रिस्पना से ऋषिपर्णा का संकल्प भूली सरकार

Submitted by HindiWater on Thu, 07/04/2019 - 11:17
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अमर उजाला, 3 जुलाई 2019

सीवर और उद्योगों की गंदगी रिस्पना नदी को कर रही प्रदूषित।सीवर और उद्योगों की गंदगी रिस्पना नदी को कर रही प्रदूषित।

रिस्पना से ऋषिपर्णा अभियान के तहत कैरवान गांव और मोथरोवाला में शीशम, हरड़, बहेड़ा, बेलपत्र, संदल, महल, तेजपात, अमलतास, कनजी, कंजू, कचनार, बांस, आंवला, कटहल, टिकोमा, पिलन, अर्जुन, अमरूद, मौरेंग, आम, जामुन और नींबू आदि प्रजातियों के करीब ढाई लाख पौधों लगाए थे, लेकिन इनमें से ज्यादातर की स्थिति ठीक नही है। कैरवान गांव में करीब 40 प्रतिशत पौधे सूख गए हैं, जबकि मोथरोवाला में करीब 80 प्रतिशत पौधों ने दम तोड़ दिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिछले साल अभियान के दौरान कहा था कि स्पिना किनो पौधे लगाने के बाद जल्द रिस्पना के किनारे पड़ी गंदगी की सफाई के लिए अभियान चलाया जाएगा, लेकिन करीब एक साल बाद भी रिस्पना की सफाई के लिए अभियान नहीं चलाया गया है, जिस कारण वहां बड़े पैमाने पर गंदगी फैली हुई है। सरकार ने जल्द इसका संज्ञान नहीं लिया तो रिस्पना से ऋषिपर्णा अभियान अधूरा ही रहेगा।

कैरवान गांव में मूसरी वन प्रभाग की ओर से 35 कच्चे तालाब कनाए गए हैं, जिसमें बारिश का पानी एकत्र किया जाता है। पहाड़ी होने की वजह से यहां पानी नहीं रुकता था। ऐसे में ज्यादातर पौधों का बचना मुश्किल था, लेकिन छोटे-छोटे कच्चे तालाबों में एकत्र किये गए करीब 3.5 करोड़ लीटर से अधिक पानी से इस समस्या का तोड़ निकाल लिया गया है।  

पिछले साल शिखर फाॅल स्थित कैरवान गांव से मोथरोवाला तक करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र में 50 से अधिक सेक्टर बनाए गए थे। जिसमें 22 जुलाई 2018 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में बच्चे, युवा, जवान और बुजुर्गों के साथ विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने ढाई लाख पौधे रोपे थे। सभी ने इन पौधों के रखरखाव का संकल्प लिया था, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए दो साल के भीतर रिस्पना को ऋषिपर्णा बनाने का सरकार का संकल्प अधूरा ही दिखता है।

अभियान को करीब एक साल पूरा होने वाला है। कैरवान गांव की स्थिति तो बेहतर दिखती है। यहां के स्थानीय लोग पौधों की देखभाल में अपना योगदान दे रहे हैं। वहीं, वन विभाग की ओर से भी करीब 50 पौधे भेजे गए हैं। जो सूख चुके पौधों के स्थान पर लगाए जाएंगे। स्थानीय निवासी विशंभर सिंह कहते हैं कि हम सभी इन पौधों को अपना परिवान मानते हैं, हमें पता है कि कल को जब ये पौधे पेड़ बनेंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ियां शुद्ध और स्वच्छ हवा ले सकेंगी। हम सुबह और शाम को इन पौधों को पानी देते हैं। केवल वही पौधे सूखे हैं, जहां मिट्टी नहीं है। बरसात से पौधे हरे हो रहे हैं। उधर मोथरोवाला में पौधों के आसपास काफी झाड़ियां उग आई हैं। रोपे गए अधिकतर पौधे सूख गए हैं। इसकी वह इन पौधों की देखभाल न होना हैं अगर संबंधित विभाग और स्वयंसेवी संगठन यहां भी कैरवान गांव के लोगों की तरह कोशिश करते तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

एकत्र कर रही बारिश का पानी

कैरवान गांव में मूसरी वन प्रभाग की ओर से 35 कच्चे तालाब बनाए गए हैं, जिसमें बारिश का पानी एकत्र किया जाता है। पहाड़ी होने की वजह से यहां पानी नहीं रुकता था। ऐसे में ज्यादातर पौधों का बचना मुश्किल था, लेकिन छोटे-छोटे कच्चे तालाबों में एकत्र किये गए करीब 3.5 करोड़ लीटर से अधिक पानी से इस समस्या का तोड़ निकाल लिया गया है। मसूरी वन प्रभाग के एसडीओ केपी वर्मा बताते हैं कि जमीन के अधिक पानी सोखने के कारण पौधे विकसित हो रहे हैं। 

 

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