भूजल में आर्सेनिक प्रदूषण (Arsenic pollution in groundwater)

Submitted by RuralWater on Tue, 04/03/2018 - 18:35
Source
राष्ट्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मिशन उत्तर प्रदेश


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
(मोटीवेटर, हेल्थ वर्कर के उपयोग के लिये)

आर्सेनिकोसिसआर्सेनिकोसिस आर्सेनिक क्या है?
आर्सेनिक धातु के समान एक प्राकृतिक तत्व है। पेयजल, भोजन एवं वायु के माध्यम से मानव शरीर में एक निर्धारित मात्रा (0.05 मिग्रा./ली.) से अधिक पहुँच जाने पर यह मानव शरीर के लिये जहरीला हो जाता है।

हम कैसे कह सकते हैं/जान सकते हैं कि पेयजल में आर्सेनिक है?
दुर्भाग्यवश पेयजल में आर्सेनिक को देखा, चखा एवं सूँघा नहीं जा सकता। आर्सेनिक युक्त जल से भरा एक गिलास बिल्कुल वैसा ही दिखता है वैसा कि आर्सेनिक रहित जल से भरा गिलास। पानी में आर्सेनिक है या नहीं इसको पता करने का एक मात्र तरीका यह है कि पानी की जाँच की जाये।

आर्सेनिक प्रदूषण का स्रोत क्या है?
मुख्यतः आर्सेनिक प्रदूषण प्राकृतिक कारणों से होता है अर्थात हैण्डपम्प जिस स्ट्रैटा से पानी लेता है उसी में प्राकृतिक रूप से आर्सेनिक उपस्थित होता है। आर्सेनिक प्रदूषण मुख्यतः सक्रिय नदीय तंत्र से प्राकृतिक रूप से जुड़ा हुआ है और सामान्यतः बड़ी नदियों के बहाव क्षेत्र के मिट्टी में पाये जाते हैं।

आर्सेनिक भूजल में कैसे प्रवेश करता है?
यह भी भू-संरचना एवं भूजल की रासायनिक प्रकृति से जुड़ी हुई प्राकृतिक प्रक्रिया है।

और कहाँ-कहाँ आर्सेनिक प्रदूषण पाया गया?
भारत में अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल आर्सेनिक से सर्वाधिक प्रभावित है। बिहार, असम तथा झारखण्ड के कुछ क्षेत्रों में भी आर्सेनिक प्रदूषण की जानकारी मिली है। मूल रूप से यह वही राज्य हैं जिनसे होकर मुख्य नदियाँ गुजरती हैं। पड़ोसी देश बांग्लादेश गम्भीर रूप से आर्सेनिक से प्रभावित है। चीन, नेपाल एवं पाकिस्तान उन अन्य देशों में से हैं जिनमें आर्सेनिक प्रदूषण पाया गया है।

आर्सेनिक प्रदूषित जल के प्रयोग का शरीर पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है?
सामान्यतः आर्सेनिक विषाक्तता के प्रारम्भिक लक्षण त्वचा सम्बन्धी समस्याओं के रूप में दृष्टिगोचर होते हैं। बहुधा त्वचा के रंग में परिवर्तन, तथा गहरे या हल्के धब्बे शरीर पर दिखलाई पड़ते हैं। हथेली और तलवों की त्वचा कठोर, खुरदरी तथा कटी-फटी हो जाती है। ऐसे लक्षण ज्यादातर कई वर्षों तक लगातार आर्सेनिक प्रदूषित जल के पीने से होते हैं। यदि आर्सेनिक प्रदूषित जलग्रहण करना बन्द कर दिया जाये तो ऐसे लक्षणों का बढ़ना रुक सकता है तथा यह लक्षण खत्म भी हो सकते हैं। अधिक लम्बे समय तक आर्सेनिक प्रदूषित जल पीने से त्वचा का कैंसर तथा अन्य आन्तरिक अंगों तथा फेफड़े, आमाशय तथा गुर्दे का कैंसर हो सकता है। यह महत्त्वपूर्ण बात है कि आर्सेनिक प्रदूषण के लक्षण और चिन्ह अलग-अलग व्यक्ति, जनसमूह एवं भौगोलिक क्षेत्रों में भिन्न प्रकार के हो सकते हैं। आर्सेनिक से होने वाली बीमारियों की कोई सार्वभौमिक परिभाषा उपलब्ध नहीं है।

क्या आर्सेनिकोसिस का इलाज है?
यदि प्रभावित व्यक्ति द्वारा आर्सेनिक प्रदूषित जल का प्रयोग रोक दिया जाये तो आर्सेनिकोसिस के प्रारम्भिक लक्षण रुकने अथवा कम होने की सम्भावना की जानकारी है किन्तु एक बार आर्सेनिकोसिस से गम्भीर रूप से ग्रसित होने अर्थात यदि त्वचा अथवा आन्तरिक अंग प्रभावित हो गए हों अथवा कैंसर हो गया हो तो उसका कोई इलाज नहीं है।

क्या आर्सेनिकोसिस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है?
नहीं। आर्सेनिकोसिस आर्सेनिक प्रदूषित जल के पीने से होती है। यह छूत की बीमारी नहीं है।

आर्सेनिकोसस से बचाव के लिये हम क्या कर सकते हैं?
आर्सेनिक प्रदूषित जल का पीने हेतु प्रयोग तुरन्त बन्द कर दें। परिवारों एवं समुदाय को अपने पेयजल स्रोत अर्थात हैण्डपम्प के जल की तुरन्त यह देखने के लिये जाँच करानी चाहिए कि कहीं वह आर्सेनिक प्रदूषित तो नहीं है। यदि ऐसा हो तो व्यक्ति को तुरन्त इस स्रोत के जल को पीने हेतु प्रयोग में लाना बन्द कर देना चाहिए। ऐसे उदाहरण हैं जो बताते हैं कि यदि आर्सेनिक प्रदूषित जल का आर्सेनिकोसिस की प्रारम्भिक स्थिति में ही पीने में प्रयोग रोक दिया जाये तो आर्सेनिकोसिस खत्म हो सकती है। ऐसे भी उदाहरण हैं जो बताते हैं कि पौष्टिक एवं प्रोटीन युक्त आहार का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को आर्सेनिकोसिस होने की सम्भावना कम रहती है।

क्या आर्सेनिक प्रदूषित जल का प्रयोग हाथ धोने एवं नहाने हेतु भी हानिकारक है?
“नहीं” त्वचा के माध्यम से आर्सेनिक अवशोषण अत्यन्त कम होता है अर्थात आर्सेनिक प्रदूषित जल से हाथ धोने, नहाने तथा कपड़े धोने से आर्सेनिक प्रभावित होने की सम्भावना लगभग नगण्य है।

 

 

नया हैण्डपम्प गड़वाने के समय पानी की आर्सेनिक जाँच अवश्य करवा लें। आर्सेनिक जाँच एवं अन्य सम्बन्धित जानकारी के लिये अपने जिले के जिला विकास अधिकारी, अधिशासी अभियन्ता, सहायक अभियन्ता, अवर अभियन्ता एवं रसायनज्ञ उ.प्र. जल निगम तथा जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन में कार्यरत सलाहकारों से सम्पर्क करें!

क्या यह आर्सेनिकोसिस के लक्षण है? (यदि कोई अपने त्वचा या अन्य लक्षणों को दिखाकर पूछें)
यदि ऐसी शंका हो:- मैं कोई डॉक्टर नहीं हूँ। कृपया अपने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर जाइए और डॉक्टर को बताइए कि आपके हैण्डपम्प की जाँच की गई थी और इसके पानी में आर्सेनिक की मात्रा 0.05 मिग्रा./ली. से अधिक पाई गई थी। आपको शंका है कि आपमें आर्सेनिकोसिस के लक्षण हो सकते हैं तथा आप इसकी जाँच कराना चाहते हैं।

उ.प्र. के कौन-कौन से क्षेत्र आर्सेनिक से प्रभावित हैं?
गंगा नदी के किनारों पर कराए जा रहे जल नमूनों के प्रारम्भिक जाँच से यह पता चलता है कि कुछ बस्तियों के कुछ हैण्डपम्पों के जल में आर्सेनिक की मात्रा अनुमान्य से ज्यादा है। यह जिले लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोरखपुर, गाजीपुर, चंदौली, बलिया और बरेली हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सरकार द्वारा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है।

सरकार और अन्य संगठन इसके शमन के लिये क्या कार्य कर रहे हैं?
पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा अनुमान्य से ज्यादा होने पर इसका प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है! इसके लिये उ.प्र. जल निगम, यूनिसेफ एवं अन्य संगठनों ने इसके शमन के लिये जन समुदायों में जागरुकता के लिये निम्न अभियान प्रारम्भ किये गए हैंः

1. लोगों को आर्सेनिक युक्त जल से होने वाले कुप्रभावों से जागरूक एवं शिक्षित करना।
2. सभी आर्सेनिक ग्रसित क्षेत्रों के हैण्डपम्पों एवं अन्य पेयजल जलस्रोतों की जाँच करना।
3. सुरक्षित पेयजल के विकल्प उपलब्ध कराना।
4. स्वास्थ्य कर्मचारियों एवं चिकित्सकों को आर्सेनिक शमन के लिये प्रशिक्षण देना एवं चिकित्सालय की स्थापना करना।
5. उ.प्र. सरकार द्वारा जनसमुदाय को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिये आर्सेनिक मुक्त हैण्डपम्प, पाइप जल आपूर्ति एवं आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में हैण्डपम्पों में आर्सेनिक रिमूवल यूनिट अधिष्ठापित किया जा रहा है।

 

 

 

 

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