गढ़वाल हिमालय स्थित डोकरियानी हिमनद पर जलविज्ञानीय अध्ययन
गढ़वाल हिमालय क्षेत्र के डोकरियानी हिमनद की गलित जलधारा पर स्थापित जलविज्ञान मापन स्थल से राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान द्वारा 1992, 1994 एवं 1995 में निस्सरण, निलम्बित अवसाद, वायु तापमान तथा जल तापमान के आंकड़े एकत्र किये गये हैं। भिन्न-भिन्न महीनों में जलालब्धि का निर्धारण किया गया है। इनके विश्लेषणों से देखा गया है कि गलित जल जुलाई के महीने में अधिकतम पाया जाता है। इस क्षेत्र में प्रायः रोज वर्षा होती है। जिसका प्रभाव अपवाह तथा निलंबित अवसाद पर भी पड़ता है। वायु तापमान तथा जल तापमान दोनों ही जून के महीने में अधिकतम होते हैं और तत्पश्चात घटने लगते हैं। वायु तापमान में जल तापमान की अपेक्षा बहुत अधिक परिवर्तन होता है। हिमनद के निकट स्थित आधार-शिविर से एकत्र मिट्टी के नमूनों में नमी की मात्रा बहुत अधिक पायी गयी है, जो वाष्पन तथा वाष्पोत्सर्जन में तथा अंततः इस क्षेत्र में प्रायः होने वाली वर्षा में सहायक है।

मापन स्थल पर 1995 से संस्थान द्वारा एक स्वचालित जलस्तर मापी लगाया गया है। धारा के जलस्तर के लगातार निरीक्षण हेतु दैनिक चार्टों का प्रयोग किया गया है। दिन के समय मापन स्थल पर जलस्तर तथा निस्सरण के प्रेक्षकों द्वारा भी लिए गए। इससे जलस्तर निस्सरण वक्र स्थापित करने में सहायता मिली तथा इस वक्र का प्रयोग जलस्तर को निस्सरण में बदलने में किया गया। ये निस्सरण आंकड़े हिमनद से जलालब्धि के बारे में सही-सही सूचना देने में सहायक सिद्ध होंगे।

वर्षा, वायु तापमान, जल तापमान तथा निलंबित अवसाद के आंकड़े भी एकत्र किये गये। मौसम विज्ञानीय आंकड़े एकत्र करने हेतु एक जलमौसम विज्ञानीय वेधशाला, मापन स्थल पर स्थापित की गई। सापेक्ष आर्द्रता, पवन वेग तथा पवन दिशा आदि के आंकड़े एकत्र करने हेतु 1996 में कुछ अतिरिक्त यंत्रों को लगाने की योजना है। वर्ष 1995 में जून से मध्य सितंबर तक आंकड़े एकत्र किये गये तथा आंकड़ों के परिष्करण का काम चल रहा है। कुछ वर्षों तक आंकड़ें एकत्र करने के पश्चात एक गलित हिमजल-अपवाह अध्ययन किया जायेगा और गलित हिमजल का एक निदर्शन बनाने का प्रयास किया जायेगा।

इस रिसर्च पेपर को पूरा पढ़ने के लिए अटैचमेंट देखें



Posted by
Get the latest news on water, straight to your inbox
Subscribe Now
Continue reading