hai.

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.पत्रकारिता को बदलाव का माध्यम मानने वाले प्रदीप सिंह एक दशक से दिल्ली में रहकर पत्रकारिता और लेखन से जुड़े हैं। दिल्ली से प्रकाशित होने वाले कई अखबारों और पत्रिकाओं से जुड़कर काम किया।

वर्तमान में यथावत पाक्षिक पत्रिका में बतौर प्रमुख संवाददाता कार्यरत हैं। प्रदीप सिंह का जन्म 13 जुलाई 1976 को प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ। प्राथमिक से लेकर बारहवीं तक की शिक्षा प्रतापगढ़ में हुई।

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