ताप बिजलीघर के लिए किसानों के जमीन की कुर्बानी
Andolan
इलाहाबाद के यमुनापार में लगने जा रहे तीनों पॉवर प्लांटों में से हर पॉवर प्लांट रोज 15 से 25 हजार टन कोयला जलाएंगे और हजारों टन राख रोज पैदा करेंगे। एक पॉवर प्लांट के लिये प्रतिदिन करीब 12 करोड़ लीटर पानी चाहिए। राख का ये क्या करेंगे इसका कोई वैज्ञानिक तरीका आज भी इनके पास नहीं है। पॉवर प्लांट से पैदा होने वाली राख में बहुत से जहरीले रसायनिक तत्व मिले होते हैं, जो खेती व जलस्रोतों को जहरीला बनाते हैं। इलाहाबाद के यमुनापार इलाके में लगने वाले तीन थर्मल पॉवर प्लांटों के विरोध में चल रहे किसानों-मजदूरों और इलाहाबाद के नागरिकों के संघर्ष के एक अगुवा साथी राजीव चन्देल पर जिला प्रशासन ने गुंडा एक्ट लगा दिया है और उन्हें जिला बदर होने का आदेश दिया है।

पहले भी जब हम अंग्रेजों के गुलाम थे ऐसा ही होता था। सरकार आन्दोलनकारियों पर सख्त कानून लगाकर उसकी जबान बंद करने की कोशिश करती थी। आज भी ऐसा हो रहा है, अपने पानी, अपनी धरती और पर्यावरण के लिये आन्दोलन करने वाले साथियों पर सख्त कानून लागू किये जा रहे हैं। सरकार और प्रशासन दमन के द्वारा लोकतांत्रिक आवाजों को खामोश करने की कोशिश कर रही है।

राजीव चन्देल ने इलाहाबाद के यमुनापार में लग रहे तीन दैत्याकार पॉवर प्लांटों के लिये किसानों की जमीन जबरन हड़पे जाने का पर्दाफाश किया। उन्होंने हजारों मजदूरों के बेरोजगार होने के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने पॉवर प्लांट की वजह से इलाहाबाद की धरती और पानी के जहरीले हो जाने की बात सबको बताई। उन्होंने सूचना का अधिकार कानून के तहत किसानों की जमीन धोखे से हड़पे जाने से संबंधित जानकारी जुटाई और जिसके आधार पर किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

एक जुलाई 2014 को यह याचिका दायर की गई है और 7 जुलाई 2014 को फर्जी आधारों पर उन्हें गुंडा एक्ट की नोटिस जारी कर दी गई। उन्होंने यह कहा कि एक लोकतंत्र में हमारा अधिकार है कि किसी योजना के लगने से पहले ग्रामसभा और जनता की राय लेना जरूरी है। राजीव चन्देल ने भारत के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिये संघर्ष किया है। उनके शांतिपूर्ण आन्दोलन और सत्याग्रह का प्रशासन ने इस तरह से जवाब दिया है।

इलाहाबाद में लग पॉवर प्लांट का विरोध करते किसानहमने प्रशासन को लगातार खुली बहस करने की चुनौती दी है। लेकिन प्रशासन का जवाब ये है -गुंडा एक्ट। हम सब गुंडा एक्ट और तमाम असंवैधानिक कानूनों का विरोध करते हैं और सामूहिक सिविल नाफरमानी का आह्वान करते हैं। हमारा मानना है कि शांतिपूर्ण आन्दोलन करने वाले राजीव चन्देल अगर गुंडे हैं तो हम सब गुंडे हैं।

हम पॉवर प्लांटों का विरोध इसलिये कर रहे हैं?


क्योंकि पॉवर प्लांट बनाने की सारी प्रक्रिया गैर कानूनी है। हम इन पॉवर प्लांटों को गैर कानूनी मानते हैं। क्योंकि इनके लिये जबरन भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। इसमें भूमि का जो मुआवजा दिया गया है वह बेहद कम है। जमीन की लूट के लिये प्रशासन इतना उतावला था कि उसने भूमि अधिग्रहण कानून का पालन भी नहीं किया।

मेजा प्लांट के लिये भी किसानों से धोखाधड़ी से जमीन ली गई। पॉवर प्लांट के लिये वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से सिर्फ 1100 एकड़ जमीन लेने की मंजूरी मिली थी, लेकिन 3300 एकड़ पर कब्जा जमा लिया है। भूदान एवं ग्राम समाज की भी जमीन हड़प ली है, जिस पर किसान एवं मजदूर पत्थर तोड़कर अपने परिवार का गुजारा करते थे। इससे हजारों मजदूर रातों-रात बेरोजगार हो गए। भूगर्भ जल लेने की भी इन्हें इजाजत नहीं है, इसके बावजूद पॉवर प्लांट के निर्माण के लिये यह जमीन के नीचे का पानी का अधाधुंध दोहन कर रहे हैं।

क्योंकि पॉवर प्लांट पर्यावरण व खेती का विनाश करते हैं!


इलाहाबाद के यमुनापार में लगने जा रहे तीनों पॉवर प्लांटों में से हर पॉवर प्लांट रोज 15 से 25 हजार टन कोयला जलाएंगे और हजारों टन राख रोज पैदा करेंगे। एक पॉवर प्लांट के लिये प्रतिदिन करीब 12 करोड़ लीटर पानी चाहिए। राख का ये क्या करेंगे इसका कोई वैज्ञानिक तरीका आज भी इनके पास नहीं है।

राजीव चंदेलपॉवर प्लांट से पैदा होने वाली राख में बहुत से जहरीले रसायनिक तत्व मिले होते हैं, जो खेती व जलस्रोतों को जहरीला बनाते हैं। बड़े तालाब बनाकर जिसे ऐश डेक कहते हैं राख उसमें डाल दी जाती है। इसके बाद यही राख हवा में उड़कर जमीन, पेड़ों और फसलों को बर्बाद करती है। इससे इंसानों और पशुओं में दमा, कैंसर, और चर्मरोग जैसी कई बीमारियां फैल जाती हैं।

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