तालाबों में खोदा जाएगा रिचार्ज वेल (इंजेक्शन वेल)

Submitted by admin on Mon, 09/15/2008 - 18:19
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रिचार्ज वेलरिचार्ज वेलक्या है 'रिचार्ज वेल' / 'रिचार्ज वेल' दो प्रकार के हो सकते हैं -- ( क ) इंजेक्शन कुंआ- जिसमें पानी को पुनर्भरण के लिए अंदर डाला जाता है और ( ख ) रिचार्ज कुंआ जिसमें पानी गुरुत्व के प्रवाह बहता है।इंजेक्शन कुएं ट्यूबवेल के समान है . यह तकनीक परिष्कृत सतही जल को गहरे एक्वाफर में डालकर भूमिगत जल भंडारण के लिए उपयुक्त है । इन कुओं को गर्मियों के दौरान पम्पिंग कुओं के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस विधि से एक या कई एक्वाफर का पुनर्भरण किया जा सकता है। इस तकनीक से पुनर्भरण करना अपेक्षाकृत महंगा है और ट्यूबवेल के निर्माण और रखरखाव के लिए विशेष तकनीक की आवश्यकता है। बेहतर तो यह है कि एक बेकार ट्यूबवेल को रिचार्ज कुंआ के रूप में प्रयोग किया जाए।

50 मी, तक के उथले एक्वाफर के लिए रिचार्ज कुंआ सस्ता पड़ता है, क्योंकि इसमें प्रवाह पुनर्भरण गुरुत्व के कारण होता है। ये कुएं दो प्रकार के हो सकते हैं। एक सूखा और दूसरा गीला। शुष्क कुओं की तली जलस्तर के ऊपर होती है।

न्यूज-

इलाहाबाद । राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना सिर्फ कामगारों के लिए वरदान साबित नहीं हो रही है बल्कि प्रदेश सरकार इस योजना से फायदा लेने की सोच रही है जिसके तहत सभी जिलों में भू जलस्तर बढ़ाने के लिए अब तालाबों में 'रीचार्ज वेल' खोदने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा तालाबों की साज सज्जा पर भी विशेष जोर दिया गया है। शासन द्वारा सभी तालाबों में एक पक्का घाट तथा बोर्ड लगाने के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

तालाबों में रीचार्ज वेल खोदने के पीछे शासन की मंशा है कि इससे जहां एक ओर कामगारों को और अधिक दिनों तक काम मिलेगा तो वहीं दूसरी ओर तेजी से गिर रहे भू जलस्तर को कन्ट्रोल में किया जा सकेगा। बारिश के दौरान तालाबों में पानी भर जाएगा और इस तरह से खोदे गए रीचार्ज वेल के सहारे पानी अधिक मात्रा में सोखेगा। इससे काफी हद तक वॉटर लेवल में बढ़ोतरी होगी। उल्लेखनीय है कि गर्मी के दिनों में प्रदेश के कई जनपदों में पानी के लिए हाहाकार मचता है जबकि भू जलस्तर में हो रही कमी को देखते हुए इलाहाबाद के चार (जसरा, शंकरगढ़, मेजा, मांडा) समेत अस्सी ब्लाकों को डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। मुख्य विकास अधिकारी लोकेश एम का कहना है कि रीचार्ज वेल तालाब के ठीक बीचोंबीच खोदा जाएगा। इससे वॉटर रीचार्जिग को बढ़ावा मिलेगा। तालाबों के रख रखाव पर भी जोर दिया जाएगा। खासकर जल निकासी के लिए नाली बनायी जाएगी जिससे बारिश के दिनों में तालाब का शेप बिगड़ने की संभावना को खत्म किया जा सके।
 

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