इटावा में पानी के नाम पर घोटाला

Submitted by admin on Tue, 08/25/2009 - 09:45

देश में शुद्ध पानी की विकराल समस्या है। लोगों को हलक तर करने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है परंतु जिन कंधों पर इस समस्या के समाधान की जिम्मेदारी है, वे घोटाले कर सरकारी धन का डकारने में जुटे हैं।

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में जब सांसद प्रेमदास कठेरिया ने जल निगम से वर्ष 2008-09 में नए स्थापित करवाए गए हैंडपंप एवं रिबोर हैंडपंपों की सूची मांगी तो वह सन्न रह गए। जल निगम ने जो सूची उपलब्ध कराई उसमें 462 नामों को दो बार दर्शाया गया है। इस प्रकार से जल निगम में फौरी तौर पर 1.80 करोड़ रूपये का घोटाला सामने आया है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि शुद्ध पानी मुहैया कराने के नाम पर करोड़ों रूपये का घोटाला किया गया है।

जल निगम द्वारा वर्ष 2008-09 में नए स्थापित करवाए गए हैंडपंप एवं रिबोर हैंडपंपों की सूची का मामला


सांसद प्रेमदास कठेरिया को जल निगम के अधिशासी अभियंता गोपीराम द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची में सिर्फ 462 नामों को दोहराया ही नहीं गया है बल्कि ऐसे नाम भी शामिल हैं जिनकी मांग के बावजूद उनके यहां हैंडपंप नहीं लग सका है। इतना ही नहीं जल निगम ने विगत वित्तीय वर्ष में 1575 हैंडपंप स्थापित कराने तथा 1482 हैंडपंप रिबोर करने का दावा तो किया है परंतु सच्चाई कोसों दूर है।

इतना ही नहीं जल निगम ने वर्ष 2006-07 में शासन की त्वरित आर्थिक ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत तीस नग पाइप पेयजल योजना के तहत धन तो हासिल कर चुका है परंतु दो वर्ष बीत जाने के बाद भी चयनित गांव अमरसीपुर व भाऊपुर में आज तक एक पाइप भी नहीं बिछ सका है। आश्च्रर्यजनक तो यह है कि जल निगम के अधिशासी अभियंता ने पहले तो सूची उपलब्ध कराने में ही आनाकानी की परंतु जब सांसद ने इस मामले को शासन स्तर पर उठाया तब कहीं उन्हें सूची उपलब्ध कराई गई।

हैंडपंप एवं रिबोर हैंडपंपों की सूची झूठ का पुलिंदा


जल निगम द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची झूठ का एक ऐसा पुलिंदा है जो खुद विभाग की पोल खोलता है। इस सूची में उन हैंडपंपों को भी अधिस्थापित करना दर्शाया गया है जो पूर्व में ही स्थापित किए जा चुके थे और वह सरकारी अभिलेखों में दर्ज भी हैं। सूची में राज्य सभा सदस्य उदय प्रताप सिंह द्वारा 16 अक्टूबर,2007 को जिन 35 हैंडपंपों को अधिस्थापित कराने की सूची दी थी, उस सूची के हैंडपंपों को भी इस नई सूची में शामिल कर लिया गया है जबकि वास्तविकता में जल निगम उन हैंडपंपों को वर्ष 2007-2008 की सूची में दर्शाकर डीआरडीए को प्रगति रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है।

इतना ही नहीं उपलब्ध सूची में विधायक सदर महेंद्र सिंह राजपूत द्वारा वर्ष 2007-08 में अधिस्थापित किए गए 225 हैंडपंपों को भी शामिल किया गया है। इसी प्रकार इस सूची में विधायक लखना भीमराव अंबेडकर के कोटे से वर्ष 2007-08 में अधिस्थापित तकरीबन एक दर्जन हैंडपंपों को भी वित्तीय वर्ष 2008-09 में दर्शाया गया है। इसी प्रकार विधान परिषद सदस्य मुलायम सिंह के कोटे के वर्ष 2007-08 में लगे हैंडपंपों को पुनः दर्शाकर सरकार को करोड़ों रूपये का चूना लगाया है।

सत्ता की हनक जल निगम के अधिशासी अभियंता गोपीराम पर साफ देखी जा सकती है। इसको इसी से समझा जा सकता है विधान परिषद सदस्य रामनरेश यादव ने विगत 3 अगस्त को विधान परिषद में किए सवाल के जबाब में नेता सदन ने साफ कहा कि विधायकों, मंत्रियों को हैंडपंपों के कोटे आवंटित नहीं होते हैं तो विधायक सदर महेंद्र सिंह राजपूत एवं लखना विधानसभा क्षेत्र में विधायक भीमराव अंबेडकर के कोटे से लग रहे हैंडपंप किस नियम के अनुसार लग रहे हैं। इस मामले को विधान परिषद के सदस्य रामनरेश यादव ने नियम 39 के तहत उठाया था।

वहीं इस संबंध में जल निगम के अधिशासी अभियंता गोपीराम का कहना है कि उन्होंने नियमानुसार ही हैंडपंप स्थापित कराए हैं। वे आरोप लगाते हैं कि कुछ ठेकेदार जो दबाब बनाने की कोशिश कर गलत काम करवाना चाहते हैं, उनकी साजिश का यह हिस्सा है। विधान परिषद द्वारा कराई जा रही जांच का वह जबाब देने को तैयार हैं।

एक काम के दो बार दाम
जब इस संबंध में जल निगम के घोटाले को लेकर पड़ताल की तो ज्ञात हुआ कि अड्डा निहाल निवासी दलवीर सिंह के यहां सिर्फ एक ही हैंडपंप लगा हुआ है जबकि अधिशासी अभियंता द्वारा सांसद को प्रस्तुत की गई सूची में उनका नाम दो बार दर्शाया गया है। दलवीर ने साफ कहा कि उनके गांव में मात्र चार हैंडपंप लगे हैं और उनके नाम से सिर्फ एक ही हैंडपंप स्थापित हुआ है। इतना ही नहीं रिबोर के नाम पर भी कैलाश चंद्र का नाम सूची में पाया गया लेकिन उनके यहां विगत पंद्रह वर्ष से हैंडपंप लगा है तब से आज तक रिबोर नहीं हुआ है। वे सवाल करते हैं कि फिर उनका नाम सूची में कहां से आ गया।

चकरनगर क्षेत्र के ब्लॉक प्रमुख पूरनमल दिवाकर के घर पर एक हैंडपंप को रिबोर होना दर्शाया गया है जबकि उनके यहां वास्तविकता में हैंडपंप लगा ही नहीं हैं। जबकि सांसद को सौंपी गई सूची में उनका नाम पृष्ठ संख्या 29 के क्रमांक संख्या 78 में दर्ज है।

जब इस संबंध में जल निगम के घोटाले को लेकर पड़ताल की तो ज्ञात हुआ कि अड्डा निहाल निवासी दलवीर सिंह के यहां सिर्फ एक ही हैंडपंप लगा हुआ है जबकि अधिशासी अभियंता द्वारा सांसद को प्रस्तुत की गई सूची में उनका नाम दो बार दर्शाया गया है। दलवीर ने साफ कहा कि उनके गांव में मात्र चार हैंडपंप लगे हैं और उनके नाम से सिर्फ एक ही हैंडपंप स्थापित हुआ है। इतना ही नहीं रिबोर के नाम पर भी कैलाश चंद्र का नाम सूची में पाया गया लेकिन उनके यहां विगत पंद्रह वर्ष से हैंडपंप लगा है तब से आज तक रिबोर नहीं हुआ है। वे सवाल करते हैं कि फिर उनका नाम सूची में कहां से आ गया।सूची को देखने पर साफ ज्ञात होता है कि बढ़पुरा ब्लॉक के बराखेड़ा निवासी राकेश यादव को सूची में क्रमांक संख्या 115 व 116 पर दर्शाया गया है। इसी प्रकार खेड़ा महाराजपुर के रामनारायण का नाम क्रमांक संख्या 1 पर तथा 312 पर, चांदनपुर के रमेश चंद्र जाटव का नाम क्रमांक संख्या 4 व 108 पर, कोठी चांदनपुर के अमर सिंह जाटव का नाम 6 व 110 पर, चांदनपुर के ही बेचे लाल जाटव का नाम 7 व 113 पर, कोठी चांदनपुर के ज्वाला प्रसाद जाटव का नाम 8 व 112 पर, पिलखर के श्याम किशोर जाटव का नाम 18 व 77 पर, कठगांव के संजीव कुमार यादव का नाम 36 व 343 पर, पिलखर के श्रीकृष्ण का नाम 67 व 370 पर, इसी गांव के ओमप्रकाश का नाम 69 व 371 पर, देशरमऊके रामभरोसे का 71 व 366 पर, मुहम्मद असलम का 73 व 375 पर, पिलखर के रहने वाले कृपाशंकर जाटव को 74 व 372 पर, रवींद्र सिंह को 75 व 376 पर, राजवीर सिंह को 76 व 376 पर, अशोक कुमार को 78 व 379 पर, भूरे सिंह को 79 व 378 पर, धर्मेंद्र को 80 व 374 पर सूची में दर्शाया गया है।

इतना ही नहीं अड्डा निहाल निवासी दलवीर सिंह को 81 व 367 पर, पिलखर के महावीर बाथम को 82 व 377 पर, हरदासपुरा के अतर सिंह को 83 व 373 पर, प्राइमरी पाठशाला आलमपुर को 92 व 151 पर, प्राइमरी पाठशाला रमपुरा को 98 व 150 पर, जरहौली के किशन लाल को 102 व 260 पर दर्शाया गया है। इसी प्रकार सांसद उदय सिंह की निधि से वर्ष 2007-08 में स्थापित किए गए डबहा के सुरेंद्र कुमार पाल एवं चिंडौली के संतोश कुमार के नाम को सूची में क्रमशः 11 व 12 पर दर्शाया गया है। उन्हीं की निधि से वर्ष 2007-08 में स्थापित देवी प्रसाद को 13 पर, कुलदीप को 14 क्रमांक पर दर्शाया गया है।

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दिनेश शाक्यदिनेश शाक्यइटावा के रहनेवाले दिनेश शाक्य १९८९ से मीडिया में कार्यरत.

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