आधुनिक विकास की खुशियों पर भारी पड़ेगी अमेजन के जंगल की आग

Submitted by HindiWater on Fri, 09/27/2019 - 16:00

आधुनिक विकास की खुशियों पर भारी पड़ेगी अमेजन के जंगल की आग। फोटो स्त्रोत-फाउंडेशन फॉर इकनोमिक एजुकेशनआधुनिक विकास की खुशियों पर भारी पड़ेगी अमेजन के जंगल की आग। फोटो स्त्रोत-फाउंडेशन फॉर इकनोमिक एजुकेशन

करीब 55 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले और पृथ्वी का फेंफड़ा कहा जाने वाला अमेजन का जंगल एक माह से धूं-धूं कर जल रहा है। आग इतनी भयानक है कि इसका असर दक्षिण अमेरिका के नौ देशों पर पड़ रहा है। वातावरण में छाया धुंए का गुबार लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। वनस्पतियां नष्ट हो रही हैं। वन्यजीवों का जीवन संकटग्रस्त है। हजारों वर्ग किलोमीटर में लाखों पेड़ जलकर राख हो गए हैं। अमेजन की आग से अटलांटिक तट भी प्रभावित है और धुंआ यहां करीब 2800 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को घेर रहा है। जिससे दुनियाभर के पर्यावरणविद और पारिस्थितिकी विशेषज्ञ चिंतित हैं। चिंतित होना लाज़मी भी है, क्योंकि अमेजन वर्षावनों पर पृथ्वी का पारिस्थितिक तंत्र टिका है, जिसके तबाह होने पर उसकी भरपाई शायद संभव नहीं। लेकिन हम अमेजन की आग को केवल प्राकृतिक घटना नहीं कह सकते क्योंकि सदी की इस भयावह आग का कारण मानवीय गतिविधियां हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर नजरअंदाज करना न्यायोचित नहीं होगा।

क्या है अमेजन के जंगल

भारत का क्षेत्रफल करीब 32 लाख 78 हजार वर्ग किलोमीटर है, लेकिन अमेजन के जंगल 55 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले हैं, जो कि भारत के क्षेत्रफल से डेढ़ गुना ज्यादा बड़ा है। इसके अलावा यह दुनिया का सबसे बड़ा जंगल और वर्षावन है, जहां लगभग सोलह हजार से ज्यादा पेड़-पौधों की प्रजातियां हैं और करीब 39 लाख हजार करोड़ पेड़ हैं। पृथ्वी पर मौजूद ऑक्सीजन का 20 प्रतिशत अकेले अमेजन के जंगल पैदा करते हैं। यहां मैकॉव, टौंसन, फ्लाईकैचर, कैप्यार्बस, टेपर्स, स्लॉथ्स, गिलहरी, बंदर, लाल हावर्ड बंदर, जगुआर, काइमैन, एनाकोंडा, टारेंटुलस, पत्ती.कटर चींटियां, स्कारलेट चींटियां, ब्लैक स्किमर्स, शेर, बाघ, हाथी, जिराफ, गैंडा सहित वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। इन जंगलों से बहने वाली ‘‘अमेजन नदी’’ दुनिया की दूसरी सबसे लंबी नदी है। 

नौ देश प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित

अमेजन का जंगल दक्षिण अमेरिका के नौ देशों ब्राजील, बोलिविया, कोलंबिया, इक्वाडोर, गिनी, पेरू, फ्रेंच गिनी, सूरनाम और वेनेजुएला में फैला हुआ है। जिसमें से अमेजन का 60 प्रतिश वन क्षेत्र ब्राजील में है, जबकि 12 प्रतिशत पेरू, 8 प्रतिशत कोलंबिया, 7 प्रतिशत बोलिविया, 5 प्रतिशत वेनेजुएला, 3 प्रतिश्त गयाना, सूरीनाम और इक्वाडोर दो-दो प्रतिशत और फ्रेंच गयाना में अमेजन के जंगल का एक प्रतिशत क्षेत्र है। जंगल में आग लगने से ये सभी देश प्रभावित हैं। असंख्यक जीव-जंतुओं की मौत हो चुकी है। आग के कारण तपिश बढ़ रही है। धुंए के कारण जीवन अस्त-व्यस्त है और दमघोंटू माहौल में लोगों को सांस लेने में समस्या हो रही है। इन देशों की हवाई यात्राएं भी प्रभावित हुई हैं और ब्राजील में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। यदि आंकड़ों पर नजर डाले तो रोराइमा में 141 प्रतिशत, एक्रे में 138 प्रतिशत, रोंडोनिया में 115 प्रतिशत, दक्षिण में मोटो ग्रोसो में 114 प्रतिशत और अमेजोनिया में आग की घटनाओं में बींते वर्षों की अपेक्षा 81 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।  

बिगड़ जाएगा कार्बन संतुलन

कार्बन डाइऑक्साइड हानिरहित है, लेकिन इसका अधिक स्तर पर्यावरण और इंसानों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। दरअसल कार्बन डाइऑक्साइड पृथ्वी की सबसे महत्वपूर्ण गैसों में से एक है। इस गैसे के बिना धरती पर पेड़-पौधों और वनस्पतियों का जीवन संभव नहीं है, क्योंकि ये पौधें प्रकाश संश्लेषण नाम की प्रक्रिया के माध्यम से वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर कार्बोहाइड्रेट का उत्पादन करने के लिए इसका उपयोग करते है और पृथ्वी पर जीवन के लिए प्रकाश संश्लेषण बेहद जरूरी है। उसी प्रकार इंसान के शरीर में भी कार्बन मौजूद रहता है। इंसान ऑक्सीजन लेने के बाद कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा इंसानों, जीव-जंतुओं के साथ ही पर्यावरण के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकती है। इसकी मात्रा बढ़ने से सिर दर्द, बेचैनी, उनींदापन आदि समस्या खड़ी होती है, जिससे इंसान की विभिन्न बीमारियों की चपेट में आने से मृत्यु तक हो सकती है। यही अमेजन के जंगल से हो रहा है। 

दरअसल पेड़ वातावरण के कार्बन को सोखते हैं। अमेजन के जंगलों से हजारों सालों से पर्यावरण के कार्बन को सोखा है, लेकिन अब वें सभी पेड़ और वनस्पतियों जंगल की आग में जलकर राख हो रहे हैं। जिससे उनमें जमा कार्बन वार्तावरण में फैल रहा है। आकंडों की माने तो अमेजन के जंगलों से अभी तक 228 मेगाटन कार्बन डाइऑक्साइड पैदा हो चुकी है, जो कि सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसलिए वातावरण में कार्बन के संतुलन को बनाए रखने के लिए अमेजन के जंगलो को बचाना बेहद ही जरूरी है। 

चुकानी पड़ रही विकास की भारी कीमत

वर्तमान में ब्राजील की जनसंख्या 21 करोड़ से अधिक है, जो वर्ष 2010 में लगभग 19 करोड़ थी, लेकिन तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण ब्राजील में समस्या खड़ी होती जा रही है, क्योंकि ब्राजील का करीब 60 प्रतिशत क्षेत्र में अमेजन का जंगल फैला है। बढ़ती जनसंख्या के लिए आशियाना बनाने और आधुनिकता के विकास की ओर बढ़ने के कारण जंगलों को काटा जा रहा है। भोजन उपलब्ध कराने के लिए अमेजन के जंगलों में पेड़ों को काटकर खेती की जा रही है। जिससे पर्यावरण चक्र बिगड़ रहा है और विकास की भारी भरकम कीमत चुकानी पड़ रही है। 

आग के प्रभाव से भारत भी अछूता नहीं

पुरानी कहावत है कि जगल में जब आग लगती है तो केवल चूंहे ही सुरिक्षत रहते हैं, क्योंकि वे जमीन के अंदर अपना घर बनाते हैं। इसके अलावा अधिकतर जीव-जंतुओं का जीवन संकट में रहता है। ऐसा कुछ भारत में भी होगा। दरअसल अमेजन की आग का असर अभी भारत सहित देश के कई देशों पर नहीं दिख रहा है, लेकिन पृथ्वी की जलवायु पर इसका व्यापक असर पड़ेगा और ये असर कुछ सालों बाद देखने को मिलेगा, जब कार्बन उत्सर्जन होगा। तब भारत क्या, विश्व का कोई भी देश अमेजन के जंगल में लगी इस आग के असर से नहीं बच पाएगा।

दरअसल अब वक्त आ गया है कि हम सभी को पर्यावरण के प्रति सचेत व जागरुक हो जाना चाहिए, क्योंकि आधुनिकता के लिए अनियिमित विकास और हमारे लालच ने हमें एक ऐसे रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां आगे बढ़ने के कई विकल्प हैं, लेकिन अस्तित्व को बचाने का केवल एक ही विकल्प है, और वो है ‘‘पर्यावरण संरक्षण’’। लेकिन यदि हम फिर भी जंगलों को काटकर विकालकाय भवनों और स्मार्ट सिटी में आराम की जिंदगी पर अधिक जोर देंगे, तो ये आराम ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगा, क्योंकि जहरीली हवा, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग हमारे विकास और जीवन का सभी सुख छिन जाएगा। इसलिए यदि हमे खुद सहित पृथ्वी और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखना है तो पर्यावरण संरक्षण अपना कर्तव्य मानना होगा और इसका संरक्षण करना होगा। नहीं तो आज अमेजन का जंगल है, तो कल दूसरा जंगल होगा और फिर अमेजन के जंगलों की ये आग आधुनिक विकास की खुशियों पर भारी पड़ने लगेगी।
 

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