जहरीली गैसों के साये में दिल्ली

Submitted by RuralWater on Tue, 11/08/2016 - 11:25
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राजधानी के वायुमण्डल में घुले जहर से बचने के लिये लोग मास्क पहन कर निकल रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक पिछले आठ दिनों में दिल्ली एनसीआर में मास्क की बिक्री 10 गुना बढ़ गई है। मास्क की माँग इतनी अधिक है कि स्टॉक कम पड़ गया है। बाजार में 90 से 2200 रुपए तक के मास्क मिल रहे हैं। अमेजन पर मास्क की डिमांड 13 गुना बढ़ गई है। सेल्स भी छह गुना बढ़ी है। एसोचैम के मुताबिक, एनसीआर में पिछले चार दिनों में एयर फ्यूरीफायर की माँग में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में एक सप्ताह से धुन्ध छाया हुआ है। वायु प्रदूषण के चलते राजधानी में साँस लेना मुश्किल है। ऐहतियातन दिल्ली में बच्चों के स्कूल बन्द कर दिये गए हैं। स्मॉग से निपटने के लिये दिल्ली सरकार ने कई निषेधाज्ञा जारी किया है। ब्ल्ड प्रेशर, एलर्जी, अस्थमा के रोगियों और बुजुर्गों की समस्या बढ़ गई है। फेफड़ा, नाक, कान और गले में संक्रमण में बढ़ोत्तरी हुई।

राजधानी की सड़कों पर चलने वालों को आँखों में एलर्जी महसूस हो रही है। लेकिन स्मॉग के कारणों को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही है। कुछ लोग इसे दीपावली के अवसर पर फोड़े गए पटाखों को तो कुछ पंजाब और हरियाणा में धान के पुआल को जलाने को कारण बता रहे हैं।

एक वर्ग राजधानी और एनसीआर में दिनोंदिन बढ़ रहे वाहनों को इसका कारण बता रहा हैं। लेकिन सरसरी तौर पर इसका कोई एक कारण नहीं है। यह पंजाब हरियाणा के पुआल जलाने से उत्पन्न हुए धुन्ध, वाहनों के धुओं से निकलने वाली गैस, फैक्टरियों की धुआँ और निर्माण कार्यों से निकलने वाले धूल का संयुक्त परिणाम है। देश और दुनिया में औद्योगीकरण और विकास ने कई तरह की समस्याएँ उत्पन्न की हैं। वायु प्रदूषण की समस्या भी उसी की एक पैदाइश है।

फिलहाल दिल्ली में बढ़ रहे वायु प्रदूषण ने अब अपना तेवर हर आम-खास को दिखा दिया है। पर्यावरण प्रदूषण के मुद्दे को उठाने वाले संगठनों को अभी तक हमारे देश की सरकार और उद्योगपति कुछ बैठे ठाले लोगों का फैशन और निहित स्वार्थ बताते थे। लेकिन अब खतरा सामने है। तब वायु प्रदूषण को दूर करने की तैयारियों पर विचार किया जा रहा है।

एक सप्ताह से दिल्ली में साँस लेना दूभर बना हुआ है। दिल्ली का वायुमण्डल कितना विषाक्त हो गया है। इसका अन्दाजा आप जून- 2016 में आई विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट से लगा सकते हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली का नाम दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूँची में 11वाँ स्थान रखता है।

जबकि इससे पहले 2014 में आई रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर था।

राजधानी के वायुमण्डल में घुले जहर से बचने के लिये लोग मास्क पहन कर निकल रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक पिछले आठ दिनों में दिल्ली एनसीआर में मास्क की बिक्री 10 गुना बढ़ गई है। मास्क की माँग इतनी अधिक है कि स्टॉक कम पड़ गया है। बाजार में 90 से 2200 रुपए तक के मास्क मिल रहे हैं। अमेजन पर मास्क की डिमांड 13 गुना बढ़ गई है। सेल्स भी छह गुना बढ़ी है। एसोचैम के मुताबिक, एनसीआर में पिछले चार दिनों में एयर फ्यूरीफायर की माँग में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है।

वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिये आम जन सड़क पर भी उतर रहे हैं। अदालत का दरवाजा खटखटाया जा रहा है। शहर की आबोहवा सुधारने की माँग करते हुए कुछ संगठनों ने बच्चों के साथ जन्तर-मन्तर पर प्रदर्शन किया।

नासा ने उत्तर भारत की इमेज जारी कर कहा कि पंजाब में फसल जलने का धुआँ दिल्ली तक पहुँचा। सेटेलाइट से दिल्ली की साफ इमेज लेना भी मुश्किल हुई।

दिल्ली को दमघोंटू स्मॉग के वातावरण में धकेलने की मुख्य विलेन पश्चिमी हवाएँ हैं। सिर्फ दिल्ली ही नहीं पश्चिमी हवाओं के साथ आई इस धुन्ध का असर गंगा बेसिन में भी देखने को मिलेगा। खासतौर पर धुन्ध का असर सर्दी और कृषि पर पड़ेगा। फसलों पर पाले की मार बढ़ जाएगी।

पश्चिमी हवाओं का दिल्ली और आसपास के इलाकों में पहुँचने का समय वैसे तो नवम्बर का आखिरी हफ्ता या दिसम्बर का पहला सप्ताह होता है, लेकिन इस बार भूमध्य सागर की तरफ से ये हवाएँ मध्य एशियाई देशों से धूल कण आदि एयरोसोल लेकर पहले ही आ गई हैं।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लगातार आठ दिन से स्मॉग (पॉल्यूशन और धुन्ध) से प्रदूषण तय मानकों से 10 गुना बढ़ चुका है। चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक इसका तात्कालिक कारण दीपावली के अवसर पर फोड़े गए पटाखे हैं। पटाखों से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है। साँप गोली, बम की लड़ी, अनार और चकरी जैसे पटाखे 2000 गुना ज्यादा पार्टिकुलेट मैटर छोड़ते हैं। एक पटाखे से 464 सिगरेट जितना धुआँ निकलता है। पटाखों का धुआँ धुन्ध के कारण हट नहीं पाया। हवा अभी फैल नहीं रही है।

इसके साथ ही पराली, लकड़ी और कोयला ने भी दिल्ली का प्रदूषण बढ़ाया है। पंजाब में 320 लाख टन फसल का कचरा जलने से और भलस्वा डम्पिंग ग्राउंड में आग ने दिल्ली-एनसीआर में धुन्ध को बढ़ा दिया है। दिल्ली में वायु प्रदूषण का आलम यह हो गया है कि पीएम- 2.5 बढ़कर 588 माइक्रोन और पीएम- 10 बढ़कर 844 माइक्रोन पहुँच गया। अति सूक्ष्म कण पीएम-10 के लिये निर्धारित मानक 100 माइक्रोन है और पीएम- 2.5 के लिये मानक 60 माइक्रोन है।

आँकड़ों के मुताबिक दिल्ली में धुन्ध की यह दशा पिछले 17 साल के रिकॉर्ड को पार कर गया है। सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट के अनुसार लंदन में 1952 में स्मॉग की वजह से 4 हजार लोगों की मौत हो गई थी। तब SO2 हाई लेवल पर था। पीएम लेवल 500 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर था।''

''यहाँ SO2 भले ही उतना ज्यादा न हो, लेकिन दिवाली पर हवा में कई तरह की जहरीली गैसों का स्तर बढ़ा है। कुल मिलाकर अगर प्रदूषण का यह स्तर बरकरार रहा तो दिल्ली में भी साँस सम्बन्धित बीमारियों के कारण लोगों की मौत हो सकती है।''

वायु प्रदूषण और जहरीली हवा का खतरा जब सिर चढ़ कर मँडराने लगा है तो दिल्ली और केन्द्र सरकार प्रदूषण से लड़ने के लिये कदम उठा रहे हैं। अभी तक सरकार नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के निर्देशों को मानने से इनकार करते रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से लड़ने के लिये सरकार ने 10 बड़े फैसले लिये। जिसमें कुछ दिनों तक राजधानी में निर्माण कार्यों पर रोक, जनरेटर नहीं चलाने और एमसीडी को पत्तियाँ और कूड़े के ढेरों में लगी आग फौरन बुझाने के निर्देश दिये गए हैं। बदरपुर पावर प्लांट को बन्द रखने और प्लांट से फिलहाल राख उठाने पर पाबन्दी लगा दी गई है।

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.पत्रकारिता को बदलाव का माध्यम मानने वाले प्रदीप सिंह एक दशक से दिल्ली में रहकर पत्रकारिता और लेखन से जुड़े हैं। दिल्ली से प्रकाशित होने वाले कई अखबारों और पत्रिकाओं से जुड़कर काम किया।

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