बाड़मेर शहर के ऎतिहासिक सोन तालाब पर परिचर्चा

Submitted by admin on Sat, 08/22/2009 - 20:42
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सोन का संरक्षण हमारा दायित्व


बाडमेर शहर के ऎतिहासिक सोन तालाब के वर्तमान हालात व भविष्य के विषय पर शनिवार को राजस्थान पत्रिका कार्यालय में परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में सोन तालाब के आस-पास रहने वाले लोगों व पालिकाध्यक्ष बलराम प्रजापत को आमंत्रित किया गया। परिचर्चा में शामिल नागरिकों ने राजस्थान पत्रिका के सामाजिक सरोकारों को लेकर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

सबका दायित्व

सोन तालाब हमारी ऎतिहासिक धरोहर है, इसे बचाना हम सबका दायित्व है। चूंकि सोन तालाब का तल टूटा है, इसलिए जसदेर तालाब अथवा किसी अन्य स्थान से मिट्टी लाकर तालाब के तल को दुरूस्त किया जाए ताकि पानी का ठहराव हो सके। इस तालाब को पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है क्योंकि चौतरफा पहाडियों से घिरा यह स्थान बेहद सुंदर है। तात्कालिक उपाय के तहत नगरपालिका व जिला प्रशासन को जे सी बी व ट्रेक्टर भिजवाकर सोन तालाब से मलबा हटाना चाहिए। -विजय शर्मा

यथास्थिति में हो सौंदर्यकरण
सोन तालाब को मैं पैंतीस वर्ष से देख रहा हूं। इस अवघि में तालाब की एक बार भी सफाई नहीं हुई। तालाब में कम से कम आठ फीट तक कचरा व रेत जम चुके हंै। तालाब में जब पानी आता है तो तल टूटा हुआ होने के कारण चौबीस घण्टे में दो इंच पानी घट जाता है। सोन तालाब के चारों ओर किसने क्या किया, इस विषय पर जाने की बजाय यथा स्थिति में सौंदर्यकरण कर दिया जाना चाहिए। इसके लिए आम जनता को तालाब के प्रति आस्था के भाव से आगे आना होगा। जनता यदि जागरूक हो जाएगी तो अतिक्रमण की कोई गुंजाइश ही नहीं रहेगी। तालाब के दक्षिण में एक पार्क विकसित करने का प्रयास हुआ, जिसे पूरा करना होगा। सोन तालाब को बचाने सम्पूर्ण समाज को आगे आकर एक मिसाल पेश करनी होगी। -कैलाश कोटडिया

 

सबको आगे आना होगा


आज से करीब चालीस पैंतालीस वर्ष सोन तालाब के आस-पास हरा-भरा वन क्षेत्र था, जो धीरे-धीरे समाप्त हो गया। तालाब के कैचमेण्ट एरिया में अलग-अलग स्थानों पर पानी का भराव होता था, जो रिस-रिस कर तालाब में पहुंचता था। तालाब के पूरा जाने के बाद पानी के उपयोग के अनुपात में तालाब मे पानी की आवक रहती, जिससे तालाब में वर्ष पर्यन्त पानी रहता। घर-घर नल आने के बाद पिछले कुछ वर्षो से तालाब में गंदगी बढ गई। यहां तक कि तालाब के पुनरूद्धार के लिए हुए कार्यो के बाद मलबा तालाब में ही छोड दिया गया।

आज पानी की कमी के साथ सभी को तालाब की जरूरत महसूस हो रही है। अभी भी देर नहीं हुई है, तालाब से गंदगी हटाकर खुदाई की जाए और पिट लाइनर की बजाय कहीं से मिट्टी लाकर तालाब के तल में बिछाई जाए। इसके लिए जनजागरण होना चाहिए। -संजय रामावत, इंजीनियर

 

कोई धणी धोरी नहीं


शहर के सबसे पुराने इस तालाब का स्वरूप बिगड गया है। पंद्रह वर्ष पहले तक इस तालाब में कोई स्नान भी नहीं करता था। नगरपालिका के गार्ड तैनात रहते थे, लेकिन अब तो कोई धणी धोरी नहीं है। तालाब को उसके मूल स्वरूप में लाया जाए।-दुर्गाशंकर शर्मा

 

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