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Submitted by Shivendra on Mon, 12/30/2019 - 11:38
Source: नैनीताल एक धरोहर

शेर-का-डांडा पहाड़ी के 18 सितम्बर, 1880 के भू-स्खलन के बाद इस क्षेत्र में तैनात विशेष सिविल अधिकारी मिस्टर एच.सी.कोनीबीयरे, (ई.एस.क्यू., सी.एस.) ने 11 अक्टूबर, 1880 को नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंसेस एण्ड अवध के सचिव को भू-स्खलन के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी। इस रिपोर्ट का हिन्दी भावार्थ निम्न प्रकार थाः-

नैनीताल दिनाँकः- 11 अक्टूबर, 1880,

प्रेषक- एच.सी. कोनीबीयरे, (ई.एस.क्यू.)

सी.एस.ऑन स्पेशल ड्यूटी,

सेवा में,

Submitted by Shivendra on Sat, 12/28/2019 - 12:56
बच्चे ही नहीं बड़े भी घर के अंदर के वायु प्रदूषण से सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन बड़ों की अपेक्षा बच्चे अधिक सांस लेते हैं तथा उनके अंग अधिक संवेदनशील होते हैं, इसलिए वें अधिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं और घर के अंदर का ये वायु प्रदूषण भारत में बच्चों की जान तक ले रहा है। इनमें 0 से 5 वर्ष तक की आयु के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं।
Submitted by Shivendra on Wed, 12/25/2019 - 10:35
Source: दैनिक जागरण, 25 दिसंबर 2019
बोर्ड की लापरवाही का आलम यह है कि इन्होंने अभी तक इनका सर्वे करने तक की जहमत नहीं उठाई। कैग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों और विशेषज्ञों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इकाइयों का सर्वे करने और उनका पंजीकरण कराने पर जोर दिया है।
Submitted by Shivendra on Sat, 12/14/2019 - 18:28
हाल ही में केंद्र सरकार ने टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड का विनिवेश करने की घोषणा की है। इस परिस्थिति में ठंडे मौसम की शुरुआत के साथ जब उत्तराखंड में बर्फबारी की भी शुरुआत हो गई है। लोग 25 नवंबर से बांध का काम रोक कर धरने पर बैठे हैं।
Submitted by Shivendra on Thu, 12/12/2019 - 12:07
Source: दैनिक जागरण, 12 दिसम्बर 2019
सुना है कि सरकार अस्थायी राजधानी देहरादून में दम तोड़ चुकी रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने की तैयारी में है, लेकिन यहां मेरी सांसें उखड़ते देख भी कोई सुध लेना वाला नहीं। मैं खोह नदी हूं। वही खोह, जिसके तट पर अप्सरा मेनका अपनी नवजात पुत्री को छोड़कर वापस स्वर्ग लौट गई थी।
Submitted by Shivendra on Mon, 12/09/2019 - 12:42
Source: नैनीताल एक धरोहर
18 सितम्बर, 1880 के तुरन्त बाद औपनिवेशिक सरकार नैनीताल की पहाड़ियों की सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील हो गई। सरकार ने इस हादसे को ‘विपत्ति’ करार दिया। हादसे के ठीक चौथे दिन 22 सितम्बर, 1880 को नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंसेस के लेफ्टिनेंट गवर्नर एवं चीफ कमिश्नर ने शेर-का-डांडा पहाड़ी की जाँच के लिए एक कमेटी बना दी। कुमाऊँ के तत्कालीन कमिश्नर लेफ्टिनेंट जनरल सर हैनरी रैमजे को इस जाँच कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया।
Submitted by Shivendra on Sat, 12/07/2019 - 15:33
Source: नैनीताल एक धरोहर
नैनीताल के इतिहास में वर्ष 1880 को भुलाया नहीं जा सकेगा, क्योंकि इस वर्ष यहाँ भारी भू-स्खलन हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। इस वर्ष 14 सितम्बर से ही यहाँ भारी बारिश होने लगी थी, जो 19 सितम्बर, रविवार शाम तक अनवरत चलती रही।
Submitted by Shivendra on Fri, 12/06/2019 - 12:04
Source: नैनीताल एक धरोहर
1880 तक नैनीताल फलता-फूलता और सर्व सुविधा सम्पन्न एक खुशहाल नगर बन चुका था। इस वर्ष 17 सितम्बर तक यहाँ की आबादी 10,054 हो गई थी, जिसमें 2,957 महिलाएँ और 7,097 पुरुष थे। अंग्रेज नैनीताल के मौसम और स्वास्थ्यवर्धक जलवायु से अभिभूत थे।
Submitted by Shivendra on Fri, 12/06/2019 - 11:05
मातृसदन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगों के संदर्भ में एक पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हुई। जिस कारण मातृसदन की साध्वी पद्मावती ने 15 दिसंबर 2019 से 6 सूत्रीय मांगों को लेकर अनशन की घोषणा कर दी है। अनशन के बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भी अवगत करा दिया गया है। 
Submitted by Shivendra on Thu, 12/05/2019 - 10:47
Source: नैनीताल एक धरोहर
1870 में लंदन और भारत के बीच समुद्री तार व्यवस्था कायम हो गई। तार की सुविधा से लंदन से भारत का शासन चलाना पहले के मुकाबले और आसान हो गया। 1871 में अमरिकन एपिस्कोपल मैथोडिस्ट मिशन ने नैनीताल में एक डिस्पेंसरी खोली। इसके साथ ही यहाँ ऐलोपैथिक चिकित्सा पद्धति की शुरुआत हो गई। 1872 में मिस्टर टॉम मरे ने मालरोड में एक छोटा सा होटल बनाया, जिसका नाम था ‘मेयो होटल’। यह नैनीताल का पहला होटल था। कुछ समय बाद मिस्टर मरे बैंकरप्ट (दिवालिया) हो गए। यह होटल कई हाथों बिका। बाद में इसका नाम ‘अलबियॉन होटल’ हो गया।