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Submitted by HindiWater on Wed, 11/13/2019 - 10:47
Source: नैनीताल एक धरोहर
14वीं शताब्दी के दूसरे दशक के बाद विश्व के अनेक देशों में पारिस्थितिक तंत्र का सन्तुलन गड़बड़ा गया था। उस दौरान यूरोप अनेक पर्यावरणीय संकटों से जूझ रहा था। पारिस्थितिक तंत्र के गड़बड़ा जाने से यूरोप में मिट्टी में प्रदूषण बढ़ गया, जिस कारण मिट्टी की उर्वरता कम हो गई। अनाज की उपज घट गई।
Submitted by HindiWater on Tue, 11/12/2019 - 10:44
Source: नैनीताल एक धरोहर
आप एक बढ़िया-सी दूरबीन ले लीजिए और मेरे साथ चलिए चीना पहाड़ी की चोटी पर। यहाँ से आपको नैनीताल के आस-पास के इलाके का नजारा वैसे ही दिखाई देगा - जैसे किसी ऊँची उड़ती चिड़िया की आँखों से आप देख रहे हों। सड़क एकदम सीधी चढ़ाई वाली है, लेकिन यदि चिड़िया, पेड़ों और फूलों में आपकी दिलचस्पी है तो तीन मील की यह चढ़ाई आपको अखरेगी नहीं।
Submitted by HindiWater on Mon, 11/11/2019 - 12:18
Source: नैनीताल एक धरोहर
इतनी ऊँचाई पर तालाब की मौजूदगी को लेकर वैज्ञानिकों के अलग-अलग मत हैं। भू-गर्भ विज्ञानी एचएफ बलैण्डफोर्ड ने 1877 और डब्ल्यू थिओबॉल्ड ने 1880 में कहा था कि यह झील ग्लेशियर की वजह से बनी। तर्क था कि ग्लेशियर का पानी भू-स्खलन के बाद यहाँ भर गया था।
Submitted by HindiWater on Tue, 11/05/2019 - 16:48
विभिन्न देशों के 16 बच्चों ने जलवायु परिवर्तन (climate change) रोकने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने पर यूएन काउंसिल (UN Council) में पांच देशों के खिलाफ याचिका दायर की थी। इन 16 बच्चों में भारत के उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार जिले के कक्षा 8 की छात्रा रिद्धिमा पांडे (12 वर्ष) भी शामिल रही। रिद्धिमा पांडे (Ridhima Pandey) यूएन और नाॅर्वे सहित विभिन्न मंचों पर पर्यावरण संरक्षण पर अपनी बात रख चुकी हैं। प्रस्तुत है रिद्धिमा पांडे से हिमांशु भट्ट की बातचीत -
Submitted by HindiWater on Fri, 11/01/2019 - 10:47
Source: दैनिक जागरण, 01 नवंबर 2019
air pollution) यानी जहरीली हवा (poisonous air) अब लोगों के जीवन पर भारी पड़ रही है। एक अध्ययन ने बताया है कि उत्तर भारत में जहरीली हवा (poisonous air) के कारण गंगा के मैदानी इलाकों में रहने वाले भारतीयों की आयु सात साल तक कम हो गई है। 1998-2016 के बीच हुए शोध में कहा गया है कि उत्तर भारत में प्रदूषण (pollution) बाकी भारत के मुकाबले तीन गुना अधिक जानलेवा है।
Submitted by HindiWater on Wed, 10/30/2019 - 10:15
जैविक खेती से होने वाले फायदे और नुकसान एक बार फिर से चर्चा में हैं। रासायनिक छिड़काव और पेस्टीसाइड से भले ही किसानों को अधिक पैदावार मिल जाती है, लेकिन अक्सर इसमें लाभ से कहीं अधिक नुकसान ही रहा है। एक तरफ जहां इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति ख़त्म होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर यह भूजल में मिलकर प्राकृतिक जल स्रोतों को दूषित कर रहा है।
Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 - 17:02
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया।
Submitted by HindiWater on Thu, 10/10/2019 - 14:36
दिव्यांगता को लोग शरीर की कमजोरी समझने लगते हैं और पेंशन तथा ट्राईसाइकिल को दिव्यांगों का सहारा। इसलिए ज्यादातर लोग दिव्यांग की मदद के नाम पर उसे समाज कल्याण विभाग से पेंशन लगवाने की बात तक कह देते हैं, लेकिन किसी भी दिव्यांग की हौंसलाअफ़ज़ाई के लिए उसकी मानसिक जरूरत को समझना बेहद जरूरी है। दिव्यांगों की जरूरतों को समझने का ये कार्य उत्तरप्रदेश के मोदीनगर निवासी शिशिर कुमार चौधरी बखूबी कर रहे हैं। वे खुद दिव्यांग हैं, लेकिन दिव्यांगता को अपनी ताकत बनाकर जैविक खेती से अन्य दिव्यांगों को सक्षम बना रहे हैं। 
Submitted by HindiWater on Thu, 10/03/2019 - 10:35
पिछले 48 घंटों में बिहार में होने वाली कुल मानसूनी बरसात का 40 प्रतिशत पानी बरसा है। उस अप्रत्याशित बरसात के कारण लगभग 21 लाख की आबादी वाले पटना नगर के 80 प्रतिशत मकानों में पानी भरा है। वहीं पटना नगर की सडकों पर छह से सात फुट तक पानी भरा है। अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार पटना के पास से बहने वाली गंगा, पुनपुन, सोन और गंडक खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।
Submitted by HindiWater on Fri, 09/27/2019 - 16:44
Source: पाञ्चजन्य, 8 सितम्बर 2019
पिथौरागढ़ का गाँव कुसौली उत्तराखण्ड का एक निर्मल गाँव है। चीन-नेपाल की सीमा से सटे 222 परिवारों वाले कुसौली में स्वच्छता का आलम यह है कि यहाँ कोई भी कागज का टुकड़ा तक इधर-उधर नहीं फेंकता। जिला मुख्यालय के नजदीक सैन्य इलाके से लगते ग्राम पंचायत कुसौली की आबादी 2011 में करीब 1100 थी, जो 3,500 हो गई है।