उत्तराखंड में राज्य गठन से लेकर अब तक 44554 हेक्टेयर जंगल वनाग्नि में हुए नष्ट

Submitted by RuralWater on Tue, 04/23/2019 - 16:55
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द सहारा न्यूज, देहरादून। 24 अप्रैल 2019

प्रदेश में 38 हजार वर्ग किमी से अधिक वन क्षेत्र जो कि राज्य का करीब 71 फीसद हिस्सा है। राज्य गठन से लेकर अब तक उत्तराखंड में 44554 हेक्टेयर यानी करीब 61 हजार फुटबॉल मैदानों के बराबर जंगल खाक हो चुके हैं। एक सामान्य फुटबॉल ग्राउंड का क्षेत्रफल 0.72 हेक्टेयर होता है।

सूचनाधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को सूचनाधिकार के तहत राज्य के वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 90 फीसद वनाग्नि का कारण मानवजनित होता है।शेष मामलों में बिजली गिरना, चट्टानों के गिरने से पैदा होने वाली चिंगारियां या बंदरों द्वारा पत्थर फेंके जाने से पैदा होने वाली चिंगारियों से लगने वाली आग होती है। बता दें कि प्रदेश में 38 हजार वर्ग किमी से अधिक वन क्षेत्र है जो कि राज्य का करीब 71 फीसद हिस्सा है। प्रदेश के वनों में हर साल फरवरी मध्य से जून मध्य तक आग लगती है जिसे फायर सीजन कहा जाता है। इस आग से करोड़ों का नुकसान होता है।

गौनिया का कहना कि वन विभाग जितना बता रहा है प्रदेश में वनाग्नि से जंगलों को उससे ज्यादा नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि वनाग्नि नियंतण्रपर भारी-भरकम रकम खर्च करने के बावजूद प्रदेश में हर साल हजारों हेक्टेयर वन नष्ट हो जाते हैं। सूचनाधिकार से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक वन विभाग ने अब तक बहुत कम लोगों के खिलाफ वनाग्नि के मामलो में कार्यवाही की है। बता दें कि पिछले साल मई में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वनाग्नि का स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार को निर्देश दिये थे कि वह वनाग्नि पर विस्तृत रिपोर्ट दे और यह भी बताए कि उससे किस किस्म का और क्या-क्या नुकसान हुआ और सरकार ने वनाग्नि रोकने के लिए क्या कार्यवाही की। 

वनाग्नि पर काबू के लिए कदम उठा रहा विभाग 

मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) प्रमोद कुमार सिंह वन विभाग द्वारा कुछ कार्यवाही न करने की बात को गलत बताते हैं। उनका कहना है कि वन विभाग वनाग्नि पर काबू के लिए समुचित कदम उठा रहा है। उनका कहना है कि अगर वन विभाग कुछ न कर रहा होता को वनाग्नि से होने वाला नुकसान कई गुना होता। वन विभाग ने खाइयां खोद कर संवेदनशील वनों व अन्य वनों के बीच दूरी सुनिश्चित की है। जगह जगह पानी की व्यवस्था की है और सुदूर क्षेत्रों में स्थानीय फायर वाचर भी तैनात किए हैं। वनाग्नि की सूचना एसएमएस के जरिए तुरंत पहुंचाई जाती है ताकि समय पर आग को बुझाने की कार्यवाही हो सके। वन विभाग के राज्य भर में 174 वाच टावर व 1437 स्टेशन क्रू हैं जो कि वनाग्नि पर नजर रखते हैं और उसे काबू करने में मदद करते हैं।