भास्कर समूह की अपील

Submitted by admin on Thu, 03/05/2009 - 14:14

महासंकल्प का प्रारंभ


भास्कर
जल सत्याग्रह’ के अपने आंदोलन में भास्कर समूह अब एक नया रंगों का संकल्प जोड़ रहा है। होली इस बार न तो रंग से खेली जाएगी और न ही सूखी - बल्कि इस बार से मनेगी सिर्फ ‘तिलक होली’।

आप अगर सूखी होली भी खेलते हैं तो भी आपको स्नान में अधिक पानी तो खर्च करना ही होता है। इससे होली के एक ही दिन में पूरी आबादी का दो से चार दिन तक का पानी खर्च हो जाता है। जरा सोचिए कि होली का त्यौहार क्या सिर्फ रंगों में रंगने या गुलाल उड़ाकर सूखी होली खेलने का है या फिर यह मिलन का पर्व है। तालाब और कुएं-बावड़ी सूख रहे हैं। आने वाले दिनों में पानी के अभाव में समाज क्या कष्ट झेलेगा इसका अंदाजा हम सभी को है। आज तो पानी की एक बूंद की बर्बादी भी समाज के प्रति अपराध है।

देश के अधिकांश हिस्से पेयजल संकट से गुजर रहे हैं। पिछले साल कई राज्यों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण नदियां, तालाब, झीलें, कुएं-बावड़ियां या तो सूख गए हैं या सूख रहे हैं। भूजल स्तर इतना नीचे पहुंचता जा रहा है कि हैंडपंपों के जरिए पानी मिलना दूभर हो जाएगा। जल संकट की गंभीरता का अंदाज इसी हकीकत से लगाया जा सकता है कि कई शहरों में पानी की आपूर्ति या तो एक-एक दिन छोड़कर या फिर सप्ताह में एक बार या दो बार हो रही है। गांवों में तो संकट और भी बड़ा है। मवेशियों के लिए पानी के स्रोत दुर्लभ होते जा रहे हैं। महिलाओं को भी पानी की तलाश में लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ रहा है।

भास्कर समूह आज से तिलक होली के महासंकल्प की शुरुआत कर रहा है। अगले 11 दिनों तक हम देश के 10 प्रदेशों में फैले हुए अपने नेटवर्क के जरिए विज्ञापनों, खबरों, होर्डिग्स, पोस्टर, पैम्फलेट, रेडियो आदि के माध्यम से अपने करोड़ों पाठकों, उनके मित्रों, सहयोगियों और शुभचिंतकों तक यह संदेश पहुचाएंगे कि इस बार वे स्वयं भी निश्चय करें और अन्य सभी को प्रेरित-मजबूर करें कि वे रंग की या सूखी होली नहीं बल्कि सिर्फ तिलक होली खेलें।इस तरह से आप अपने शहर और समाज के लिए पानी की जो बचत करेंगे वह आनेवाली पीढ़ियों के लिए बड़ा योगदान होगा। सबसे महत्वपूर्ण है कि आप एक ऐसी नई परंपरा को जन्म देंगे जो स्वयं के और समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण बनेगी। तिलक होली के लिए आपके संकल्प की अभिव्यक्ति एक राष्ट्रीय आंदोलन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

शुभकामनाओं के साथ,
रमेशचंद्र अग्रवाल
 

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