पहाड़ में जंगलों की बेकाबू आग की लपटें बस्तियों तक पहुंचीं

Submitted by UrbanWater on Mon, 05/13/2019 - 12:11
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अमर उजाला, 11 मई 2019 देहरादून

रुद्रप्रयाग/श्रीनगर

वन संपदा हो रही राख : जंगली जानवर भी खतरे में

तापमान बढ़ने के साथ ही जंगलों की आग भी बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को रुद्रप्रयाग जिले में जंगल की आग तल्ला नागपुर स्थित मदोला गांव के प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल तक पहुंच गई। हालांकि ग्रामीणों, शिक्षकों और फायर ब्रिगेड की संयुक्त कोशिश से एक घंटे बाद आग पर काबू पा लिया गया। उधर, श्रीनगर में खोला-क्वीसू के जंगलों की आग बस्ती के पास गढ़वाल विवि के हेप्रेक और कृषि विभाग के मृदा परीक्षण प्रयोगशाला तक पहुंच गई।

रुद्रप्रयाग जिले में शुक्रवार सुबह सात बजे मदोला व कोटी गांव के बच्चे प्राथमिक विद्यालय पहुंचे तो देखा कि जंगल की आग स्कूल के मैदान तक पहुंच चुकी है। ग्राम प्रधान वीरेंद्र सिंह नेगी द्वारा फायर ब्रिगेड को सूचना दे दी गईं। फिर ग्रामीणों, शिक्षकों और फायर ब्रिगेड की संयुक्त कोशिश से करीब एक घंटे में आग पर काबू पा लिया गया। ग्राम प्रधान ने बताया कि आग की घटना अगर रात को होती तो बड़ा नुकसान हो सकता था। जखोली ब्लॉक के रतनपुर, मेदनपुर सहित घेंघड़खाल के जंगल तीसरे दिन भी धधकते रहे।

यहां कई हेक्टेयर वन क्षेत्र में वन संपदा जलकर राख हो गई है। दूसरी तरफ जिला मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक आवास के ऊपरी तरफ का जंगल रातभर जलता रहा। बच्छणस्यूं के खांकरा, नौगांव आदि क्षेत्र के जंगलों में भी आग लगी हुई है। उधर नरेंद्रगर वन प्रभाग (टिहरी) के माणिकनाथ रेंज और सिविल सोयम वन प्रभाग पौड़ी के श्रीनगर रेंज के जंगलों की आग बेकाबू हो गई है। आग से अलकनंदा घाटी के दोनों ओर काफी बड़े क्षेत्रफल में वन संपदा राख हो गई है। हरी भरी पहाड़ियां काली पड़ गई हैं। शुक्रवार को श्रीनगर के ऊपर खोला-क्वीसू के जंगलों की आग गढ़वाल विवि के हेप्रेक और कृषि विभाग की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला और डाक बंग्ला मोहल्ला तक पहुंच गई। देर शाम तक यही आग सुमाड़ी, सरणा, रतूड़ा, श्रीकोट, घसिया महादेव, डांग और रहकंडी तक पहुंच चुकी थी। उधर, कीर्तिनगर में सिंद्री क्षेत्र में जंगल की आग लगातार फैलती जा रही है। वन विभाग आग बुझाने में
नाकाम साबित हुआ है।

कुमाऊं में भी भीषण आग से हो रहा नुकसान

हल्द्वानी

जंगलों की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। कुमाऊं के अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और जिले के सैकड़ों हेक्टेयर में फैले जंगल कई दिन से धधक रहे हैं। इससे पेड़-पौधों को तो नुकसान हो रहा है, साथ ही वन्य जीव भी मर रहे हैं। जंगल की बेकाबू हुई आग पर काबू पाने की वन विभाग की तमाम कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। शुक्रवार को कुमाऊं में आग लगने की 45 घटनाओं में 90 हेक्टेयर जंगल जल गए। इससे
पहले बृहस्पतिवार तक कुमाऊं में आग की 264 घटनाओं में 373 हेक्टेयर जंगल जल चुका था। शुक्रवार की शाम बागेश्वर वन प्रभाग के कौसानी और जौलकांडे के जंगलों में आग लग गई। उधर दशोली के जंगल में भी
आग लग गई। वन कर्मचारियों ने वहां फायर ड्रिल की और फायर लाइन की सफाई की। अल्मोड़ा के बिनसर, कोसी रेंज के चौन्सली वन पंचायत और अल्मोड़ा रेंज के सिराड़ फलसीमा, कपड़खान और नगर में सीएमओ ऑफिस के निकट जंगलों में आग की घटनाएं हुई हैं। इस दौरान करीब तीन हेक्टेयर से अधिक जंगल जल गया।

आग बुझाने में नाकाम साबित हो रहा है वन विभाग

रुद्रप्रयाग में 20.5 हेक्टेयर जंगल प्रभावित

रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के उप वन संरक्षक मयंक शेखर झा ने बताया कि सभी पांचों रेंज में स्थापित क्रू स्टेशन पर तैनात जवानों को वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी निर्देश दिए गए हैं। अभी तक प्रभागीय क्षेत्र में वनाग्नि की 16 घटनाएं हो चुकी हैं; जिसमें 20.5 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से वनों को आग से बचाने में विभाग का सहयोग करने की अपील की है।

चौथे दिन भी धधकते रहे बिरही रेंज के जंगल

पीपलकोटी। बिरही क्षेत्र में शुक्रवार को चौथे दिन भी चीड़ के जंगल जलते रहे, जिससे क्षेत्र में गहरी धुंध छा गई है। आग अब उच्च चट्टानी भाग तक पहुंच गई है। बदरीनाथ वन प्रभाग के बिरही रेंज में चीड़ के जंगल में सात मई
से भड़की आग पर अभी तक काबू नहीं पाया जा सका है। वन विभाग के कर्मचारी भी आग पर काबू पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। बदरीनाथ हाईवे से लगे जंगल के भी आग के चपेट में आने से हाईवे पर पत्थर छिटकने का भय
बना हुआ है। बदरीनाथ वन्य जीव प्रभाग के प्रभारी डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि आग को बुझाने के लिए मौके पर वन कार्मियों को भेजा गया है। जल्द ही आग बुझा ली जाएगी। 

चमोली : चार दिनों में 90 लाख की वन संपदा राख

कर्णप्रयाग। पहाड़ी क्षेत्रों में गर्मी बढ़ते ही जंगल धधकने शुरू हो गए हैं। चार दिनों से चमोली जिले के जंगलों में आग लगने से करीब 10 लाख रुपये की वन संपदा राख हो गई है, वहीं पिछले सात वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1.10 करोड़ से अधिक की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। आग से दुर्लभ प्रजाति के जानवर और पक्षियों के जीवन को खतरा बना है। चमोली जिले के एंड, डिम्मर, जेकिंडी, कालेश्वर, सिरतोली, बेरफाला, घाघू, मौणा, उमट्टा, मैठाणा, गोपथला, रैंखाल के जंगलों में वन एवं वन्य जीवों को भारी नुकसान पहुंचा है। चारों तरफ धुएं का गुबार बना है। चौबटिया क्षेत्र के हाइएस्ट पॉइंट और हैलीपैड आदि क्षेत्रों में बृहस्पतिवार को अचानक आग धधक उठी। पिथौरागढ़ के ओगला और नारायणनगर के चीड़ के जंगलों के साथ ही अस्कोट, चंपावत और टनकपुर के जंगल भी आग से धधक रहे हैं। चम्पावत में बूम रेंज की फायर टीम ने एक साधू को सड़क किनारे जंगल में आग लगाते गिरफ्तार किया है। इधर, हल्द्वानी वन प्रभाग के जौलासाल, रामगढ़ रेंज और सूर्या गांव में आग की बड़ी घटनाएं सामने आईं।

वन विभाग नहीं मान रहा जंगल

श्रीनगर। कई हेक्टेयर जंगल आग में जलने के बावजूद वन विभाग इसको अपना मानने को तैयार नहीं है। सिविल सोयम वन प्रभाग पौड़ी के डीएफओ संतराम का कहना है कि बंजर पड़े नापखेतों में आग लगी है। इन खेतों ने अब जंगल का रूप ले लिया है। उन्होंने बताया कि आग उनके जंगल की ओर न बढ़े, इसके लिए स्टाफ बढ़ा दिया गया है। पौड़ी से भी श्रीनगर टीम भेजी गई है।

चीड़ बना दुश्मन

चीड़ का पिरुल और फल आग में घी का काम कर रहा है। जहां पिरुल से आग तेजी से फैल रही है। वही अधजले पेड़ों से गिरे फल कई मीटर दूर तक आग का दायरा बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

कर्मियों के पास नहीं अग्नि सुरक्षा के इंतजाम

कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग की पांच रेंजों में वनाग्नि से निपटने के लिए 64 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। इन दिनों बढ़ते तापमान के कारण बन प्रभाग के कोटद्वार रेंज, लैंसडौन रेंज, कोटड़ी रेंज और दुगड्डा रेंज में आग सुलगनी शुरू हो गई है, लेकिन वन कर्मियों के पास अग्नि सुरक्षा के संसाधन नहीं होने के कारन उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोटद्वार रेंज में सिद्धबली के पास की पहाड़ी, दुगड्डा रेंज के अंतर्गत जमरगड्डी मल्ली, चरेख डांडा के आरक्षित जंगल से सटे सिविल क्षेत्र में, झवाणा व आमसौड़ के समीप के जंगलों में आग भड़की हुईं है। लैंसडौन रेंज के अंतर्गत द्वाराखाल क्षेत्र, जयहरीखाल और लैंसडौन रोड के किनारे जंगल में, कांडाखाल व घाड़
क्षेत्र में आग लगी हुईं है। पुरानकोट क्षेत्र के सिविल के जंगलों में आग से धुआं उठ रहा है। वहीं यमकेश्वर के जंगलों में भी वनकर्मी आग बुझाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। वनकर्मियों के पास आग बुझाने के उपकरण नहीं होने के
कारण उन्हें पत्तों की झाड़ू बनाकर आग बुझानी पड़ रही है। उनके पास न तो दस्ताने हैं, न हेलमेट हैं और न ही उपयोग होने वाले हथियार।

नई टिहरी में धधक रहे भिलंगना व बालगंगा रेंज के जंगल

जंगलों में आग का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। भिलंगना, बालगंगा, पौखाल, टिहरी और प्रतापनगर रेंज के जंगल आग से धधक रहे हैं। टिहरी जिले में नरेंद्रनगर, मसूरी, टिहरी डैम वन प्रभाग और टिहरी वन प्रभाग के अंतर्गत इस फायर सीजन में अब तक वनाग्नि की 55 घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे 67 हेक्टेयर वन भूमि क्षेत्र में आग लगने से लाखों की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। जंगल में आग लगने से काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि वन विभाग ने अलग-अलग क्षेत्रों में भारी मात्रा में कर्मचारियों की है, पर वनाग्नि शांत नहीं हो पा रही है।

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