उत्तराखंड के हर अस्पताल में एसटीपी और ईटीपी जरूरी

Submitted by RuralWater on Wed, 04/24/2019 - 12:07
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हिन्दुस्तान देहरादून, 24 अप्रैल 2019.

राज्य के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और इफुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने मंगलवार को सभी सीएमओ को इसकी जानकारी दी। 

मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में कार्यशाला के दौरान यह जानकारी दी। पीसीबी के पर्यावरण अभियंता अंकुर कंसल ने बताया कि एनजीटी के आदेशों के संदर्भ में गठित राज्य स्तरीय बायो मेडिकल कमेटी के निर्देश पर कार्यशाला हुई। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बताया गया कि सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को तीन महीने में अनिवार्य रूप से जिले में कुल कचरे का उत्पादन और उसमें से कितने का निस्तारण हो पाया इसकी जानकारी देनी है। .

बैठक के दौरान सरकारी अस्पतालों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 2002 से पंजीकरण की बाध्यता से छूट मांगी है। साथ ही अस्पतालों ने बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए पर्याप्त बजट देने और एसटीपी निर्माण के लिए बजट का अनुरोध किया है। इस दौरान बायो मेडिकल वेस्ट उठाने के खर्च को भी अस्पतालों ने बहुत अधिक बताया। बैठक के दौरान कई जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद थे। 

क्या है एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट - ईटीपी

अस्पतालों से मवाद, खून, कैमिकल्स, किसी भी सर्जरी से निकलने वाली तरल गंदगी व अन्य संक्रमित तरल पदार्थ निकलते हैं। इस लिक्विड वेस्ट को एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाकर ट्रीट किया जाता है। ट्रीटमेंट से संक्रमण नष्ट होता है। प्रदूषित वेस्ट शुद्ध होता है, जो पौधों या बगीचों में पानी देने के काम में लिया जा सकता है।