मेवात के गांवों का पानी हुआ जहरीला

Submitted by admin on Fri, 07/10/2009 - 17:18
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Source
भास्कर न्यूज June 22, 2009
नूंह. मेवात के लोगों की प्यास बुझाने और उन्हें शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के सभी सरकारी प्रयास बेमानी साबित हो रहे हैं। सरकारी आंकड़े ही इस बात के गवाह हैं कि भीषण जल संकट से जूझ रहे मेवात को इससे निजात मिलने की संभावनाएं दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। आलम यह है कि मेवात के पांच खंडों के 423 गांवों में से सिर्फ 57 गांव ही ऐसे हैं, जहां अच्छी गुणवत्ता का पीने योग्य भू-जल उपलब्ध है।

104 गांवों का पानी खारा हो चुका है और 31 गांवों के भू-जल में फलोराइड की मात्रा ज्यादा है, जबकि 52 गांव ऐसे हैं जहां का पानी खारा और अत्यन्त फ्लोराइडयुक्त है। जल आपूर्ति एवं स्वच्छता एवं विभाग के आंकड़ों के अनुसार नूंह विकास खंड में कुल 109 गांव हैं, जिसमें से 19 गांव का पानी ठीक है, जबकि 51 का पानी खारा व तीन गांवों में फ्लोराइड की मात्रा काफी अधिक है।

सात गांव में के भू-जल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के साथ ही अत्यन्त खारा है। नगीना ब्लॉक में सिर्फ दो गांव ही हैं, जहां अच्छी गुणवत्ता वाला पानी उपलब्ध है। शेष बीस गांवों का भू-जल खारा है और चार में फ्लोराइड की मात्रा काफी अधिक व 27 गांवों में अति खारा और अत्यन्त फ्लोराइडयुक्त पानी है। फिरोजुपर झिरका ब्लाक के 81 गांवों में से 13 में पीने योग्य पानी, 15 में अत्यंत खारा, 12 में अत्यधिक फ्लोराइडयुक्त, व तीन गांवों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के साथ ही अत्यंत खारा भी है।

पुन्हाना विकास खंड के 84 गावों में से तीन में पानी ठीक, 26 में अत्यंत खरा और 11 में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। इसी तरह तावड़ू खंड के 82 में से 20 गांवों में भू-जल अच्छी क्वालिटी का, दो में अति खारा, एक में अत्यधिक फ्लोराइडयुक्त तथा पांच गांवों के भू-जल में फ्लोराइड के अलावा खारापन भी है।

मेवात के पांच खंडों के शेष गांवों में भू-जल मार्जिनल क्वालिटी का है। इस बाबत जब उपायुक्त महताब सिंह सहरावत बात की गई तो उन्होंने कहा कि सरकार ने पेयजल संकट दूर करने के लिए 205 करोड़ रुपए वाली रैनीवेल परियोजना सहित करोड़ों रुपए की कई अन्य योजनाएं चला रखी हैं। 31 अगस्त तक लोगों तक रैनिवेल परियोजना का पानी पहुंचा दिया जाएगा।

फ्लोराइडयुक्त पानी के नुकसान

टीडीएस की मात्रा अधिक होने से गुर्दे की पत्थरी का रोग के आसार।
हड्डियां कमजोर होने के साथ ही चर्म रोग होने की संभावना।
धीमे जहर का काम करता है जो शरीर के सभी अंगों पर प्रभाव डालता है।

फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से न केवल दांत खराब होते हैं, बल्कि हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं। शायद यही कारण है कि मेवात के छोटे बड़े से लेकर बूढ़ों तक के दांतों में कई प्रकार की बीमारियां घर कर जाती हैं। - डॉ. जी कुमार, सिविल सर्जन, मेवात

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