पानी है..पनाह चाहिए

Submitted by admin on Fri, 12/12/2008 - 07:25

ठौर ठिकानाठौर ठिकानाभास्कर न्यूज/इंदौर। तालाबों के गहरीकरण के लिए यह समय मुनासिब है, यदि समय रहते इनकी गाद निकालकर ढांचे में जरूरी बदलाव कर दिए जाए तो शहर से पानी की किल्लत हमेशा के लिए दूर हो सकती है। शहर में चार प्रमुख तालाब हैं, जिनमें से केवल यशवंत सागर ही पानी की 15 फीसदी जरूरत पूरी करता है।

नर्मदा का जल 65 फीसदी घरों तक पहुंच रहा है परंतु दो दिनों में एक बार। शेष 30 फीसदी लोग भूजल पर निर्भर हैं। जलापूर्ति के ये पारंपरिक स्रोत आज अपनी जलग्रहण क्षमता का एक चौथाई जल भी सहेज नहीं पा रहे हैं। इनके 70 से 80 फीसदी क्षेत्र में गाद जमा हो चुकी है।

निगम द्वारा समय-समय पर इनके गहरीकरण के प्रयास भी किए गए, लेकिन सही प्लानिंग और तालाब से निकली मिट्टी का पुन: इस्तेमाल नहीं किए जाने के कारण कामयाब नहीं हो पाए। इंडियन वाटर वर्क एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष टी.ए. सिहोरवाला कहते हैं तालाबों के इस्तेमाल और इनके गहरीकरण के लिए जनमत बनाना बहुत जरूरी है। हमें किसानों को बताना होगा कि तालाबों से निकलने वाली मिट्टी उनके लिए कितनी फायदेमंद है। तभी वे इसे तालाबों से अपने खेतों तक पहुंचाएंगे।

तालाबों को उनके मूल स्वरूप में लाने के लिए ही हमें काफी प्रयास करने होंगे। यह तभी संभव है जब इनसे निकाली गई मिट्टी तुरंत ही दूर भेजी जाए, वरना जो सालों से होता आया है वही होगा। धरमटेकरी पर बना यशवंत सागर का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट उस समय ही 8 एमजीडी प्रतिदिन क्षमता का बनाया गया था, लेकिन आज तक इसका उस स्तर तक उपयोग नहीं हो पाया है। इसके साथ ही तालाब की क्षमता को बढ़ाते समय हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उसका सिविल इंजीनियरिंग ढांचा कितना मजबूत है और उसमें क्या-क्या बदलाव किए जाने चाहिए।

 

 

फ्लोटिंग पॉपुलेशन का रिकॉर्ड ही नहीं


श्री सिहोरवाला कहते हैं निगम ने जनसंख्या के अनुसार पानी की व्यवस्था करने की तैयारी तो कर ली, लेकिन पानी के बजट में काम के लिए शहर में आने वाली फ्लोटिंग पॉपुलेशन के लिए कोई जगह नहीं रखी। निगम के सारे प्लान और प्रयास सिर्फ कागजों पर ही सफल दिख रहे हैं। इस समय कमी पानी की नहीं बल्कि पानी के मैनेजमेंट की है।

 

9 एमजीडी पानी देगा यशवंत सागर


एक्जिक्यूटिव इंजीनियर दीपक रत्नावत कहते हैं नर्मदा लाइन आने से यशवंत सागर पर डिपेंडेंसी कम हुई और धीरे-धीरे उसमें गाद जमने लगी। पानी की समस्या को देखते हुए इसकी कैपेसिटी ३ एमजीडी पानी प्रतिदिन से बढ़ाकर ९ एमजीडी तक लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा तो शहर के २ लाख लोगों को अगले साल यशवंत सागर से पानी मिलने लगेगा। ३0 करोड के इस प्रोजेक्ट से शहर में पानी की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। कैपेसिटी बढ़ाने के बाद इसे संवारने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।

 

कम वर्षा होने पर भी मिलेगा पानी


नगर निगम के असिस्टेंट इंजीनियर राकेश सराफ कहते हैं यशवंत सागर पर चल रहे प्रोजेक्ट के कम्प्लीट हो जाने के बाद यदि किसी साल वर्षा बहुत कम हुई तो भी पूरे साल यशवंत सागर से पानी की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी।

 

गाद निकालने के लिए लगेंगे गेट


हमने तालाबों की गाद साफ करवाने के लिए कई कार्य किए हैं, लेकिन वहां से निकलने वाली मिट्टी का सही उपयोग न होने से वह फिर से तालाबों में मिल जाती है ऐसी स्थिति में तालाब का जल नर्मदा जल की सप्लाई से भी महंगा हो जाता है। किसानों से भी हमने मिट्टी ले जाने के लिए आग्रह किया था, परंतु उनकी बेरुखी से भी निकाली गई मिट्टी वहीं पड़ी रह गई। अब हम सायफन की तरह ही डेम के नीचे गेट बना रहे हैं, जिनके खुलने से सारी गाद बहकर बाहर हो जाएगी। यही इसका प्रैक्टिकल हल है।-उमाशशि शर्मा, महापौर, इंदौर

साभार - भास्कर - पानी है..पनाह चाहिए

 

 

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