जहरीली हवा का असर, घटी गंगा किनारे रहने वालों की उम्र

Submitted by HindiWater on Fri, 11/01/2019 - 10:47
Source
दैनिक जागरण, 01 नवंबर 2019

 जहरीली हवा का असर, घटी गंगा किनारे रहने वालों की उम्र।जहरीली हवा का असर, घटी गंगा किनारे रहने वालों की उम्र। फोटो - नवोदय टाइम्स

वायु प्रदूषण (air pollution) यानी जहरीली हवा (poisonous air) अब लोगों के जीवन पर भारी पड़ रही है। एक अध्ययन ने बताया है कि उत्तर भारत में जहरीली हवा (poisonous air) के कारण गंगा के मैदानी इलाकों में रहने वाले भारतीयों की आयु सात साल तक कम हो गई है। 1998-2016 के बीच हुए शोध में कहा गया है कि उत्तर भारत में प्रदूषण (pollution) बाकी भारत के मुकाबले तीन गुना अधिक जानलेवा है। इस अध्ययन में सबसे अधिक प्रदूषित दिल्ली को बताया गया है। यहां 2016 के दौरान पीएम 2.5 का स्तर 114 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रहा।

उत्तर भारत में 48 करोड़ से अधिक आबादी या कहें कि देश की 40 फीसद जनसंख्या गंगा नदी के किनारे रहती है। अत्यधिक दूषित हवा (polluted air) वाले यह राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ हैं। द एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट एंड यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की रिपोर्ट के अनुसार, एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (air quality life index) के मुताबिक 2016 आते-आते क्षेत्र में वायु प्रदूषण (air pollution) 72 फीसद तक बढ़ गया। इसके चलते उत्तर भारत में रहने वालों का जीवन 3.4 साल था, जो अब 7.1 साल तक कम होने लगा है। शोध में कहा गया है कि गंगा के मैदानी इलाकों में रहने वालों की आयु भारत के अन्य इलाकों में रहने वालों की आयु की अपेक्षा तीन गुना कम हो रही है।

एक्यूएलआइ के अनुसार, भारत अगर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के लक्ष्यों को हासिल कर लेता है और मौजूदा प्रदूषण में 25 फीसद की कटौती कर लेता है तो वायु गुणवत्ता (air quality) में इस कदर सुधार होगा कि भारतीयों का औसत जीवन 1.3 साल बढ़ जाएगा। मैदानी इलाकों के लोगों की आयु दो साल बढ़ जाएगी। हिंदी बेल्ट के एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (air quality life index) के एक कार्यक्रम में असम के सांसद गौरव गोगोई ने कहा, वह इस विषय में एक प्राइवेट मेंबर बिल संसद में पेश करेंगे। वायु प्रदूषण (air pollution) से निपटने के लिए उनका नया स्वच्छ वायु (संशोधन) अधिनियम उनकी सर्वोच्च वरीयता होगा। इसी कार्यक्रम में दिल्ली के अस्पताल गंगाराम के लंग्स स्पेशलिस्ट डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि दिल्ली में जनस्वास्थ्य की आपात स्थिति है। अब समय आ गया है कि प्रदूषण (pollution)  को रोकने के लिए कार्रवाई की जाए। 1998 से 2016 के बीच सात राज्यों में सात साल कम हुई भारतीयों की आयु, उत्तर भारत में प्रदूषण बाकी देश के मुकाबले तीन गुना अधिक जानलेवा,सर्वाधिक प्रभावित हरियाणा, उप्र, दिल्ली, पंजाब समेत सात राज्यों में रहती है देश की 40 फीसद आबादी

मास्क पहनकर अभ्यास

दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण से हालात कितने खराब हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गुरुवार को टी-20 सीरीज खेलने के लिए आई बांग्लादेश टीम के बल्लेबाज लिटन दास ने अरुण जेटली स्टेडियम में मास्क पहनकर अभ्यास किया। ध्यान रहे 2017 में टेस्ट मैच के दौरान भी कुछ ऐसे ही हालत थे उस समय श्रीलंकाई क्रिकेटरों ने मास्क पहनकर मैच खेला था। वायु प्रदूषण बेहद खराब स्थिति में पहुंचने की वजह से 20 मिनट तक खेल रोकना पड़ा था। 

 

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