नदी का गीत .. ब्रह्मपुत्र के साथ साथ

Submitted by admin on Fri, 09/05/2008 - 10:28

ब्रह्मपुत्रब्रह्मपुत्रप्रत्यक्षा/ईटानगर/अरुणाचल प्रदेश: जैसे संगीत के नोटेशन वैसे ही नदी का गीत। सुर में बहता लचकता गाता। धरती के बदन पर धड़कता जीता, शिराओं में दौड़ता खींचता जीवन। किसी आदिम समय से पुरखों के जीवन को पोसता देखता जीना मरना बीतना, सब का बीतना। सिर्फ नदी का न बीतना। तब से अब तक .. न बीतना, बस होना, बहना, रहना। आसपास की धरती बदली। पहाड़ पेड़ हरियाली जीवन। सबके सब बदले। तट पर छूती पछाड़ती लहर वही रही। उतनी ही शीतल उतनी ही उष्म। धरती पर किसने लिखी सुर की कहानी उसने रचा ऋचाओं का गीत। उसने ही बनाये नदी के सूत्र और देखा फिर तृप्त ऊपर से, पढ़ा नदी के लचक में, उसके मोड़ और उतार चढ़ाव में उस रचना के गुप्त संकेत। बादल के पार से जब रौशनी पड़ती है तब पढ़ सकते हो लहरों पर गीत नदी का, गा सकते हो गीत नदी का और सबके ऊपर ..आँखें मून्दे सुन सकते हो गीत नदी का।ब्रह्मपुत्रब्रह्मपुत्र










ब्रह्मपुत्रब्रह्मपुत्र




ब्रह्मपुत्रब्रह्मपुत्र






ब्रह्मपुत्रब्रह्मपुत्रSong of the river .. Along with the Brahmaputra宋河..随着布拉马普特拉河Le chant de la rivière .. Avec le BrahmapoutreSong des Flusses .. Zusammen mit dem Brahmaputra

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