इस्राइल के जल प्रबंधन पर केसस्टडीज

Submitted by admin on Sun, 09/14/2008 - 15:28
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इस्राइल का जल प्रबंधनइस्राइल का जल प्रबंधनपानी की स्थिति /मध्य पूर्व के देशों को पानी के मामले में दो भागों में बांटा जा सकता है। एक तरफ वे देश हैं, जिनके पास जरूरत से ज्यादा पानी है। मसलन तुर्की, इरान और लेबनान। दूसरी तरफ वे देश हैं, जिनके यहां पानी की कमी है। जैसे जॉर्डन और इस्राइल के साथ–साथ फिलीस्तीनी अथॉरिटी। चूंकि इज़राइल में तेजी से शहरीकरण हो रहा है, सो यहां के प्राकृतिक जल संसाधनों का जोरदार दोहन किया जा रहा हैं। शहरीकरण के कारण नागरिकों के उपयोग में लाए जा चुके जल और कारखानों से निकलने वाले दूषित जल तमाम तरह की गाद और कचरा पैदा कर रहे है। इससे भूजल के खारेपन के साथ नाइट्रेट्स, हेवी मेटल जैसे प्रदूषक तत्व और जीवाणु बढ़ रहे हैं।

इज़राइल में पानी की सालाना मांग अब 2,000 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पहुंच रही है। इसमें से करीब आधे हिस्से की खपत खेती में होती है। यहां जब पानी की उपलब्धता अच्छी हुआ करती थी, तब कुल पानी का दो–तिहाईं हिस्सा प्राकृतिक स्रोतों से यानी भूजल से प्राप्त होता था। करीब एक तिहाई हिस्सा सतह पर मिलता था। अब सतह पर मिलने वाला पानी केनेरेट (गैलीली झील या समुद्रद्र) से पंप के जरिये लाया जाता है। इसमें से करीब 50,000 क्यूबिक मीटर पानी तिवर्ष जॉर्डन को देने का अनुबंध है। उत्तर से दक्षिण तक ज्यादातर पानी का वितरण नैशनल वॉटर कैरियर सिस्टम करता है। यह सिस्टम उच्च स्तर की इंजीनियरिंग और समन्वित जल प्रबंधन का बढि़या उदाहरण है। मेकोरोट–नैशनल वॉटर कंपनी जल की आपूर्ति करने और इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नैशनल अथॉरिटी फॉर वाटर एंड वेस्टवाटर के समक्ष जिम्मेदार है।

देश में पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने में अब प्राकृतिक जल संसाधन समर्थ नहीं हैं। हाल के समय में आए सूखे और पिछले तीस सालों में भूजल के अत्यंत दोहन के कारण अब एक नया और चुनौतीपूर्ण जल बंधन कार्यक्रम बनाया गया है। अच्छी बात यह है कि इज़राइल बर्बाद हो चुके पानी का 75 फीसदी हिस्सा पहले से ही रिसाइकल करता आ रहा है। भविष्य की योजना यह है कि इस स्थिति को और बेहतर बनाया जाए और आखिरकार पानी को खारेपन से पूरी तरह मुक्त किया जाए। समुद्रद्र के पानी और खारे पानी को मीठा बनाने में इज़राइल विश्व में अग्रणी है। वैसे, ऐसे ज्यादातर प्रोजेक्टों में इज़राइली कंपनियों ने विदेशों में काम किया है।

वैकल्पिक समाधन

पानी की कमी को कुछ हद तक पूरी करने के लिए तुर्की से पानी आयात करने का फैसला सिर्फ इसलिए त्याग दिया गया, क्योंकि इस काम में जितनी रकम खर्च होती, उससे आधे में समुद्रद्र के पानी को खारेपन से मुक्त कर लिया जाता। इज़राइल ने पानी की मुश्किलों का सामना अपनी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता के आधार पर किया है। यह काम इस तरह से किया जा रहा है कि ज्यादा से ज्यादा पानी मिले, इस अमूल्य संसाधन के मामले में देश की स्वतंत्रता और उसका नियंत्रण कायम रहे और खर्च भी कम से कम हो। समाधान मुख्य तौर पर यह है कि नागरिकों के उपयोग के बाद बर्बाद हो चुके पानी को फिर से इस्तेमाल में लाया जाए। खास तौर से शहरी नागरिकों के उपयोग में लाए जा चुके पानी का सिंचाई में इस्तेमाल हो। साथ ही समुद्रद्री पानी और हल्के खारे पानी को खारेपन से मुक्त किया जाए।

जल संरक्षण, बारिश में बढ़ोत्तरी और तूफानी बारिश से मिलने वाले पानी का उपयोग करने की भी कोशिश की जा रही है। इज़राइली वॉटर कमिशन प्रोग्राम के केंद्र में यही है कि अगले 10 सालों में वैकल्पिक और गैरपारंपरिक जल संसाधनों का विकास पूरी तरह से कर लिया जाए। इसमें ज्यादातर जल के दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाने वाले प्रोजेक्ट हैं और समुद्रद्री पानी के रिवर्स आस्मोसिस तथा खारे पानी को मीठा बनाने के भी कुछ प्लांट हैं। इनमें प्रत्येक के तहत पानी की उपरोक्त मात्रा का 20 से 25 फीसदी यानी 400 से 500 मिलियन क्यूबिक मीटर तक सालाना सप्लाई किए जाने की योजना बनाई गई है। इन प्रोजेक्टों को बड़े ही कुशल तरीके से मौजूदा नैशनल वॉटर सिस्टम से जोड़ा जा रहा है।

जल को फिर से रिसाइकलिंग में लाना और उनका पुन: इस्तेमाल

इस्राइल में पानी की कमी के साथ–साथ समुद्र में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। इसी कारण पानी की रिसाइकलिंग और दोबारा इस्तेमाल करने की व्यवस्था का विकास करने, उन्हें अपनाने और लागू करने के कार्यक्रम देश भर में चलाए गए। उपयोग के बाद गंदा हो चुके जल को भी इस्राइल में एक टिकाऊ संसाधन के रूप में देखा गया। गंदे पानी को किसी ऐसी जगह नहीं खपाया जा सकता, जो पर्यावरण के नजरिये से सुरक्षित हो, लेकिन उससे सिंचाई करना स्वच्छ माध्यम समझा जाता है। इससे कचरे के तौर पर निकले पानी का ट्रीटमेंट सस्ता हो जाता है। कई जगहों पर यह खाद पर होने वाले खर्च को बचा सकता है। इज़राइल में पानी की कमी ने किसानों, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और सरकारी अधिकारियों को एकजुट किया, ताकि वे पानी के दोबारा इस्तेमाल के अभियान बड़े स्तर पर शुरू कर उन्हें चला सकें। इससे जुड़े उपकरण बनाएं और विभिन्न विधियों पर नजर रखें।

यहां के शाफदान प्रोजेक्ट को तो दुनिया भर में जाना जाता है। इसके तहत तेल अवीव और इसके उपनगरीय इलाकों के उपयोग में लाये जा चुके जल को इकाट्ठा किया जाता है। यहां बता दें कि तेल अवीव और उसके उपनगरों में देश की कुल आबादी का 20 फीसदी हिस्सा रहता है। जमा किए गए पानी को कहीं और ले जाकर उसकी जैविक तरीके से सफाई की जाती है। फिर उसे जमीन के नीचे पहुंचाया जाता है, जो कृत्रिम रिचार्ज का एक तरीका है। बाद में उस पानी को पंप के जरिये निकालकर देश के दक्षिणी हिस्से में ले जाया जाता है, ताकि खुल कर सिंचाई की जा सके। एक और उदाहरण हायफा और उसके आसपास के इलाकों के किशोन प्रोजेक्ट का है, जहां से फिलहाल 12 एमसीएम पानी प्रााप्त किया जा रहा है। वहां पारंपरिक तरीके से पानी की शुद्धता बनाए रखी जाती है। इसमें दो तालाबों के जरिये पानी खुद ब खुद साफ हो जाता है। चूंकि देश में बड़ी संख्या में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लग रहे हैं या उनका विस्तार हो रहा है, सो गाद की समस्या काफी गंभीर होती जा रही है। ट्रीटमेंट प्लांटों से निकली गाद भूमिगत जल को दूषित न करने पाए और खेती में सस्ती खाद के तौर पर इसका इस्तेमाल हो, इसके लिए गाद फिल्टर करने के इंतजाम भी किए गए हैं।

लंबे समय तक गंदे पानी से सिंचाई करने की वजह से पर्यावरण को क्या गंभीर नुकसान हो सकता है, इस पर भी कुछ ध्यान दिया गया है। मिट्टी के क्षारीय हो जाने से किशोन कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट में दो साल तक बाधा आई। इसे ठीक करने के लिए सफाई के मद में काफी रकम खर्च करनी पड़ी। उस सफाई से जुड़े जो अन्य पहलू हैं, उनमें हेवी मेटल्स से मिट्टी का दूषण, गंदे जल में घुलनशील आर्गेनिक मॉलिक्यूल्स के कारण भूजल में प्रदूषक तत्वों की बढ़ोत्तरी जैसी समस्याएं मुख्य हैं। इसके लिए कई उपाय सुझाए गए। हालांकि उन सुझावों में कुछ में पानी की बर्बादी के अलावा बड़े खर्च और शोध की जरूरत जैसे मसले भी जुड़े थे। जैसे एक सुझाव यह था कि लशिंग (पानी की तेज धारों) के जरिये मिट्टी की सफाई की जाए। लेकिन 80 के दशक में विस्तृत जांच की गई, जिससे पता चला कि नागरिक उपयोग के बाद गंदा हो चुके जल की सिंचाई से सूक्ष्म जीवाणुओं के इन्फेक्शन का खतरा नहीं रहता। कुल मिलाकर उपयोग में लाए जा चुके जल को दोबारा इस्तेमाल के लिए खारेपन से मुक्त करने की नीति लगातार लोकप्रिय हो रही है।

पानी का दोबारा इस्तेमाल कम से कम इस सदी के पूर्वाद्र्ध तक तो इज़राइल के लिए मुख्य जल स्रोत रहेगा। आस्ट्रेलिया, कैलिफॉर्निया और अन्य स्थानों पर भी इस्राइल जल चक्र का विस्तार करने के काम में जुटा है। महज बारिश के पानी को एकमात्र स्रोत मानने की जगह उपयोग में लाए जा चुके जल को फिर से स्रोत के तौर पर चक्र में स्थापित किया जा रहा है। शहरों में इस तरह की व्यवस्था अभी विकसित हो रही है, लेकिन वहां भी आगे चलकर खेती में ऐसे पानी का इस्तेमाल बढ़ेगा। बंजर और अर्धबंजर मेडिटेरेनियन बेसिन में पानी का दोबारा इस्तेमाल शांति को बढ़ावा देगा और आर्थिक स्थिरता भी दान करेगा।

पानी को खारेपन से मुक्त करने का कार्यक्रम

समुद्र के पानी को खारेपन से मुक्त करने का बड़े स्तर का पहला प्लांट दक्षिण एश्कलन में है, जहां 2005 में काम शुरू हुआ था। तब उसका उत्पादन, प्लांट की क्षमता का आधा यानी 50 एमसीएम प्रतिवर्ष था। कुछ ही महीनों में इसने अपनी पूरी क्षमता (100 एमसीएम प्रति वर्ष) से उत्पादन शुरू कर दिया। इस प्लांट का आधा पानी गाजा पट्टी को सप्लाई करने की योजना बनी थी। एक और प्लांट आकार में इसका आधा है, उसके निर्माण का काम काफी आगे बढ़ चुका है। एश्कलन और तेल अवीव के बीच यह प्लांट पैल्मैकिम में बन रहा है। 100 एमसीएम प्रतिवर्ष की क्षमता वाले एक अन्य प्लांट की निविदा की कार्यवाही अंतिम दौर में है। यह प्लांट तेल अवीव और हायफा के बीच उत्तरी हडेरा में बनेगा। भविष्य में इसके विस्तार की भी योजना है, ताकि जॉर्डन और फिलीस्तीनी अथॉरिटी को भी पानी दिया जा सके।

जुलाई 2000 में बड़े स्तर पर शुरू की गई निविदा की क्रिया के मुताबिक, इज़राइल ने नैशनल इनस्ट्र्क्चर और फाइनैंस मंत्रालयों के जरिये 3 सितंबर 2001 को दक्षिण इज़राइल के एश्कलन में 25 साल का बीओटी (बनाओ, चलाओ और सौंपो) प्रोजेक्ट वी. आई. डी. (विवेंडी–वेयोलिया–आईडीई–डैंकनर) डिसैलिनेशन कंपनी लिमिटेड को सौंपा। इस कंपनी का गठन खास तौर से इसी प्रोजेक्ट के लिए किया गया था। बीओटी के कॉन्ट्रैक्ट पर यरूशलम में 25 नवंबर 2001 को हस्ताक्षर किए गए। इस अनुबंध का शुरुआती मूल्य पहली बार 50 एमसीएम प्रतिवर्ष की क्षमता के लिए 52.7 अमेरिकी सेंट प्रति मीटर क्यूबिक था। 28 अप्रैल 2002 को अतिरिक्त 50 एमसीएम प्रप्रतिवर्ष की क्षमता के लिए हस्ताक्षर हुए। इज़राइल के दक्षिणी बिंदु इलात में रेड सी के पास समुद्री पानी को खारेपन से मुक्त करने वाला प्लांट इस समय 13.3 एमसीएम पानी की सप्लाई प्रतिवर्ष करता है। यह प्लांट 1997 से चालू है। यह प्लांट दुनिया में पानी को खारेपन से मुक्त करने का सबसे सस्ता प्लांट (75 सेंट ति क्यूबिक मीटर) है। अश्दोद, एश्कलन और हायफा में इससे भी सस्ते और बड़े प्लांट की निविदाएं हाल में आई हैं। एश्कलन प्लांट के पानी को वॉटर एंड डिसैलिनेशन अथॉरिटी को बेचा जाता है। बीओटी अग्रीमेंट के तहत इस अथॉरिटी के अनुबंध को इज़राइल सरकार की तिबद्धता का दर्जा प्राप्त है। अग्रीमेंट समाप्त हो जाने के बाद यह प्लांट राष्ट्र का हो जाएगा।

इज़राइल के विभिन्न कदमों और गतिविधियों पर एक नजर
पर्यावरण और लोगों की सेहत की रक्षा के लिए निम्न मामलों में नियम और मानक जारी किए गए हैं। इन्हें लगातार अपडेट कर लागू किया जाता रहा है।

अबाधित सिंचाई करने के लिए उपयोग में लाए जा चुके जल की गुणवत्ता
धाराओं तक पहुंचाने के लिए उपयोग में लाए जा चुके जल की गुणवत्ता
उद्योगों से निकले गंदे जल की गुणवत्ता
पेयजल की गुणवत्ता
खारेपन से मुक्त पानी की गुणवत्ता

पानी के कामों से जुड़े मटीरियल और उपकरण
इस्राइल में पानी से जुड़े उद्योगों को और प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने पानी से जुड़े उद्योगों को देश के रणनीतिक क्षेत्र का दर्जा दे दिया है। शोध एवं विकास के लिए विशेष फंड तय किया गया है।

इज़राइल की ड्रिप सिंचाई प्रणाली, समुद्री पानी को खारेपन से मुक्त करने की तकनीक और जल सुरक्षा को दुनिया भर में जाना जाता है। खेती, शहरी क्षेत्रों और उद्योगों के लिए रिसर्च, डिवेलपमेंट और खोज के क्षेत्रों में इज़राइल को विशेषज्ञता हासिल है। यह उद्योगों, शिक्षाविदों, सरकारी फंडों के सहयोग से हो सका है। ऐसे कई क्षेत्र हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है।

पानी बचाने वाले उपकरण और प्लांट। इनमें घरेलू उपयोग भी शामिल है। पानी सप्लाई के नेटवर्क में लीकेज की खोज, सामान्य पानी और उपयोग में लाए जा चुके पानी को शुद्ध करने की विधियां , विभिन्न प्रणालियों का बंधन और क्षमता बढ़ाने के मॉडल, जल बंधन का कम्प्यूटरीकृत सिस्टम और आटोमैटिक कंट्रोल, पानी की गुणवत्ता पर नजर रखना और पूर्व चेतावनी देने वाली प्रणाली।

औद्योगिक जल पर रिसर्च में इज़राइल के जो मुख्य विश्वविद्यालय जुटे हैं, उनमें यरूशलम स्थित हिब्रू यूनिवर्सिटी, टेक्नियन इस्राइल इंस्टिट्यूट ऑव टेक्नोलॉजी, नेगेव की बेन गुरियन यूनिवर्सिटी आदि मुख्य हैं। अन्य विश्वविद्यालय और सरकारी शोध संस्थान भी इस बढ़ती चुनौती का मुकाबला करने में लगे हैं। वॉटरंट्स नामक एनजीओ जल उद्योग, अकादमियों और पूंजी निवेशकों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देता है। इज़राइली वॉटर असोसिएशन नाम का एनजीओ भी पेशेवर क्षमता बढ़ाने और जल से जुड़े राष्ट्रीय हित के अनेक मसलों पर काम करता है।

निष्कर्ष

पानी की कमी तो हमारे देश में हमेशा से रही है। यह हमारा इतिहास रहा है। इसके कारण युद्ध और पीड़ा झेलनी पड़ी है। बात अब्राहम के जमाने से शुरू होती है, जब बीर–शेवा के कुएं के लिए लड़ाई हुई थी। मिस्र में सदियों तक जिसकी परेशानियां झेलनी पड़ीं। इसके बाद जॉर्डन की नदियों पर सीरिया से लड़ाई हुई। अब आजादी मिलने पर फिलीस्तीनियों के साथ झड़पें हुई हैं। पानी के मसले पर इज़राइल की आज की सोच यही है कि नकारात्मक भावों को भले ही खत्म न किया जा सके, पर कम जरूर किया जाना चाहिए। इस आधुनिक सोच को निम्न बिंदुओं में समेटने की कोशिश की गई है : उपयोग में लाया जा चुका जल भी सतत जल स्रोत है।

समुद्र भी जल का स्रोत है, भले ही इसे शुद्ध करना महंगा पड़े, पर यह मात्रा के मामले में अथाह है। उपयोग में लाए जा चुके जल का स्वच्छ इस्तेमाल सिंचाई में हो सकता है। इससे ऐसे पानी का ट्रीटमेंट कम खर्च में हो जाता है। हर तरह का पानी, चाहे वह कचरे के तौर पर निकला पानी क्यों न हो, राष्ट्र की संपत्ति है। पानी से जुड़े उद्योगों को देश में रणनीतिक क्षेत्र का दर्जा दिया जाता है और उन्हें वैसी ही मदद मिलती है। पर्यावरण स्वच्छ बनाए रखने और पानी से जुड़े उद्योगों के विकास के लिए मानकों का पालन जरूरी है। इज़राइल को भविष्य में जल संकट से मुक्त कर मध्यपूर्व के साथ–साथ विश्व को योगदान देना है तो खोज के साथ–साथ शोध एवं विकास ही इसके मुख्य माध्यम हैं।

पानी और मशाव

मशाव इज़राइल का अंतरराष्ट्रीय सहयोग विकास कार्यक्रम है। इसकी स्थापना 1957 में हुई थी। इसके तहत विकासशील देशों और बदल रहे समाजों के साथ सहयोग के अब 50 साल पूरे हो चुके हैं। गरीबी हटाने, आर्थिक विकास करने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने, बढ़ते रेगिस्तानी इलाकों से निपटने, सामुदायिक विकास करने, लैंगिक बराबरी लाने और सशक्त बनाने, शिक्षा दिलाने, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने, जल सुरक्षा और संरक्षा को मशाव ने बढ़ावा दिया है। आज मशाव इज़राइली विदेश मंत्रालय का एक विभाग है। इस पर इज़राइल के उन संसाधनों को जुटाने की जिम्मेदारी है, जिनसे संयुक्त राष्ट्र शताब्दी विकास लक्ष्यों को पूरा करने के दुनिया के यासों में सहयोग दिया जा सके।

लक्ष्य : जल सुरक्षा और रक्षा

मशाव तकनीक के लेन–देन, शोध और विकास अनुभव को इज़राइल के मुख्य संस्थानों की उच्च तकनीक विशेषज्ञता के साथ एक सूत्र में पिरोता है। यह विशेषज्ञता सार्वजनिक और सरकारी क्षेत्र से लेकर अकादमियों के साथ–साथ व्यापारिक समुद्रदाय तक में होती है। मशाव जानकारियों के साथ–साथ आधुनिक तकनीकों को बांटने के लिए तैयार है, ताकि पानी की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे देशों में उपलब्धता, सुरक्षा व रक्षा के लिए जरूरी सेवाअों को बेहतर बनाया जा सके। ये जानकारियां और तकनीकें इज़राइल ने अपनी विकास यात्रा के दौरान निम्न विषयों में हासिल की हैं।

जल संसाधनों का बंधन
सिंचाई की आधुनिक तकनीकें
समुद्र और कचरे के तौर पर निकले पानी का शुद्धीकरणशहरी क्षेत्रों में पानी का नुकसानसीवरेज और खारे पानी को शुद्ध बनाना
जल सुरक्षा
लागू करने के मॉडल

मशाव अपने प्रोफेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम इज़राइल के साथ–साथ और जहां भी जरूरत पड़े, वहां उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विकास की रणनीति पर अमल के लिए देश में विकास के प्रोजेक्ट चलाएगा। इस संबंध में जरूरी कौशल देने के लिए सबसे अनुभवी विशेषज्ञों को बुलाया जाता है और टैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है। यह काम इस्राइल के साथ–साथ विदेशों में भी कंसल्टेंसी के तौर पर किया जाता है, चाहे यह कंसल्टंसी कम समय के लिए हो या ज्यादा समय के लिए। यह काम पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत किया जाता है।

मृदा व जल विज्ञान विभाग, कृषि विभाग, खाद्य एवं जल गुणवत्ता विज्ञान, हिब्रू यूनिवर्सिटी, यरूशलम, इज़राइल।

स्रोत : विदेश मंत्रालय, इज़राइल, अंतरराष्ट्रीय सहयोग केंन्द्र, मशाव
 

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