वाटर डाटा टू लाइफ़

Submitted by admin on Sat, 06/27/2009 - 13:21
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circleofblue.org
गूगल की नई क्रांतिकारी पेशकश
आज जबकि हम 21 वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं, हर बात टेक्नोलॉजी से संचालित और प्रभावित हो रही है, सभी देश, कम्पनियाँ, लोग आपस में तकनीक की मदद से जुड़े हुए हैं, ऐसी स्थिति में भी धरती की सबसे महत्वपूर्ण वस्तु जीवनदायी “जल” जो कि इस धरा पर यत्र-तत्र बिखरा पड़ा है, के बारे में कोई ठोस, एकत्रित और संगठित जानकारी किसी भी जगह उपलब्ध नहीं है। जो भी जानकारी या आँकड़े हैं वे बिखरे-बिखरे और आधे-अधूरे से हैं। इस स्थिति को देखते हुए विश्व के सबसे बड़े सर्च इंजन “गूगल” ने अपनी कई सेवाओं के साथ ही गत सप्ताह “फ़्यूजन टेबल” नामक वेबसाइट/सॉफ़्टवेयर शुरु की। यह वेबसाइट शोधकर्ताओं हेतु एक ऑनलाइन वरदान साबित होगा ऐसा गूगल का कहना है। “फ़्यूजन टेबल” की मदद से विश्व के तमाम डिजिटल साइंस तथा तकनीकी पुरालेख एक ही जगह एक क्लिक पर उपलब्ध होंगे। इस प्रयास से विश्व के सभी महत्वपूर्ण डाटा एक जगह एकत्रित तो होंगे ही, जल एवं पर्यावरण सम्बन्धी शोधकर्ताओं को अपने काम में आसानी होगी।

विश्व में तेजी से फ़ैल रही ‘स्वच्छ पेयजल की समस्या’ को देखते हुए गूगल के इंजीनियरों ने फ़्यूजन टेबल्स का निर्माण और विकास किया है। इस हेतु शोध आलेख एवं अन्य डाटा “पैसिफ़िक इंस्टीट्यूट” तथा “सर्कल ऑफ़ ब्ल्यू” द्वारा मुहैया करवाया जा रहा है, ताकि विभिन्न तथ्य, आँकड़े, रुझान, आदि सम्बन्धी डाटा, चार्ट, ग्राफ़ आदि सभी कुछ एक ही जगह पर उपलब्ध हो सके।

गूगल की यह नई तकनीक उपयोगकर्ताओं को महत्वपूर्ण डाटा आपस में बाँटने, उसे विभिन्न तरीकों से जाँचने, कई सूचनाओं के आदान-प्रदान, उन सूचनाओं को एकत्रित करने और कठिन आँकड़ों को आसान ग्राफ़िकल तरीके से पेश करने, आदि में मदद करेगा। इस महती योजना का उद्देश्य मुख्यतः यही है कि विश्व के सभी शोधकर्ता आपस में जुड़ें, साथ मिलकर विश्व की सबसे गम्भीर समस्या “पानी”, पर विचार-विमर्श करें, मंथन करें ताकि पीने के स्वच्छ पानी की इस विकराल समस्या से निपटा जा सके। इस वेबसाइट/सॉफ़्टवेयर पर वे पानी से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बातें बता सकते हैं, समस्याओं के हल हेतु सुझाव दे सकते हैं, और ऐसे कई मुद्दे जो अब तक अनछुए रह गये हों उन्हें आपस में शेयर कर सकते हैं, ताकि सभी को लाभ पहुँचे।

गूगल फ़्यूजन टेबल बनाने वाली टीम के एक प्रमुख इंजीनियर एलन हालेवी कहते हैं, “सबसे बड़ी सम्भावना और अवसर, इंटरनेट पर प्रकृति से सम्बन्धित इस प्रकार का डाटा बैंक बनाना है…”। वे आगे कहते हैं कि, “यह इस प्रकार से आसान होना चाहिये कि आम व्यक्ति भी इस साइट पर अपना डाटा अपलोड कर सके, उसे दूसरे डाटा के साथ मिलाकर तुलना कर सके, विस्तार से उसकी विवेचना कर सके, ग्राफ़िकल प्रस्तुतीकरण बना सके, विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा-मदद ले सके, और इस डाटा का उपयोग ज्ञान को आगे बढ़ाने में कर सके…”

गूगल की सामान्य स्प्रेडशीट जो कि छोटे और कम गणना वाले डाटा को ही एकत्रित कर पाती हैं, के मुकाबले “फ़्यूज़न टेबल” भारी-भरकम डाटा को अपलोड करने की सुविधा देगा, अथाह सूचनाओं को एकत्रित करने, उन्हें छाँटने-बीनने तथा उसके अनुसार डाटा के सेट बनाने, उन्हें CSV फ़ाइलों में सेव करने और इस पर आधारित ग्राफ़िकल प्रस्तुतीकरण बनाने आदि की सुविधा देगा। अब से पहले इतने परिमाण और इतने बड़े स्तर पर विभिन्न फ़ाइल फ़ॉर्मेटों में आपस में जानकारी का आदान-प्रदान असम्भव माना जाता था, लेकिन अब गूगल की मदद से विश्व भर में बैठे तमाम जल-सहयोगी आपस में जुड़ सकेंगे।

परम्परागत डाटाबेस से आगे जाकर, फ़्यूजन टेबल एक ऐसा अति-उपयोगी टूल है जो शोध और संचार की दुनिया में एक नये युग का सूत्रपात करेगा, क्योंकि यह उपयोगकर्ता को बहुत ही कम समय में दूसरे शोधकर्ताओं और उपयोगकर्ताओं को महत्वपूर्ण आँकड़े उनके कार्यस्थल पर ही उपलब्ध करवाता है। एक से अधिक उपयोगकर्ता एक ही समय एक साथ अपने विषय पर डाटा को क्रास-चेक कर सकते हैं, शोधकर्ता आँकड़ों के विभिन्न कालम और लाइनों पर सिर्फ़ एक क्लिक करके आसानी से आपस में विषय पर बातें कर सकते हैं। उपयोगकर्ता अपने डाटा को नक्शे, ग्राफ़ आदि के द्वारा आकर्षक बनाकर प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तरह से “फ़्यूजन टेबल” विश्व के अनेक देशों के डाटा के एक केन्द्रीय मुख्यालय के तौर पर काम करेगा, जहाँ कोई भी अपना डाटा दूसरे से शेयर कर सकेगा, फ़ाइलों को देख सकेगा और प्रकाशित कर सकेगा, वह डाटा जो अब तक विभिन्न एक्सेल शीट्स, PDF फ़ाइलों और मोटी-मोटी किताबों में कैद था। “पानी से सम्बन्धित डाटा को आपस में जोड़ना हमारी मुख्य प्रेरणा है…” एलन हालेवी

सर्कल ऑफ़ ब्लू तथा पैसिफ़िक इंस्टीट्यूट ने गूगल के साथ मिलकर इस फ़्यूजन टेबल की डिजाइन और विकास में मदद की है। नतीजे में वैज्ञानिकों और पत्रकारों को मुफ़्त में इंटरनेट पर एक ताकतवर हथियार लगा है, जिसकी मदद से वे इस समस्या पर और गहराई से काम कर सकेंगे। पैसिफ़िक इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष पीटर ग्लीक कहते हैं, “समूचे विश्व में पानी और पेयजल सम्बन्धी बहुत मात्रा में डाटा उपलब्ध है, लेकिन प्रत्येक डाटा सिर्फ़ आँकड़े ही होते हैं, जब तक उन आँकड़ों को हम नवीनता और नई सोच के साथ व्याख्या नहीं करते और उस पर ठोस अमल नहीं करते, तब तक वह सिर्फ़ “आँकड़े” ही रहते हैं…”। उदाहरण के तौर पर, एक बार “सर्कल ऑफ़ ब्लू” के पत्रकारों को डायरिया से होने वाली बच्चों की मौतों को लेकर विश्व भर में नल के पानी की उपलब्धता और उसे उपयोग करने वाली जनता की प्रति व्यक्ति आय क्या होगी, इस बारे में डाटा चाहिये था, “सर्कल ऑफ़ ब्लू” ने पैसिफ़िक इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर फ़्यूजन टेबल की मदद से इंटरनेट पर इस प्रकार का डाटा खोज निकाला। फ़्यूजन टेबल ने एक विस्तृत प्लॉट की मदद से जलजनित बीमारियों से होने वाली मौतों, उनकी आर्थिक स्थिति, उस क्षेत्र में उपलब्ध शुद्ध पेयजल की मात्रा आदि को मिलाकर उनमें क्या परस्पर सम्बन्ध हैं यह दिखा दिया और सिद्ध कर दिया कि जैसे-जैसे देशों में प्रति व्यक्ति आय बढ़ती जाती है, नल के पानी का उपयोग बढ़ता जाता है और डायरिया जैसी बीमारियों से बच्चों की मौतों में कमी आती है।

ऊपर दिये गये फ़्यूजन टेबल के चित्र से स्पष्ट होता है कि जैसे-जैसे नल के पानी की उपयोगिता बढ़ती जाती है, डायरिया से होने वाली मौतों में कमी आती जाती है। चित्र में गहरे हरे रंग से दर्शाये गये देशों में अधिकतर लोगों को नल से पानी उपलब्ध है, जबकि दूसरे चित्र में हरे रंग से प्रदर्शित देशों में डायरिया से होने वाली मौतों की संख्या बहुत अधिक है। दोनों ग्राफ़िकल चित्र एक-दूसरे से एकदम उलट हैं और साफ़तौर से जलजनित बीमारियों और स्वच्छ जल की उपलब्धता के बीच अन्तर्सम्बन्धों को प्रदर्शित करते हैं।

सर्कल ऑफ़ ब्लू के निदेशक कार्ल गैंटर कहते हैं, “इस तरह से “फ़्यूजन टेबल” दुनिया के लोगों, विभिन्न संस्थाओं को एक बड़े पुस्तकालय के रूप में उपलब्ध होता है, जिसके द्वारा वे किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं…, जैसे-जैसे फ़्यूजन टेबल के सदस्यों की संख्या बढ़ेगी और एक विशाल समुदाय निर्मित होगा तथा अनेकानेक डाटा उपलब्ध होंगे, उसके बाद विश्व में स्वच्छ जल के संकट, समस्या के प्रति समझ और उसके हल के लिये तेजी से कदम उठाने के बारे में एक नीति बनाने में मदद मिलेगी…”

जबकि हालेवी कहते हैं, “सर्कल ऑफ़ ब्लू” पानी के मामलों की रिपोर्टिंग करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और हम उम्मीद करते हैं कि हम इस विशाल समस्या की ओर सरकारों के देखने का नज़रिया बदलने, बड़ी मात्रा में सूचनायें एकत्रित करने, ये सूचनाएं सभी को उपलब्ध करवाने तथा इन्हें समस्या से सम्बद्ध करने में अवश्य कामयाब होंगे…”

डाटा क्रांति में शामिल हों


आपके क्षेत्र सम्बन्धी जल-डाटा “सर्कल ऑफ़ ब्लू” को भेजकर आप इनसे जुड़ सकते हैं। आपके आँकड़ों की Excel अथवा CSV फ़ाइल बनाकर data@circleofblue.org को भेजें, ताकि वे इन आँकड़ों को देखकर उनका विश्लेषण कर सकें और अन्य रुझान प्राप्त कर सकें। सर्कल ऑफ़ ब्लू की साईट पर जाकर ऑनलाइन ट्यूटोरियल भी देखा जा सकता है, जिसमें सर्कल ऑफ़ ब्लू के ऑब्रे पार्कर, डाटा अपलोड करने और आँकड़ों की तुलना करने के बारे में आपको बतायेंगे।

Aubrey Parker (Circle of Blue)
Tags- Water Data to life, google, Circle of blue water,

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About the author

Aubrey ParkerAubrey Parkerऑब्रे “सर्किल ऑफ ब्लू” में एक डेटा विश्लेषक है, जो जल संबंधी आंकडों की प्रासंगिकता पर रोशनी डाल रही है। रसायन विज्ञान में कालामाजू कॉलेज से स्नातक BA की डिग्री प्राप्त की है इस समय मिशिगन विश्वविद्यालय में केमिकल इंजीनियरिंग में बीएसई कर रही हैं.

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