अब डराने लगी ग्लोबल वार्मिंग

Submitted by UrbanWater on Fri, 03/31/2017 - 11:45
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दैनिक भास्कर, 31 मार्च, 2017

देशभर के मौसम वैज्ञानिक चिन्तित हैं कि इस साल गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है। मार्च माह से जो लक्षण दिख रहे हैं उससे नहीं लगता कि वैज्ञानिक गलत साबित होंगे। वैसे तो अब तक तथ्यों के हिसाब से सबसे गर्म साल 2016 था, जो इसके पहले के 115 सालों में सबसे गर्म था, लेकिन अब वैज्ञानिकों को आशंका है कि साल 2017, साल 2016 को भी पीछे छोड़ देगा। मौसम विभाग के मुताबिक इस साल गर्मी का पारा 49 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। अभी अप्रैल का महीना भी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन गर्मी अपने जो तेवर दिखा रही है उससे डर लगने लगा है। अभी से जिस तरह की तपिश महसूस होने लगी है, उससे इस साल मई-जून के भीषण जलन का अन्दाजा लगाया जा सकता है। इस सबसे मौसम विभाग भी चिन्तित दिख रहा है। देश के मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि देश के कई हिस्सों, विशेषकर उत्तर-पश्चिम के हिस्सों में, इस साल पिछले साल के मुकाबले या कहें कि अब तक के इतिहास के मुकाबले, तापमान 1-2 डिग्री तक हर हाल में ज्यादा रहेगा, लेकिन हो सकता है इससे भी ज्यादा रहे।

वैज्ञानिकों की चिन्ता इस लिहाज से सही साबित होती दिख रही है कि इस साल चैत्र माह के पहले दिन (जिसे गर्मी के आगमन का पहला दिन भी माना जाता है) शिमला में पारा 25 डिग्री के पार हो गया। इसके चलते यहाँ गर्मी का सात साल का रिकॉर्ड टूटा है। सात साल का आँकड़ा इसलिये मायने रखता है क्योंकि सात साल पहले करीबन 100 साल का आँकड़ा टूटा था। इस बार मार्च माह के अन्त में महाराष्ट्र के भीरा में पारा 46.5 डिग्री रिकॉर्ड दर्ज किया गया।

यह देश में सबसे गर्म जगह रही। जयपुर में 28 मार्च 2017 को पारा 41 डिग्री पर जा पहुँचा। पिछले 10 सालों में यह पहला मामला है, जब मार्च में दिन का तापमान इतना ऊँचा रहा हो। इस तरह देखें तो 1901 के बाद अभी तक साल 2016 सबसे ज्यादा गर्म साल रहा था, लेकिन लगता है साल 2017 आँकड़ों की नई इबारत लिखेगा। गौरतलब है कि पिछले साल देश भर में गर्मी से 1600 से अधिक लोगों के मरने की खबर आई थी। इनमें से 700 से अधिक मौतें सिर्फ लू लगने से हुई थीं। आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में सबसे अधिक 400 लोग मारे गए थे।

इस खौफनाक मौसम की पृष्ठभूमि में इस साल देश के कई राज्य तपने का नया रिकॉर्ड कायम कर सकते हैं। पुणे मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखण्ड, वेस्ट बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना में सामान्य से काफी ज्यादा तापमान रह सकता है।

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र-विदर्भ और कोंकण के तटीय इलाकों में औसत से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। राजधानी दिल्ली में 28 मार्च 2017 को गर्मी ने पिछले 6 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यहाँ अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस रहा। पिछले 6 वर्षों में 28 मार्च 2017 के जितनी गर्मी कभी नहीं पड़ी थी।

वर्ष 2011 में इस दिन अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। जबकि इस साल मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 6 डिग्री और न्यूनतम तापमान सामान्य से 4 डिग्री ज्यादा रहा। ऐसा नहीं है कि गर्मी की यह दस्तक दबे पाँव आई हो। पूरी दुनिया के मौसम वैज्ञानिक पिछले दो-तीन दशकों से आगाह कर रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग लगातार खतरनाक सीमा की तरफ बढ़ रही है, लेकिन यह पहला समय है जब ग्लोबल वार्मिंग भविष्य की चिन्ता या अनुमान नहीं रही, बल्कि सामने या कहें दरवाजे पर खड़ी नजर आ रही है। हाल के वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि दुनिया का तापमान लगातार तेजी से बढ़ रहा है।

हिन्दुस्तान की भी यही स्थिति है। पिछले छह सालों से देश का न्यूनतम तापमान तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले सालों में यह और भी ज्यादा तेजी से बढ़ेगा ऐसा साफ-साफ दिख रहा है। एक अनुमान के मुताबिक अगले चार साल में न्यूनतम तापमान 1 से 1.026 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। हालांकि कुछ निष्कर्ष तो ये भी इशारा कर रहे हैं कि साल 2050 तक न्यूनतम तापमान में ही 2.3 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है।

सवाल है क्या दुनिया यह जान नहीं पा रही है क्या कि आखिर तापमान क्यों बढ़ रहा है? दुनिया को बहुत स्पष्ट रूप से यह पता है कि ग्लोबल वार्मिंग में यह बढ़ोत्तरी आधुनिक लाइफस्टाइल का नतीजा है। इसके विरुद्ध खूब अभियान भी चलाए जा रहे हैं, इसके बावजूद अगर ग्लोबल वार्मिंग में कोई कमी नहीं आ रही तो इसका साफ सा कारण यह है कि पिछली एक सदी से दुनिया जिस जीवनशैली की आदी हो गई है, उसे वह चाहकर भी छोड़ नहीं पा रही है। इसी के कारण बार-बार पश्चिमी विक्षोभ की स्थितियाँ बन रही हैं।

साथ ही आधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी न्यूनतम तापमान में लगातार वृद्धि के लिये जिम्मेदार हैं। कुल मिलाकर निष्कर्ष यह है कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन लगातार बढ़ तो रहा ही है साथ ही इनकी सक्रियता में भी निरन्तर इजाफा हो रहा है। इसके कारण ये गैसें अब इंफ्रारेड किरणें ज्यादा सोख रही हैं, जिसका नतीजा है न्यूनतम तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी। न्यूनतम तापमान में बढ़ोत्तरी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसका मतलब है कि तापमान बुनियादी रूप से बढ़ रहा है। यही वजह है कि इस साल गर्मियों के ज्यादा खतरनाक होने की वैज्ञानिकों को आशंका है।

देशभर के मौसम वैज्ञानिक चिन्तित हैं कि इस साल गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है। मार्च माह से जो लक्षण दिख रहे हैं उससे नहीं लगता कि वैज्ञानिक गलत साबित होंगे। वैसे तो अब तक तथ्यों के हिसाब से सबसे गर्म साल 2016 था, जो इसके पहले के 115 सालों में सबसे गर्म था, लेकिन अब वैज्ञानिकों को आशंका है कि साल 2017, साल 2016 को भी पीछे छोड़ देगा। मौसम विभाग के मुताबिक इस साल गर्मी का पारा 49 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है।

यह नई शुरुआत होगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक बीपी यादव ने 27 फरवरी 2017 को मीडिया से कहा था कि इस साल अप्रैल में गर्मी रिकॉर्ड तोड़ देगी और यह रिकॉर्ड मार्च के अन्त में ही बुरी तरह से टूट गया है। जिस तरह उत्तर और मध्य भारत के तमाम हिस्सों में अभी से ही पारा 40 डिग्री से ऊपर रिकॉर्ड किया जा रहा है वह वाकई डराता है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक इस साल देश की राजधानी दिल्ली देश में सबसे ज्यादा गर्म रहेगी।

मौसम विभाग का अनुमान इसलिये भी सच होता लग रहा है, क्योंकि अभी तो अप्रैल आया भी नहीं और छत्तीसगढ़ में पारा 42 डिग्री के पार पहुँच गया है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून के पहले महीनों में उत्तर-पश्चिमी भारत और पूर्वी-मध्य भारत से सटे हिस्सों का तापमान औसतन से 1 डिग्री तक ज्यादा रह सकता है, लेकिन देश के दूसरे हिस्सों में यह असमान्यता 5 डिग्री तक भी जा सकती है। वास्तव में अनुमान का यह पहलू ज्यादा डरावना है। मौसम विभाग के मुताबिक इस साल मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में अप्रैल से ही लू के थपेड़े लोगों को परेशान करने लग जाएँगे और मार्च के अन्त में ही महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लू जैसी गर्म हवा चलने लगी है।

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