पॉवर प्लांटों का जन विरोध
यमुनापार की उपजाऊ ज़मीन पर भू माफियाओं और पूँजीपतियों की गिद्ध नजर लगी हुई है। सरकार व पूँजीपतियों द्वारा किसानों को भूमिहीन बनाने की साजिश हो रही है। किसानों में फूट डालकर व उन्हें झूठी लालच देकर उनकी ज़मीन बड़ी आसानी से छीनी जा रही है, लेकिन अब आगे ऐसा नहीं होगा। विस्थापन विरोधी जन संघर्ष मोर्चा किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देगा। जल्द ही इस मोर्चें में करीब एक लाख किसानों, मज़दूरों को जोड़ा जाएगा। जिससे जिले में किसानों की लड़ाई को देश की राजधानी दिल्ली तक लड़ी जा सके।जिले में स्थापित हो रहे तीन दैत्याकार पॉवर प्लांटों के लिए व्यापक पैमाने पर भूमि अधिग्रहण से विस्थापित इलाहाबाद के मेजा, बारा व करछना तहसील के किसान और मज़दूर अब बड़े आन्दोलन के मूड में हैं। इस संबंध में किसानों ने सोमवार को बैठक कर ‘विस्थापन विरोधी जन संघर्ष मोर्चा’ का गठन किया। किसानों ने कहा कि आगे की लड़ाई इसी बैनर से लड़ी जाएगी। बैठक के दौरान मोर्चे की कमेटी गठित की गई। 11 सदस्यीय कमेटी में विस्थापन का दंश झेल रहे उन सभी किसानों को शामिल किया गया है, जो पिछले करीब एक साल से भूमि अधिग्रहण व मुआवज़े के सवाल पर आन्दोलन कर रहे हैं। मेजा एनटीपीसी से विस्थापित किसान मूलचंन्द्र को सचिव तथा राजकुमार यादव को कोषाध्यक्ष चुना गया। छोटे लाल सिंह, शिवसागर बिन्द, जगजीवन लाल, रमाकांत निषाद, राजु कुमार निषाद, रामअनुग्रह, लाल बहादुर, रमाकांत यादव व लालजी मुसहर को कमेटी का सदस्य चुना गया है।इस दौरान ‘विस्थापन विरोधी जन संघर्ष मोर्चा’ के संयोजक राजीव चन्देल ने कहा कि समूचे यमुना पार की उपजाऊ ज़मीन को सरकारें किसानों से सस्ते रेट पर छीनना चाहती हैं। बारा व करछना में जेपी पॉवर प्लांट, मेजा कोहड़ार में एनटीपीसी, घूरपुर से मांडा तक रेलवे का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, मेजा के बसहरा में हवाई अड्डा, महेवा में जलनिगम, करछना में एफसीआई, पॉवर प्लांटों के लिए रेलवे लाइन, पानी की पाइप लाइन सहित दर्जनों परियोजनाओं के लिए हजारों एकड़ ज़मीन कौड़ियों के भाव अधिग्रहीत की जा रही है।

यमुनापार की क्रीम व उपजाऊ ज़मीन पर भू माफियाओं और पूँजीपतियों की गिद्ध नजर लगी हुई है। सरकार व पूँजीपतियों द्वारा किसानों को भूमिहीन बनाने की साजिश हो रही है। किसानों में फूट डालकर व उन्हें झूठी लालच देकर उनकी ज़मीन बड़ी आसानी से छीनी जा रही है, लेकिन अब आगे ऐसा नहीं होगा। विस्थापन विरोधी जन संघर्ष मोर्चा किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देगा। जल्द ही इस मोर्चें में करीब एक लाख किसानों, मज़दूरों को जोड़ा जाएगा। जिससे जिले में किसानों की लड़ाई को देश की राजधानी दिल्ली तक लड़ी जा सके। चन्देल ने कहा कि अब मेजा, बारा व करछना के किसान एक जुट होकर विस्थापन के खिलाफ लड़ेंगे और मनमाने ढंग से एक इंच भूमि अधिग्रहीत नहीं होने दी जाएगी तथा पॉवर प्लांटों द्वारा गंगा, यमुना व टौंस से एक बूंद भी पानी नहीं लेने दिया जाएगा, इसके लिए मोर्चे के किसान जल्द ही जिला मुख्यालय पर धरना देंगे। मोर्चे के समर्थन में अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के जिलाध्यक्ष रामकैलाश कुशवाहा ने कमेटी संचालन के लिए टिप्स दिए और किसानों से कहा कि उन्हें एक बड़ी ज़िम्मेदारी निभानी होगी। अब अकेले-अकेले लड़ने वाले किसानों को एक बैनर में शामिल होकर नई ताकत बनानी होगी। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र व अन्याय के खिलाफ व्यक्ति नहीं संगठन लड़ता है, इसलिए विस्थापित किसानों, मज़दूरों को अब एक होना होगा तभी वह क्रूर व किसान-मज़दूर विरोधी तंत्र के खिलाफ गोलबन्दी कर लड़ाई लड़ सकते हैं।

डीएम ने भी दिया किसानों को धोखा


‘विस्थापन विरोधी जन संघर्ष मोर्चा’ के संयोजक राजीव चन्देल ने कहा कि पॉवर प्लांटों के लिए भूमि अधिग्रहण मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी ने किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। डीएम ने नियम-कानून को ताक पर रख भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 17 ए व 4 लागू कर किसानों से जबरन ज़मीन छीन ली। इस धारा के लागू होने के बाद किसानों को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया, क्योंकि नियमानुसार इस ‘धारा’ में किसानों को उनकी समस्याओं को सुनने का मौका ही नहीं मिलता है। इसी तरह से डीएम ने एनटीपीसी को करार के माध्यम से ज़मीन दी है, इसमें नियम-कानून का पालन नहीं किया गया। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी। डीएम की मनमानी से ही मेजा में कुछ अति उपजाउ जमीन को भी बंजर और पहाड़ी दिखाकर एनटीपीसी को मात्र 90 हजार प्रति बीघा में दे दिया गया। जबकि इन्हीं जमीनों का सर्किल रेट दो से ढाई लाख रुपया है। डीएम व एडीएम ने किसानों को ज़मीन के बदले नौकरी देने का भी आश्वासन दिया था, लेकिन अब कोई सुनने वाला नहीं है। आज किसान न्याय के लिए फरियाद करते हैं तो एनटीपीसी व जिले के जिम्मेदार अधिकारी दुत्कार कर भगा देते हैं। हजारों किसान अपने घर व ज़मीन से विस्थापित होकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

विस्थापन विरोधी जन संघर्ष मोर्चा के मीटिंग में किसान

मेरे परिवार को बदमाशों से बचाओ!


मेजा एनटीपीसी से विस्थापित व प्रभावित परिवारों को बदमाशों ने जीना हराम कर रखा है। सलैया कला गांव के एक पुरवे ‘पंवार का पूरा’ में रह रहे करीब आधा दर्जन परिवारों को एनटीपीसी के दबाव में स्थानीय प्रशासन लगातार नोटिस देकर धमका रहा है। उन्हें तुरन्त गांव व घर छोड़ने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इस पुरवे के किसान देवनाथ यादव के परिवार को आज तक उचित मुआवजा नहीं दिया गया है और अब उन्हें उनके घर से बेदखल करने के लिए गुन्डों बदमाशों को भेजा जा रहा है। पूरा परिवार डरा सहमा हुआ है। पिछले कई दिनों से वह लोग रात-रात भर जगकर पहरा दे रहे हैं। बदमाश उन्हें धमकाते हैं कि यह जगह अब एनटीपीसी की हो गई है, वह जो चाहेंगे सो करेंगे। डर से बहन-बेटियां बाहर नहीं निकल पा रही हैं।

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