जम्मू की तवी नदी होगी प्रदूषण मुक्त

Submitted by RuralWater on Mon, 02/06/2017 - 11:49
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एक लम्बे समय से तवी नदी दूषित की जा रही है कि इसमें असंख्य गन्दे नाले गिर रहे हैं। पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग आँखें मूँद कर सोया हुआ है। इस गन्दगी के जमाव के कारण कई बार तवी नदी में पानी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है और तवी के किनारों पर बसे कई गाँव जलमग्न भी हुए, कई घर तबाह हुए, कई पुलों व सड़कों को नदी लील गई। तवी में हर वर्ष आने वाली बाढ़ व उसमें पड़ी गन्दगी विभाग की लापरवाही का ही परिणाम है। कई घरों के गन्दे पानी के नाले इस नदी में गिर रहे हैं और विभाग को इसकी पूरी जानकारी भी है। देश की दूसरी नदियों की तरह जम्मू की तवी नदी भी भयानक प्रदूषण की शिकार हो रही है। इसे देखते हुए सरकार अब एक्शन के मूड में आई है।

तवी नदी जम्मू शहर का एक प्रमुख आकर्षण का केन्द्र है। पिछले कई वर्षों से यह नदी प्रदूषण का शिकार होने के साथ-साथ अतिक्रमण का शिकार भी हुई है। इस नदी का महत्त्व राज्यवासियों के लिये गंगा नदी से कम नहीं हैं किन्तु इसमें गिर रही गन्दगी, अतिक्रमण व अनदेखी के चलते यह नदी अपना स्वरूप व महत्त्व खोती जा रही है।

शहर के गन्दे नाले इस नदी में आकर गिरते हैं, जो शहर की पवित्रता को दूषित करते हैं। इसके साथ ही नदी की भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है, जो अब बढ़ता ही जा रहा है। एक सोची-समझी साजिश के तहत एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा इसके किनारों पर कब्जा किया गया है। लोगों का मानना है कि जैसे उत्तराखण्ड में गंगा नदी ने क्रोध का तांडव किया था, वैसा ही जम्मू में तवी नदी कर सकती है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के पास तवी नदी के लिये कोई ठोस प्लान नहीं है।

इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि तवी के संरक्षण को लेकर विभाग के पास कोई योजना न पहले थी न आज है। तवी में कुछ स्थानों पर विभाग प्रदूषण की जाँच करता है और अगर उस जाँच में तवी में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, तो इसे लेकर निगम व अन्य सम्बन्धित विभागों को सूचित कर दिया जाता है ताकि वे इसके लिये आवश्यक कार्रवाई कर सकें।

तवी नदी के बिगड़ते स्वरूप, गन्दगी व कब्जों को लेकर लोग पिछले 3 सालों से तवी नदी आन्दोलन चला रहे हैं। आन्दोलन के संयोजक अधिवक्ता चन्द्र मोहन शर्मा व सह संयोजक सुभाष गुप्ता का कहना है कि तवी नदी धीरे-धीरे एक गन्दे नाले के रूप में परिवर्तित होती जा रही हैं। हजारों कनाल भूमि पर कब्जे हो चुके हैं जो आने वाले समय में एक समस्या पैदा कर सकते हैं।

तवी नदी आन्दोलन 2014 में शुरू किया गया है जिसके माध्यम से लोगों को तवी नदी के प्रति जागरुक किया जा रहा है। झाँकियाँ, कार रैलियों व मन्दिरों में जा-जाकर लोगों को इसके प्रति सचेत किया जा रहा है कि किस तरह से जम्मू की लाइफलाइन तवी तबाही के कगार पर पहुँच चुकी है।

तवी आन्दोलन से जुड़े कविन्द्र गुप्ता ने बताया कि तवी नदी के प्रति एक बार फिर से लोगों की आस्था जगाने के लिये हम लोग हर रविवार शाम आरती का आयोजन करते हैं। इससे लागों की धीरे-धीरे श्रद्धा बढ़नी शुरू हो गई है। इसके साथ सत्तापक्ष व विपक्ष के नेताओं को भी इस आरती में शामिल होने के लिये समय-समय पर बुलाया जा रहा है। उन्हें तवी की दशा सुधारने के लिये आगे आने को कहा जा रहा है। यह आन्दोलन तवी नदी के शुद्ध होने तक जारी रहेगा।

गंगा नदी को लेकर एक भजन अक्सर सुनने में आता है कि 'मानों तो ये गंगा मईया, न मानों तो बहता पानी।' इस भजन में जो गहराई है अगर उसे समझा जाये, तो गंगा नदी के धार्मिक महत्त्व को समझा जा सकता है। गंगा की तरह ही पवित्र मानी जाने वाली जम्मू शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाली तवी नदी पर भी यह भजन बिल्कुल सही बैठता है।

एक लम्बे समय से तवी नदी दूषित की जा रही है कि इसमें असंख्य गन्दे नाले गिर रहे हैं। पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग आँखें मूँद कर सोया हुआ है। इस गन्दगी के जमाव के कारण कई बार तवी नदी में पानी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है और तवी के किनारों पर बसे कई गाँव जलमग्न भी हुए, कई घर तबाह हुए, कई पुलों व सड़कों को नदी लील गई। तवी में हर वर्ष आने वाली बाढ़ व उसमें पड़ी गन्दगी विभाग की लापरवाही का ही परिणाम है। कई घरों के गन्दे पानी के नाले इस नदी में गिर रहे हैं और विभाग को इसकी पूरी जानकारी भी है।

राज्य की गठबन्धन सरकार में उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह का कहना है कि तवी नदी का विकास साबरमती की तर्ज पर किया जा रहा है। तवी रिवर फ्रंट के विकास हेतु साबरमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के साथ एमओयू साइन किया गया है। सावरमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से तैयार डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी आ गई है।

बहुत जल्द इस पर आगे का काम शुरू होगा। इस योजना के तहत 11 हजार करोड़ रुपए खर्च किये जाएँगे। रही बात तवी नदी में गिरने वाले गन्दे नालों की, तो अमृत योजना के तहत इसमें ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएँगे। नालों की दिशा भी बदली जा सकती है। ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से उनकी गन्दगी को साफ किया जाएगा। तवी नदी पर अतिक्रमण व कब्जों के मामले में उच्च न्यायालय में याचिका के तहत मामला चल रहा है।

न्यायालय द्वारा इस सम्बन्ध में एक कमेटी गठित कर तवी नदी पर हुए कब्जों की जाँच करवाई जा रही है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और उम्मीद है कि बहुत जल्द इस सम्बन्ध में भी अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे।

तवी नदी के दोनों किनारों पर बसे डुग्गर प्रदेश जम्मू को मन्दिरों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। इसी डुग्गर प्रदेश से ही जम्मू-कश्मीर की पहचान है क्योंकि जम्मू के डोगरों का ही जम्मू-कश्मीर पर राज रहा है। जम्मू के डोगरों का इतिहास बताता है कि जम्मू-कश्मीर मुस्लिम बहुल होने के बावजूद डोगरों की शूरवीरता, साहस व न्यायप्रियता के कारण डुग्गर राजाओं का काफी लम्बा राज रहा है।

महाराजा रणजीत सिंह के समय से ही इस राज्य में डुग्गर योद्धाओं ने अपनी वीरता का इतिहास लिखा। इस राज्य का विस्तार कारगिल, लेह-लद्दाख, तिब्बत तक फैला दिया। किन्तु इस प्रदेश के राजाओं की जन्मस्थली व निवास स्थान जम्मू ही रहा जो तवी के दोनों किनारों पर बसा है। महाराजाओं के महल भी इसी नदी के दोनों किनारों पर बने हैं।

यह नदी जम्मू की आत्मा रही है। जम्मू शहर इसके जल पर हमेशा से निर्भर रहा है। बाहुलोचन ने तवी नदी के तट पर बाहुकिला बनवाया था और जम्मू लोचन ने जाम्बू पुरा नगर बसाया जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है।

जम्मू शहर से 32 किलोमीटर दूर अखनूर में पुरातात्विक खुदाई के बाद इस नगर के हड़प्पा सभ्यता के एक भाग होने के साक्ष्य भी मिले हैं। जम्मू में मौर्य, कुशाण, कुशानशाह और गुप्त वंश काल के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। जम्मू का उल्लेख तैमूर के विजय अभियानों के अभिलेखों में भी मिलता है।

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.पत्रकारिता को बदलाव का माध्यम मानने वाले प्रदीप सिंह एक दशक से दिल्ली में रहकर पत्रकारिता और लेखन से जुड़े हैं। दिल्ली से प्रकाशित होने वाले कई अखबारों और पत्रिकाओं से जुड़कर काम किया।

वर्तमान में यथावत पाक्षिक पत्रिका में बतौर प्रमुख संवाददाता कार्यरत हैं। प्रदीप सिंह का जन्म 13 जुलाई 1976 को प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ। प्राथमिक से लेकर बारहवीं तक की शिक्षा प्रतापगढ़ में हुई।

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