भारतीय संविधान में जल की स्थिति

Submitted by admin on Thu, 09/11/2008 - 11:45

भारत राज्यों का संघ है। राज्य और केन्द्र के बीच दायित्वों के आबंटन के सम्बन्ध में संवैधानिक प्रावधान तीन श्रेणियों में आते हैं: संघ सूची (सूची-I), राज्य सूची (सूची-II) तथा समवर्ती सूची (सूची-III)। संविधान के अनुच्छेद 246 का सम्बन्ध संसद और राज्यों के विधानमण्डलों द्वारा बनाई जाने वाली विधियों की विषय-वस्तु के साथ है। क्योंकि देश में अधिकांश नदियां अन्तर्राज्यीय हैं, इन नदियों के पानी का विनियमन और विकास अन्तर्राज्यीय मतभेदों और विवादों का कारण है। संविधान में जल सूची-II अर्थात राज्य सूची की प्रविष्टि 17 में शामिल है। यह प्रविष्टि सूची-I अर्थात संघ सूची की प्रविष्टि 56 के प्रावधान के अध्यधीन है। इस सम्बन्ध में विशिष्ट प्रावधान निम्नानुसार हैः

अनुच्छेद 246

(1) खंड (2) और खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी , संसद का सातवीं अनुसूची की सूची 1 में (जिसे इस संविधान में “संघ सूची” कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के सम्बन्ध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति है।

(2) खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी , संसद को और खंड (1) के अधीन रहते हुए, किसी राज्य के विधान-मंडल को भी, सातवीं अनुसूची की सूची III में (जिसे इस संविधान में “समवर्ती सूची” कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के सम्बन्ध में विधि बनाने की शक्ति है।

(3) खंड (1) और खंड (2) के अधीन रहते हुए, किसी राज्य के विधान-मंडल को सातवीं अनुसूची की सूची II में (जिसे इस संविधान में “राज्य सूची” कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के सम्बन्ध में उस राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की अनन्य शक्ति है।

(4) संसद को भारत के राज्यक्षेत्र के ऐसे भाग के लिए जो किसी राज्य के अंतर्गत नहीं है, किसी भी विषय के सम्बन्ध में विधि बनाने की शक्ति है, चाहे वह विषय राज्य सूची में प्रगणित विषय ही क्यों न हो।

सातवीं अनुसूची की सूची I की प्रविष्टि 56

सातवीं अनुसूची की सूची I की प्रविष्टि में यह प्रावधान है कि उस सीमा तक अंतरराज्यिक नदियों और नदी-घाटियों का विनियमन और विकास, जिस तक संघ के नियंत्रण के अधीन ऐसे विनियमन और विकास को संसद विधि द्वारा, लोकहित में समीचीन घोषित करें।

सातवीं अनुसूची की सूची I I

सातवीं अनुसूची की सूची II के अधीन प्रविष्टि 17 में यह प्रावधान है कि ‘सूची I की प्रविष्टि 56 के अधीन रहते हुए जल अर्थात जल प्रदाय, सिंचाई और नहरें, जल निकास और तटबन्ध, जल भंडारकरण और जलशक्ति।

इस प्रकार केन्द्रीय सरकार को सातवीं अनुसूची की सूची I की प्रविष्टि 56 के अधीन केन्द्रीय सरकार को उस सीमा तक अन्तरराज्यिक नदियों का विनियमन और विकास करने की शक्ति प्राप्त है जिस तक संसद, विधि द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित करे।

साथ ही उसे संविधान के अनुच्छेद 262 के अधीन अन्तर्राज्यीय नदी अथवा नदी घाटी से सम्बन्धित किसी विवाद के अधिनिर्णय के लिए विधियां बनाने की शक्ति भी प्राप्त है।
 

Disqus Comment