आमरण अनशन

Submitted by admin on Tue, 01/20/2009 - 16:41

आमरण अनशनआमरण अनशन

गुरूदास अग्रवाल का आमरण अनशन


अनशन स्थल, अखिल भारत हिन्दू महासभा भवन।

भागीरथी गंगा के गंगोत्री से उत्तरकाशी तक नैसर्गिक प्रवाह को बनाये रखने के लिये आज दिनांक 19.01.2009, डॉ0 गुरूदास अग्रवाल के आमरण अनशन का 6वां दिन है। अभी तक प्रशासन द्वारा न तो किसी भी तरह की स्वास्थ परिक्षण की व्यवस्था की गई और न ही किसी भी तरह का कोई प्रशासनिक व्यक्ति उनसे मिलने आया। पिछली बार डॉ0 अग्रवाल के अनशन के दौरान केन्द्रीय उर्जा मन्त्रालय द्वारा दिये गये लिखित आश्वासन में यह कहा गया था की भागीरथी के नैसर्गिक प्रवाह को बनाये रखने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जायेगा। इसी बावत दिनांक 11 एवं 12 जनवरी को उच्च स्तरीय समिति के कुछ सदस्य भागीरथी पर पहले से बनी हुई दो परियोजनाओं एवं ऊपरी हिस्से का मुआयना करने पहुँचे परन्तु इस दल में न तो समिति के अध्यक्ष थे और जो लोग गये थे उन लोगों ने पहले से ही निर्मित बाँध के कर्मचारियों से कह रखा था कि इस दौरान नदी में अधिक पानी छोड़ा जाये इसका साक्ष्य वहाँ के स्थानिय अमर उजाला संस्करण (16 जनवरी 2009) में दिया गया है। समाचार पत्र में इस बात का साफ-साफ उल्लेख है कि समिति को भ्रमित करने के लिये सामान्य से ज्यादा पानी छोड़ा गया। जिससे मनेरी बाँध की झील खाली हो गई और दो दिनों तक विद्युत का उत्पादन बन्द रहा।

इस पर डॉ0 अग्रवाल की प्रतिक्रिया यह है कि यह रूख तो एन.टी.पी.सी. का शुरू से ही रहा है। जो कि उन्होंने कमेटी के गठन के समय ही स्पष्ट कर दिया था और समिति में ऐसे इंजिनियर रखे जो एन.टी.पी.सी. के समर्थक हो और उन्हें विषय की जानकारी न हो। आज सुबह से डॉ0 अग्रवाल से मिलनें बाले लोगों का तांता लगा रहा जिनमें से प्रमुख व्यक्ति है अरूण कुमार जी पानी वाले बाबा, पी.सी. त्यागी भूतपूर्व अध्यक्ष सी.पी.सी.बी., डॉ0 रवि चौपड़ा निदेशक लोक विज्ञान संस्थान देहरादून, श्री जय भगवान भूतपूर्व प्रदेश शिवसेना प्रमुख दिल्ली, महेश कुमार, अन्तामिया एवं माया इटली।
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डॉ0 अग्रवाल की कुछ विशेष प्रतिक्रियाएँ

1- लोहारी नाग निर्माणों के मलवे के कारण विद्युत निगम को तो सौ करोड़ की हानि-भागीरथी के जीवित रहने पर क्या कोई प्रभाव नहीं? ऐसे सब निर्माणों पर तुरन्त रोक लगनी चाहिए यह भागीरथी के जीवित रहने से जुड़ा टैक्निकल पहलु है।

2- HLEG के दौरे के दौरान अधिक पानी छोड़कर धोखा देने के प्रयत्नों के कारण उत्तराखंड जल विद्युत निगम की निन्दा और भर्त्सना की और उन्होंने यह कहा कि इन्हें ब्लैक लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए।

संलग्न :-

1. अमर उजाला समाचार पत्र की फोटो प्रति।

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