सेव गंगा, गिरिराज, ट्रुथ एंड नाॅन वायलेंस पर विमर्श

Submitted by Hindi on Sun, 03/11/2018 - 18:17

चम्पारण तथा खेड़ा सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के मौके पर बीती जनवरी-फरवरी के दौरान वह महाराष्ट्र में गंगा, गिरिराज, सत्य और अहिंसा यात्रा का आयोजन कर चुकी हैं। पानी हवा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंगा, हिमालय तथा गोदावरी, कृष्णा, कावेरी तथा पश्चिम घाटों के संरक्षण को वे ज़रूरी मानती हैं। वह चेताती हैं कि भारत की महान नदियों को मरते देख यदि हम चुप बैठे, तो प्रकृति माँ हमें माफ़ नहीं करेगी। भावी पीढ़ी हमारी भर्त्सना करेगी, सो अलग। अतः आवश्यक है कि हम स्वयं को आधुनिक धृतराष्ट्र न बनने दें।

अवसर : दाण्डी मार्च वर्षगाँठ
तिथि : 12 मार्च, 2018
स्थान : गाँधी दर्शन, राजघाट, नई दिल्ली
समय : सुबह 10.30 बजे से दोपहर बाद 4.30 बजे तक
आयोजक : सेव गंगा मूवमेंट (पुणे), गाँधी दर्शन एवं स्मृति समिति, नई दिल्ली तथा कस्तूरबा गाँधी नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट एवं अन्य।

 

गाँधी दर्शन के आलोक में जल सत्याग्रह


भारत की आज़ादी के लिए जन-जनार्दन को एकजुट करने और ब्रिटिश सत्ता को जनता की सत्ता की ताक़त बताने के लिए महात्मा गाँधी ने कभी दाण्डी मार्च किया था। 12 मार्च की तिथि, दाण्डी मार्च का महत्व याद दिलाने वाली तिथि है। आयोजकों ने गत वर्ष की भाँति, इस वर्ष भी इस तिथि को 'जल सत्याग्रह दिवस' के रूप में मनाने का आह्वान किया है।

''गंगा, सभी नदियों और जल संचरनाओं की प्रतीक है; गिरिराज हिमालय, सभी पर्वतों, जंगलों और वन्यजीवन का और गांधी, सत्य और अहिंसा की संस्कृति का।'' - प्रेषित विस्तृत आमंत्रण पत्र में गंगा, हिमालय और गाँधी को इन शब्दों में एक साथ जोड़ने की कोशिश करते हुए श्रीमती रमा राउत ने खुले मन के रचनात्मक समालोचना विमर्श की इच्छा जताई है।

श्रीमती रमा राउत, भारत सरकार की गंगा पुनरोद्धार विशेषज्ञ सलाहकार समिति की सदस्य होने के साथ-साथ 'सेव गंगा मूवमेंट'’ की संस्थापक-संयोजक हैं। वह, राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की विशेषज्ञ सदस्य भी रह चुकी हैं। चम्पारण तथा खेड़ा सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के मौके पर बीती जनवरी-फरवरी के दौरान वह महाराष्ट्र में गंगा, गिरिराज, सत्य और अहिंसा यात्रा का आयोजन कर चुकी हैं। पानी हवा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंगा, हिमालय तथा गोदावरी, कृष्णा, कावेरी तथा पश्चिम घाटों के संरक्षण को वे ज़रूरी मानती हैं। वह चेताती हैं कि भारत की महान नदियों को मरते देख यदि हम चुप बैठे, तो प्रकृति माँ हमें माफ़ नहीं करेगी। भावी पीढ़ी हमारी भर्त्सना करेगी, सो अलग। अतः आवश्यक है कि हम स्वयं को आधुनिक धृतराष्ट्र न बनने दें।

 

गंगा-गिरिराज संरक्षण के विमर्श बिंदु


हिमालय और गंगा को बचाने के लिए हमें क्या करना चाहिए ? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए श्रीमती राउत खुद लिखती हैं कि गंगा को राष्ट्रीय नदी का सम्मान दिलाने और संरक्षण के लिए आवश्यक प्रावधान करने चाहिए। नदियों को उनके अधिकार प्रदान करने के लिए कानून बनाना चाहिए।

बैक्टीरियोफाॅज, नदी की स्वयं को साफ करने की क्षमता, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाये रखने के लिए समुचित पर्यावरणीय/पारिस्थितिकीय प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कदम उठाने चाहिए।

सिंचाई के लिए नदी पर निर्भरता घटाने के लिए वर्षा जल संचयन की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है।

चूँकि हमारे मल शोधन संयंत्र मलीन जल को पीने योग्य बनाने में सक्षम नहीं है; अतः नदियों में मिलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए भारत की सभी नदियों के संदर्भ में 'ज़ीरो डिस्चार्ज' की नीति लागू करनी चाहिए। तालाब तथा वनस्पति आधारित मल शोधन तथा कचरा प्रबंधन प्रणालियों को अपनाया जाना चाहिए।

हिमाालय, पारिस्थितिकीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। इस संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए हिमालय को जीव व वनस्पति की दृष्टि से संरक्षित क्षेत्र घोषित करने तथा नदियों को 'वाइल्ड रिवर’ की भाँति संरक्षित करने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रधानमंत्री अध्यक्षता में राष्ट्रीय हिमालय पारिस्थितिकी संरक्षण एवं पुनर्स्थापना प्राधिकरण बनना चाहिए। पश्चिम घाटों के लिए बनी योजना की भांति राष्ट्रीय हिमालय पारिस्थितिकी संरक्षण एवम् पुनस्र्थापना योजना बननी चाहिए।

गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदी घाटी प्रबंधन योजना की भी ज़रूरत बताये हुए श्रीमती राउत बांध, बैराज, खनन और नदी जोड़ जैसे विवादित मसलों पर भी शीघ्र निर्णय की ज़रूरत महसूस करती हैं। नदी तट की सुंदरता बढ़ाने के नाम पर नदी की पारिस्थितिकी के साथ खिलवाड़ की इज़ाजत कदापि नहीं दी जानी चाहिए।

इसमें आगे जोड़ते हुए वह कहती हैं कि गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी, अन्तोदय, सर्वोदय, सत्याग्रह, चरित्र निर्माण के जरिये ग्रामीण भारत को ऐसे आदर्श स्थान के रूप में परिवर्तित करना चाहिए, जो प्राकृतिक शुद्धता और प्रकृति के ममत्व भरे पालने में सादा जीवन, उच्च विचार का मार्ग प्रशस्त करे। समाज में नैतिक भाव के विकास के बिना यह हो नहीं सकता; लिहाजा, शिक्षा व परिवेश में नैतिक मूल्यों को विशेष तवज्जो तो दी ही जानी चाहिए।

 

प्रतिभागिता एवम् अन्य जानकारी के लिए संपर्क


श्रीमती रमा राउत
ई मेल : ramarauta@rediffmail.com
ramarauta29@gmail.com
वेबसाइट : savegangamovement.org
मोबाइल : 09765359040, 09930537344

कार्यक्रम की ज्यादा जानकारी के लिये अटैचमेंट देखें।

 

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अरुण तिवारीअरुण तिवारी

शिक्षा:


स्नातक, पत्रकारिता एवं जनसंपर्क में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

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