निर्मल नहीं हो सकी अविरल धारा
गंगा एक्शन प्लान का फेज वन फेल हो गया और अब फेज दो भी उसी ढर्रे पर चल रहा है। विश्व बैंक से कर्ज लेकर गंगा को मलरहित बनाने की इस कोशिश में भी गंगा आंदोलन से जुड़े लोगों को जोड़ा नहीं गया है। फेज दो में न तो कोई नई योजना है और न ही नई इच्छा शक्ति। गंगा बचाओ अभियान से जुड़े प्रमुख संत स्वामी गुड्डू बाबा कहते हैं कि इस बार भी धरातल से जुड़े लोग गंगा एक्शन प्लान में नजरअंदाज किए गए हैं। विश्व बैंक से 15 हजार करोड़ का ऋण लिया जा रहा है लेकिन देश में गंगा राहत कोष नहीं बनाया जा सका।

गंगा एक्शन प्लान के तहत फेज वन में बिहार के चार शहरों में सीवेज प्लांट योजना पर 53 करोड़ 29 लाख रुपए खर्च हुए। फेज वन में बिहार के पटना, भागलपुर, मुंगेर और छपरा में 45 योजनाएं शुरू की गईं जिनमें से 44 फाइलों में पूरी भी हो गईं । उपलब्धि 99 फीसदी दिखाई गई । सात सीवेज प्लांट मंजूर हुए थे जिनमें से 6 बने। इन ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता 371.60 मिलियन लीटर टन कचरे की निस्तारण की तय की गई थी। इनमें से 6 प्लांट बने लेकिन क्षमता घटकर 122 एमएलडी हो गई। फेज दो में बिहार के आरा, छपरा, भागलपुर, मुंगेर, पटना, फतुहा, बाढ़, सुल्तानगंज, बड़हिया, बक्सर, कहलगांव और हाजीपुर शामिल है। बिहार के लिए एक हजार करोड़ रुपए तय किए गए हैं । विश्व बैंक के अध्यक्ष राबर्ट जालिक और केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने पटना का दौरा कर सीवेज प्लांटों को मंजूरी दे दी है। गंगा बेसिन प्राधिकरण ने हाजीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और बक्सर के लिए 442 करोड़ का प्रावधान किया है।

धरातल पर गंगा किनारे छोड़ रही है। प्रदूषण बढ़ा है। गंगा के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 28 फीसदी कम हो गई है जो जल जीवों के लिए भी संकट पैदा कर रहा है। गंगा डाल्फिन संकट में हैं । सिर्फ पटना में 29 बड़े नालों से 250 एमएलडी गंदा कचरा रोज गंगा में गिरता है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता सिर्फ 105 एमएलडी की है। स्वामी गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने लावारिश शवों और पशुओं के शव गंगा में फेंके जाने पर पाबंदी लगा दी है लेकिन इस प्रावधान का पालन नहीं होता है।

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