मुरझा क्यों रहे हैं शहर

Submitted by HindiWater on Mon, 08/05/2019 - 13:22
Source
विज्ञान प्रगति, जून 2019

मुरझा क्यों रहे हैं शहर।मुरझा क्यों रहे हैं शहर।

अगर यह पूछा जाए कि आखिर शहरों पर ऐसा कौन-सा कहर टूटा है, जो वे रौनक पैदा करने वाले तमाम इंतजामों के बावजूद मुरझाए-से दिखते हैं, तो इसका एक जवाब है प्रदूषण। दुनिया के ज्यादातर शहरों की तरह भारत के शहरों में भी कई कारणों से हर तरह का प्रदूषण भयानक स्तर पर पहुँच गया है। इसमें भी ज्यादा समस्या इस बात की है कि प्रदूषण को लेकर विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा आगाह किए जाने के बावजूद हमारे देश में इस क्षेत्र में सुधार की गति बेहद धीमी है। इस बारे में वर्ष 2019 में ग्रीनपीस और आईक्यूएयर एयर विजुअल के नए अध्ययन सामने आए हैं, जिनके मुताबिक दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित 10 शहरों में से 7 भारत में हैं। इनमें से पाँच शहर तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में ही मौजूद हैं। वर्ष 2018 के दौरान प्रदूषण स्तर के मामले में गुड़गाँव पूरी दुनिया में शीर्ष पर पाया गया था। हालांकि साल 2017 की तुलना में उसका स्कोर कुछ बेहतर हुआ।

इसी तरह लिस्ट में दिल्ली 11वें नम्बर पर जरूर है लेकिन इसे संसार की सबसे प्रदूषित राजधानी बताया गया है। इस स्टडी में प्रदूषण मापने के लिए पीएम 2.5 यानी ढाई माइक्रॉन (1 माइक्रॉन = 1 मिलीमीटर का सौवां हिस्सा) के आकार वाले कण को आधार बनाया गया। वर्ष 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी की थी, जिनमें 14 भारत के थे। वैसे तो इधर कुछ वर्षों से पर्यावरण के मुद्दे पर जोर शोर से काम होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण रोकने के उपायों पर ठोस काम नहीं हो रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रदूषण कम करने के लिए पड़ोसी देश चीन ने प्रतिबद्धता दिखाते हुए कारगर उपाय लागू किए हैं, जबकि लम्बे समय तक वह भी प्रदूषण से काफी ज्यादा परेशान रहा है। यदि भारत के नागरिक चाहेंगे तो यहाँ भी ऐसा ही किया जा सकता है।
 
कुछ आँकड़े

  • वर्ष 2015 में दिल्ली में प्रदूषण से 8 लाख लोगों की मौत हुई।
  • 74 हजार मौते वाहनों के प्रदूषण से हुई।
  • 2010 में गाड़ियों के धुँए से 3,61,000 प्री-मेच्योर मौते हुईं जबकि 2015 में यह संख्या बढ़कर 3,85,000 हो गई।
  • इनमें से करीब 80 फीसदी मौतें -20 देशों में हुई हैं, जबकि 70 प्रतिशत मौते गाड़ियों के सबसे बड़े मार्केट चीन, भारत, यूरोपियन यूनियन और ब्रिटेन में हुई है।

 
क्या कहती है रैकिंग

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्ट की रिपोर्ट में दुनिया के कई शहरों को भी वाहनों से होने वाले प्रदूषण की रैकिंग दी गई है। यह रैंकिंग 2015 के आधार पर दी गई। इसमें भारत की राजधानी दिल्ली को छठे पायदान पर रखा गया है। जबकि पहले नम्बर पर चीन के गुआंगझो, दूसरे नम्बर पर टोक्यो, तीसरे नम्बर शंघाई, चैथे पर मैक्सिको, पाँचवें पर काहिरा (मिस्र), छठे पायदान पर नई दिल्ली, सातवें पर मास्को, आठवें पर बीजिंग, नौवें पर लंदन और दसवें पर लॉस एंजेल्स को रखा गया है।

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