अपशिष्ट बचाएगा किसानों की सूखती फसलें

Submitted by Hindi on Thu, 10/12/2017 - 11:55
Source
राजस्थान पत्रिका, 09 अगस्त, 2017

नारायण ने बताया कि इसे बड़े स्तर पर बाजार में उतारने व स्टार्टअप के लिये सरकार की ओर से ढाई लाख रुपए दिए जाएँगे। यह आइडिया दो बार राष्ट्रीय विज्ञान मेला, पिच टू विन में चयनित हो चुका है। इसके अलावा यंग इनोवेशन अवार्ड, एजुकेशन फेस्टिवल में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षामंत्री से भी सम्मानित हो चुके हैं। साथ ही हाल ही में देश के टॉप 25 इनोवेटर्स में भी चयनित हुए हैं।

महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक सीटीएई में एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के छात्र नारायणलाल गुर्जर ने जैव अपघटीय पदार्थों से ईको फ्रेंडली वाटर रेटेंशन पॉलिमर बनाने में सफलता पाई है जो मृदा की पानी को रोके रखने की क्षमता बढ़ाने में सहायक है। इससे कृषि एवं बागवानी में कम पानी की आवश्यकता होगी और यह कम वर्षा वाले क्षेत्रों में फायदेमंद साबित होगा। साथ ही यह फसल की उत्पादकता क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है।

राजसमंद जिले के केरड़ी, बोरज गाँव निवासी किसान देवीलाल के पुत्र नारायण ने बताया कि दो साल पहले कम वर्षा के चलते उनकी फसल सूख गई थी जिससे उन्हें व आस-पास के किसानों को नुकसान पहुँचा। पानी की कमी के चलते क्षेत्र में खेती करना मुश्किल हो गया था। इस पर उसने इस स्थिति से बचने का समाधान निकालने की सोची। नारायण ने प्राकृतिक अपशिष्ट पदार्थों को रासायनिक अभिक्रिया करवाकर ईको फ्रेंडली पॉलिमर बनाया। यह प्रयोगशाला जाँच में पानी को अधिक मात्रा में ग्रहण करने की क्षमता वाला साबित हुआ। यह एक प्रकार का खाद है, जिसे मिट्टी में डालकर उसकी नमी को पाँच गुणा तक बढ़ाया जा सकता है।

बड़े स्तर पर लाएँगे प्रोडक्ट


नारायण ने बताया कि इस उत्पाद को मार्केट में उतारने के लिये बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है जिसके लिये एक टीम बनाई है। टीम में एस पूरण, शशिप्रताप, बुद्धिप्रकाश व अंकित जैन शामिल हैं। टीम स्टार्टअप ओसिस के साथ मिलकर टेस्टिंग व अन्य काम कर रही है जिसे प्रो. एसएम माथुर, प्रो. एसआर भाखर व प्रो. पुनीत दत्त गाइड कर रहे हैं। नारायण ने बताया कि अगले दो साल में प्रोडक्ट किसानों तक पहुँचाने की कोशिश रहेगी।

स्टार्टअप के लिये मिलेंगे ढाई लाख


नारायण ने बताया कि इसे बड़े स्तर पर बाजार में उतारने व स्टार्टअप के लिये सरकार की ओर से ढाई लाख रुपए दिए जाएँगे। यह आइडिया दो बार राष्ट्रीय विज्ञान मेला, पिच टू विन में चयनित हो चुका है। इसके अलावा यंग इनोवेशन अवार्ड, एजुकेशन फेस्टिवल में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षामंत्री से भी सम्मानित हो चुके हैं। साथ ही हाल ही में देश के टॉप 25 इनोवेटर्स में भी चयनित हुए हैं।

यह है इसके फायदे


1. यह पदार्थ वेस्ट चीजों से मिलकर बना है जिससे हर साल हजारों टन वेस्टेज चीजों के निस्तारण में मदद मिलेगी।
2. इससे जमीन में पानी की स्टेरोज क्षमता बढ़ती है जिससे फसल सूखती नहीं है। साथ ही उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है।
3. यह खेती में पानी की माँग को आधा कर देता है जिससे कम पानी से ज्यादा जगह सिंचाई सम्भव है।
4. यह फसल को पोषक तत्व देता है जिससे रासायनिक खाद की माँग 75 प्रतिशत घट जाती है।
5. यह मृदा की उर्वरकता को बढ़ाने में सहायक है।
6. किसानों को सस्ती दर पर मिल सकेगा

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