विरोध में उठते स्वर एवं प्रतिक्रियाएँ

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Source
साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल (SANDRP), अप्रैल 2004

केन-बेतवा नदी जोड़केन-बेतवा नदी जोड़‘‘सरकार कहती है कि खेत का पानी खेत में रहना चाहिए एवं गाँव का पानी गाँव में रहना चाहिए तो फिर केन नदी का पानी बेतवा नदी में ले जाने की बात क्यों हो रही है।’’
(प्रो. चन्द्र प्रकाश शर्मा, विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, अतर्रा महाविद्यालय, बांदा, एवं पूर्व विधायक, बांदा)

किसान बेमौत मरेंगे


केन-बेतवा गठजोड़ हो गया तो लाखों किसान बेमौत मरेंगे। वर्तमान समय में केन नदी से उत्तर प्रदेश की डेढ़ लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है। गठजोड़ हो गया तो सूखे की मार झेलने वाला बुन्देलखण्ड पानी को तरस जाएगा। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने समझौता पर हस्ताक्षर किये तो ठीक नहीं होगा।’’
चन्द्र प्रकाश शर्मा-पूर्व विधायक, बांदा (अमर उजाला 150304)

अमूल्य सम्पदा का विखण्डन नहीं होने देंगे


केन-बेतवा गठजोड़ से होने वाली विभीषिका से चिन्तित समाजसेवियों ने केन्द्र और प्रदेश सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा कि सरकार को विदेशी कम्पनियों के साथ मिलकर देश की अमूल्य सम्पदा को विखण्डित नहीं करने दिया जाएगा। केन का एक बूँद पानी बेतवा में नहीं जाने दिया जाएगा। भले ही इसके लिये जेल जाना पड़े।
(अमर उजाला 150304)

केन नहर प्रणाली ध्वस्त हो जाएगा


‘‘केन नदी पर बाँध और पानी का स्थानान्तरण केन नहर प्रणाली को ध्वस्त कर देगा। ऐसा हो गया तो बांदा जिला रेगिस्तान में बदल जाएगा।’’
जमुना प्रसाद बोस - पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार (अमर उजाला एवं दैनिक श्री इण्डिया 150304)

केन नदी के जल के साथ संकल्प


14 मार्च 2004 को बांदा में आयोजित केन बचाओ सम्मेलन में उपस्थित बुद्धिजीवियों, विशेषज्ञों, किसानों एवं आम नागरिकों ने केन-बेतवा नदीजोड़ परियोजना की सम्भाव्यता को खारिज किया। सम्मेलन के बाद सभी लोगों ने केन नदी तक पदयात्रा करके नदी का पानी हाथ में लेकर नदी की प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा करने एवं केन को बेतवा से न जुड़ने देने का संकल्प लिया।
(अमर उजाला, दैनिक जागरण 150304)

ओरछा में 23 जुलाई 2003 को आयोजित बुन्देलखण्ड जल-संसद पारित प्रस्ताव


1. बुन्देलखण्ड जल संसद सर्वसम्मति से भारत सरकार की नदियों को जोड़ने की परियोजना के अन्तर्गत केन-बेतवा जोड़ने तथा केन नदी का जल बेतवा नदी की ओर मोड़ने का विरोध करती है क्योंकि यह योजना अव्यावहारिक तथा पूरे बुन्देलखण्ड के लिये विनाशकारी है। इस योजना से केन तथा बेतवा दोनों ही नदियों के प्रभाव क्षेत्र में लाखों को अभूतपूर्व त्रासदी का सामना करना पड़ेगा। बुन्देलखण्ड जल संसद भारत सरकार से अनुरोध करती है कि यह परियोजना अविलम्ब निरस्त की जाय।

2. बुन्देलखण्ड जल संसद सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित करती है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्रामवार सम्पूर्ण भूमि का 8 प्रतिशत सार्वजनिक उपयोग के लिये आरक्षित किया जाय। ऐसे किसी भूभाग पर यदि व्यापक रूप से अतिक्रमण या अन्यथा कब्जा हो, तो उसे तत्काल समाप्त किया जाय। सार्वजनिक सम्पत्ति तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिये नागरिकों के संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित किये जाये।

3. बुन्देलखण्ड जल संसद सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित करती है कि प्रत्येक गाँव तथा नगर में पारम्परिक तालाबों का सर्वेक्षण कर उन पर हुए अनधिकृत कब्जे हो या उन पर यदि निर्माण किया गया हो तो उसे हटाकर उनका पुनर्निर्माण, गहरीकरण तथा उनमें पानी लाने वाली गुलों तथा नालियों का सुधार किया जाय ताकि उपलब्ध पानी का संरक्षण हो सके। ऐसे सभी कार्य जिला योजना के अन्तर्गत लेकर उन्हें ग्राम पंचायत अथवा स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से पूरे करवाए जाएँ।

4. बुन्देलखण्ड जल संसद सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित करती है कि प्रत्येक गाँव में एक असरकारी जल-रक्षक समिति बनाई जाय जो तालाबों, कुओं आदि सभी सार्वजनिक जल स्रोतों की रक्षा का दायित्व वहन करें, इस हेतु जल रक्षक नियुक्त करें एवं जल स्रोतों के संरक्षण एवं निर्माण में होने वाली धांधलियों तथा भ्रष्टाचार के प्रति जन-जागरूकता पैदा करें।

5. बुन्देलखण्ड जल-संसद सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित करती है कि जल संरक्षण संग्रह हेतु पारम्परिक जैविक समग्र कृषि अपनाई जाय, कम पानी वाली फसलें प्रोत्साहित की जाय तथा उपयुक्त वृक्षों के माध्यम से वनीकरण को बढ़ावा दिया जाय।

केन-बेतवा गठजोड़


पुष्पेन्द्र भाई

केन बेतवा का गठजोड़
साजिश बनी बड़ी बेजोड़
धन पशुओं का है यह जोर
सुनों किसानों बातें और
आ गये भैया घर में चोर
जागो पकड़ो हो रही भोर
आ गये छीनन मुह कौ कौर

केन...........
पानी का ऐसो व्यौपार
मची आज है मारा मार
ऐसी जुगत करैं मक्कार
ऐन केन की मौड़े धार
कैसा यह बेहुदा मोड़
केन .....
सोचो बिन पानी का सार
जीवन तल बिन है बेकार
चलो बताये हम चहुं ओर
गाँव-गाँव में कर दें शोर
दें जवाब उनको मुँह मोड़
केन ...................
टुटे बिखरे दिल ना जोड़
राज्य करे जन जन को तोड़
घर में नइंया कौड़ी फोड़
कर रहे खर्च करोड़ करोड़
गोरो की यह तोड़ मरोड़
केन बेतवा गठजोड़
साजिश बनी बड़ी बेजोड़।


नदीजोड़ योजना से सम्बन्धित कुछ उपयोगी संसाधन (Some Important Resources on River Linking Scheme)


1. River Linking: A Millenium Folly? Edited by Medha Patkar; NAPM & Initiative, Mumbai, 2004.

2. Interlinking River : Contradictions & Confrontation; Narrated by- Gopal Krishna; Edited by Dr. Umashankari; South Asian Dialogues on Ecological Democracy & CSDS, Delhi, 2004.

3. Dams, Rivers & People (A Bimonthly Journal, Published by SANDRP); SANDRP, Delhi (Annual Subscription Rs. 100/-)

4. Task Force on Interlinking of Rivers : Interbasin Water Transfer Proposals (Ministry of Water Resources, GOI) New Delhi, 2003. http://riverlinks.nic.in/

5. Ken-Betwa Link : Why it won’t click : An Analysis of the Ken-Betwa Link Proposal; SANDRP, New Delhi, 2004.

6. Ken-Betwa Link : A People’s Assessment of the First Link in the River Linking Project; Research Foundation for science Technology & Ecology, New Delhi, Unpublished Draft.

7. Website of Union Ministry of Water Resources : www.wrmin.nic.in

8. riverlink@yahoogroups.com. A discussion group on River Link Proposal, managed by- Gopal Krishna, Toxic Link Delhi.

 

केन-बेतवा नदीजोड़

(इस पुस्तक के अन्य अध्यायों को पढ़ने के लिए कृपया आलेख के लिंक पर क्लिक करें)

क्रम

अध्याय

1

केन-बेतवा नदीजोड़ क्यों असम्भव है

2

केन नदी घाटी

3

बेतवा नदी घाटी

4

नदीजोड़ प्रस्ताव

5

विनाशकारी होगा केन-बेतवा नदीजोड़

6

केन-बेतवा नदी जोड़ योजना का बुन्देलखण्ड जल संसद द्वारा विरोध

7

विरोध में उठते स्वर एवं प्रतिक्रियाएँ

 

केन-बेतवा नदीजोड़ : खेत का पानी खेत में, गाँव का पानी गाँव में तो प्यासी केन का पानी बेतवा में क्यों? सैण्ड्रप, दिल्ली, 2004.

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