भागीरथी इको सेंसिटिव जोन की शर्तों में छूट

Submitted by RuralWater on Mon, 04/30/2018 - 14:05
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राष्ट्रीय सहारा, 29 अप्रैल, 2018

वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक शर्तों में बदलाव से तीखे ढलानों यानी 22 डिग्री से अधिक वाले ढलानों में भी पर्यावरण प्रभाव के अध्ययन के बाद निर्माण कार्य हो सकेंगे और सड़कें बन सकेंगी। इको सेंसिटिव जोन की शर्तों में ढील से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ऑल वेदर रोड परियोजना के निर्माण में आ रही बाधा भी खत्म होगी। इस सड़क का 94 किलोमीटर का हिस्सा भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में पड़ता है। ये संशोधन केवल सार्वजनिक व सरकारी विकास कार्यों के लिये ही किये गए हैं। इस घोषणा से इस क्षेत्र में भागीरथी नदी में चुगान, नए हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों की स्थापना, ढलानों पर निर्माण, प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना और व्यावसायिक पेड़ कटान पर पाबन्दी लग गई थी। तब से अब तक प्रदेश में जो भी सरकारें आईं, वे सभी केन्द्र सरकार से ईको सेंसिटिव जोन का नोटिफिकेशन वापस लेना या उसमें संशोधन की माँग करती रही हैं।विकास कार्यों की खातिर भागीरथी इको सेंसिटिव जोन की शर्तों में ढील देने की गुहार केन्द्र ने सुन ली है। केन्द्रीय पर्यावरण वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भागीरथी इको सेंसिटिव जोन की शर्तों में छूट दे दी है। इस जोन में अब सीमित मात्रा में इस तरह भू-उपयोग परिवर्तन किया जा सकेगा कि नागरिक सुविधाएँ और आम जनता व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये ढाँचागत विकास किया जा सके।

वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक शर्तों में बदलाव से तीखे ढलानों यानी 22 डिग्री से अधिक वाले ढलानों में भी पर्यावरण प्रभाव के अध्ययन के बाद निर्माण कार्य हो सकेंगे और सड़कें बन सकेंगी। इको सेंसिटिव जोन की शर्तों में ढील से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ऑल वेदर रोड परियोजना के निर्माण में आ रही बाधा भी खत्म होगी।

इस सड़क का 94 किलोमीटर का हिस्सा भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में पड़ता है। ये संशोधन केवल सार्वजनिक व सरकारी विकास कार्यों के लिये ही किये गए हैं। बता दें कि 2012 में पर्यावरण मंत्रालय ने गोमुख से उत्तरकाशी तक 100 किमी क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित कर दिया था। 4179 वर्ग किमी के इस क्षेत्र को गंगा के संरक्षण व पर्यावरण की संवेदनशीलता को देखते हुए इको सेंसिटिव जोन घोषित किया था, ताकि इस क्षेत्र में अनियमित विकास पर नियंत्रण किया जा सके।

इस घोषणा से इस क्षेत्र में भागीरथी नदी में चुगान, नए हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों की स्थापना, ढलानों पर निर्माण, प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना और व्यावसायिक पेड़ कटान पर पाबन्दी लग गई थी। तब से अब तक प्रदेश में जो भी सरकारें आईं, वे सभी केन्द्र सरकार से ईको सेंसिटिव जोन का नोटिफिकेशन वापस लेना या उसमें संशोधन की माँग करती रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक हाल में ही केन्द्र के साथ बैठकों में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी केन्द्र सरकार से कहा था कि नोटिफिकेशन की वजह से चारधाम ऑल वेदर रोड के निर्माण व स्थानीय समुदायों को दिक्कतें आ रही हैं। प्रदेश सरकार एवं केन्द्र सरकार को इको सेंसिटिव जोन का एक जोनल मास्टर प्लान पेश करना है जो कि चार साल से बन ही रहा है। कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए मास्टर प्लान में ऐसे विकास कार्यों की इजाजत दी गई थी जो कि इको सेंसिटिव जोन की भावना के विपरीत थे।

नतीजतन जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय के विरोध के कारण वह जोनल मास्टर प्लान खारिज हो गया। तब मंत्रालय ने कहा था कि नए हाइड्रो प्रोजेक्ट व खनन कार्य इको सेंसिटिव जोन के विनाश के कारण साबित होंगे। अभी यह नहीं पता चला है कि अब जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय की संशोधनों पर क्या राय है। अब यह मंत्रालय नितिन गडकरी के पास है जो राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री के रूप में चारधाम सड़क परियोजना को भी देख रहे हैं।

1. नोटिफिकेशन में संशोधन केवल सार्वजनिक व सरकारी विकास कार्यों के लिये ही किये गए हैं
2. 22 डिग्री से अधिक वाले ढलानों में भी पर्यावरण प्रभाव अध्ययन के बाद निर्माण कार्य हो सकेंगे
3. सीएम केन्द्र से लगा चुके थे गुहार, ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट निर्माण में आ रही बाधा अब खत्म होगी

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