छह माह बाद भी कब्जामुक्त नहीं हो सका तालाब

Submitted by RuralWater on Tue, 04/23/2019 - 15:25
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सिधौली, सीतापुर, हिन्दुस्तान। 23 अप्रैल 2019

तहसील प्रशासन की अनदेखी के चलते भू माफियाओं द्वारा तालाबों पर अवैध कब्जे की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताजे मामले में बीते वर्ष अक्तूबर माह में तहसील की कोर्ट ने वरासत की गई तालाब की भूमि को तालाब में दर्ज कर भूमि को कब्जेदारों से मुक्त कराने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद भी कब्जेदारों द्वारा फसल बोने व काटने का सिलसिला जारी है। सोमवार को गांव के लोगों ने एसडीएम से मिलकर फसल रोकवाए जाने का प्रार्थना पत्र दिया है।.

एसडीएम को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र के मुताबिक कस्बे से सटे झखरावां गांव की जमीन गाटा संख्या 137 व रकबा 0,986 हेक्टेयर है जो राजस्व अभिलेखों में तालाब दर्ज है। बताते हैं कि हल्का लेखपाल द्वारा उक्त तालाब की भूमि की वरासत कुछ लोगों को कर दी गई। .

मामले में एक पक्ष द्वारा तहसील में वाद दायर कर तालाब की भूमि को कब्जे से मुक्त कराने की बात कही गई। मामले में अक्तूबर 2018 को उक्त भूमि तालाब में दर्ज कर दी गई और तालाब की भूमि को कब्जे से मुक्त कराने के लिए राजस्व टीम को निर्देश दिए गए किन्तु उक्त जमीन कब्जेदारों से मुक्त नही हो पाई है। .

इसी प्रकरण को लेकर आठ अप्रैल को बीडीसी सदस्य ने एसडीएम को प्रार्थना पत्र देते हुए तालाब की भूमि को कब्जे से मुक्त कराने की मांग की थी किन्तु तहसील प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सोमवार को कब्जेदार तालाब में लगी फसल को काटने लगे तो लोगों ने शिकायत सिधौली उपजिलाधिकारी से की है।.

एसडीएम से तहसीलदार, तहसीलदार से नायब तहसीलदार फिर राजस्व निरीक्षक और राजस्व निरीक्षक से मामला फिर लेखपाल के पास पहुंच गया। मामले का अहम पहलू यह भी है कि यदि राजस्व टीम द्वारा पहले ही प्रभावी कार्रवाई होती तो तालाब की भूमि कब की मुक्त हो चुकी होती।.