वैज्ञानिकों का पैनल करेगा संकट का समाधान

Submitted by admin on Mon, 07/06/2009 - 13:52
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Source
IANS
नई दिल्ली (आईएएनएस). पानी के लिए घंटों कतार में खडी रहने वाली गृहिणियों की दुर्दशा से द्रवित होकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अविलंब इसके समाधान की दिशा में प्रयास करने को कहा है. अदालत ने सरकार से वैज्ञानिकों का एक पैनल बनाने कहा है, जो पेयजल संकट से निपटने के तरीके सुझा सके.

न्यायमूर्ति मारकंडेय काटजू और न्यायमूर्ति एचएल दत्तू की खंडपीठ ने सरकार को दो महीने के भीतर पैनल बनाने और उसे हर प्रकार के तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक मदद मुहैया कराने के आदेश दिए हैं जिससे वह अपना कार्य समय पर पूरा कर सके. खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि पानी के बिना जीवन असंभव है और हमारा संविधान देश के सभी लोगों जीवन के अधिकार की गारंटी लेता है. यह आदेश केंद्र सरकार और उड़ीसा के बीच के जल संबंधी लंबित विवाद का फैसला सुनाते वक्त जारी किया गया है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि वैज्ञानिकों के पैनल की अध्यक्षता विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव करेंगे तथा जल संसाधन मंत्रालय के सचिव सदस्य होंगे. समिति के अध्यक्ष इस काम में दक्ष वैज्ञानिकों को चुनेंगे. समिति के सदस्यों को इस काम को देशभक्ति की भावना के तहत करना चाहिए तथा प्रवासी भारतीयों सहित सभी देशवासी समिति की मदद करना चाहिए. समिति से इस काम को युद्ध स्तर पर करने की अपेक्षा करते हुए अदालत ने इसकी रूपरेखा भी निर्धारित की है.

अदालत सबसे पहले खारे पानी को शुद्ध पानी में बदलने के लिए एक सस्ता और वैज्ञानिक विधि विकसित कराना चाहती है. इस संदर्भ में अदालत का कहना है कि भारत तीन तरफ से समुद्र और महासागरों से घिरा है, खारे पानी की यह अनंत निधि है. हालांकि आर्थिक रूप से बेहतर उपाय नहीं है क्योंकि मौजूदा तकनीक से यह काम काफी कीमती साबित होता है. इसके अलावा अदालत ने समिति को मानसून वर्षा और बाढ़ के पानी का उचित प्रबंधन कर इसे देश के लोगों के लिए उपयोगी बनाने की जिम्मेदारी भी दी है.

अदालत ने कहा कि यह वाकई दुख की बात है कि भारत ऐसे देश में जहां के वैज्ञानिक ने सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान योजनाबद्ध शहरों को बसाया था, दशमलव प्रणाली और प्लास्टिक सर्जरी की खोज थी, जहां के ज्यादातर लोग सिलिकन वैली का प्रबंध कर रहे हैं, वहां जल संकट की समस्या को हल करने के लिए अब तक कोई समाधान नहीं निकला.अदालत ने कहा कि वह वैज्ञानिकों के अनुसंधान कार्य की निगरानी करेगा और जुलाई में इसकी जांच करेगा.

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