आर ओ सिस्टम की जानकारी

Thu, 06/25/2009 - 12:26
ईमेल पता
drlathabhaskar@gmail.com
आपका नाम
लता भास्कर
अपना प्रश्न यहाँ लिखें
आर ओ सिस्टम के उपयोग के बारे में आपके अनुभव क्या हैं? इसकी लागत, स्थायित्व, प्रबंधनात्मक लागत, सुरक्षा मानक, और तकनीकी विभिन्नताएं क्या हैं?

कृपया आर ओ सिस्टम लगाने वाली एजेंसियों और संस्थानों का विवरण उपलब्ध कराएं।

कुट्टानाड, केरल जैसे जलाप्लावित और समुद्र तल से नीचे के क्षेत्र विशेष में कौन सी विकेन्द्रीकृत पद्धति अपनाई जा सकती है?


मैं अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकॅलॉजी एंड इंवायरमेंट(ATREE), केरल के साथ आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए काम करती हूं। फिलहाल, मैं वेम्बानाड परियोजना पर काम कर रही हूं जिसका फोकस वेम्बानाड वेटलैण्ड के तन्नीरमुक्कम बैराज के दक्षिणी क्षेत्र (जमीन और झील दोनों) पर है। हम झील के पानी की गुणवत्ता की नियमित रूप से जांच कर रहे हैं जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पानी में पेस्टीसाइड और अन्य रसायनों के अलावा अनेकों रोगजनक कीटाणु मौजूद हैं। हाल ही में, वहाँ हैजा फैलने से 12 लोगों की मौत हो गई थी. जल जनित रोगों से इस क्षेत्र में मौतों की संख्या बढ़ रही है।
झील के आस पास के 17 गांवों के लोग अपनी पानी संबंधी जरूरतों के लिए इसी पर निर्भर हैं। पाइप जलापूर्ति बहुत दूर (तिरुवल्ला) से होती है जिससे पाइपों में जगह- जगह पर लीकेज के कारण साफ पानी नहीं मिल पाता है इसलिए झील पर निर्भरता के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है।
गर्मियों के दौरान, पीने का पानी 35 नौकाओं द्वारा मुहैया कराया जाता है एक नौका में 2400 लीटर पानी आ पाता है। वर्षा जल संचय की इकाइयां भी क्षेत्र में है लेकिन अधिकांश घर छप्पर के हैं, जिनमें वर्षा जल भंडारण टैंक के निर्माण के लिए जगह नहीं है।
इन लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए, ATREE ने झील के पानी को फिल्टर करने के लिए कुछ चयनित स्थानों पर आऱ ओ (रिवर्स ओस्मोसिस) लगाने की योजना बनाई है इसकी सफलता से और भी स्थानीय स्तर पर इकाईयां लगाई जा सकती हैं।
इस मॉडल को क्रियान्वित करने के लिए मैं आऱ ओ के बारे में और अधिक जानना चाहती हूं।
आपके जवाबों से ATREE को इन पंचायतों में पेयजल मुहैया कराने के लिए इस मॉडल को क्रियान्वित करने में मदद मिलेगी।

लता भास्कर,
अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकॅलॉजी एंड इंवायरमेंट,
तिरुअनंतपुरम


I work with the Ashoka Trust for Research in Ecology and the Environment (ATREE), Kerala, on wetland conservation. Currently, I am working on the Vembanad project, concentrating on the area (both land and lake) to the south of Thanneermukkom barrage of the Vembanad wetland system in Kerala. We regularly monitor the water quality of the lake and have found the presence of large concentrations of microbial pathogens in the water, besides pesticides and other chemical contaminants. Recently, there was a cholera outbreak killing 12 people. Water borne diseases add to the morbidity of this area.
People in the 17 Gram Panchayats surrounding the lake depend on its water for all their domestic purpose, including cooking and drinking. They have no choice as the piped water supply coverage is just 20%. This water comes from far off places (Tiruvalla) and is unsafe due to the leaks in the pipes which pass through the lake. During the summer, drinking water is supplied by 35 boats, each carrying 2400 litres of water. Rainwater harvesting units exist in this area, but not very popular as most households have thatched roofs and little space to construct storage tanks.
To provide potable drinking water to these people, ATREE plans to install a few Reverse Osmosis (R.O.) plants in selected places to filter lake water. However, these should be reliable. If they prove to be successful, they will pave the way for more such local and decentralised units. I want to learn more about R.O. plants to implement this model.
I request Community members to please share their inputs on the following:

• What are the experiences of using R.O. systems? Please share details regarding their cost effectiveness, longevity, O&M costs, safe-guards, technology diversifications if any• Please provide details of agencies and institutions installing R.O. systems
• What area-specific, decentralized approaches can be adopted in places like Kuttanad, Kerala which is a water-logged area and below the sea level?

Your inputs will help ATREE develop and implement this model for providing drinking water in these Panchayats.
Latha Bhaskar,
Ashoka Trust for Research in Ecology and the Environment,
Thiruvananthapuram
Disqus Comment