शौचालय के पानी से बनी एक कहानी

Submitted by admin on Sat, 10/03/2009 - 10:24
Printer Friendly, PDF & Email

तमिलनाडु में सामुदायिक शौचालय से निःसृत बहुत गंदे (मटियाले) जल का प्रबंधन


सामुदायिक शौचालय से निःसृत मटियाले जल (गांव के गंदे पानी) का उपचार करके उसके पुनर्प्रयोगों की दिशा में एक अनूठा प्रयास निम्न उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया हैः

• शहरी एवं उपशहरी क्षेत्रों में सेप्टिक टैंक टायलेट से जनित जल प्रदूषण-समस्या का एक व्याहारिक समाधान।
• सामुदायिक शौचालय एवं सेप्टिक टैंक से निःसृत मटियाले जल (गांव के गंदे पानी) के द्वारा वायु, जल एवं मृदा के संपर्क दूषण को पर्यावरण के अनुकूलतम ढंग से रोकना।
• स्वास्थ्यकर एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना।
• उपचारित जल का सागसब्जी एवं फल उगाने के लिए उपयोग करना।
• कृषि कार्य हेतु उपचारित जल का पुनर्प्रयोग करना।
• उपलब्ध संसाधन की क्षमता का विकास और उर्जा पर निर्भरता को समाप्त करना।
• प्रकाश एवं ताप के लिए बायोगैस का उपयोग करना।

उपचार के मुख्य सिद्धांतः
• बायोगैस सेटलर में प्रथम अवसादन (जमावट)
• अपस्ट्रीम रिऐक्टरों में वातनिरपेक्ष उपचार
• बनाए गए कंकड़ फिल्टरों में तृतीय वातापेक्षी उपचार।

संक्षिप्त वर्णनः
‘एक्सनोरा इंटरनेशनल चेन्नई’ ने अपनी तिरुचि जिला ईकाई के माध्यम से ‘‘विकेंद्रित अपशिष्ट जल उपचार तंत्र’’ निर्माण का कार्य लिया है, जो छोटी कालोनियों, अपार्टमेंट और झुग्गी झोपड़ी-क्षेत्र के लिए बहुत उपयुक्त है।

विकेंद्रित अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली के प्रचार/ प्रसार हेतु संकाय, बंगलोर के तकनीकी निर्देशन में इस योजना का कार्यान्वयन किया गया। ‘ब्रेमेन ओवरसीज ऐंड डेवेलपमेंट एसोसियेसन (बोर्डा)’ जर्मनी की ओर से इस परियोजना के लिए कुल आठ लाख रू0 का वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।

इस प्रणाली में निम्नलिखित घटक सम्मिलित हैः

• अपशिष्ट जल का स्त्रोत।
• अपशिष्ट जल संग्रहण।
• विकेंद्रित अपशिष्ट जल।
• उपचार प्रणाली।
• पुनर्प्रयोग।

मुख्य विशेषताएं:
• मटियाले जल (गांव के गंदे पानी) का विकेंद्रित उपचार।
• पेड़ पौधों, साग सब्जी उगाने के लिए उपचारित जल का पुनर्प्रयोग।
• भोजन पकाने एवं प्रकाश के लिए बायोगैस का उपयोग।
• इस उपचार पद्धति में बिजली या किसी रसायन का उपयोग नहीं किया जाता है।
• यह पद्धति संचालन एवं अनुरक्षण के लिए बहुत ही सरल है, क्योंकि इसमें संकटदायी या जटिल मशीन नहीं होती है।

विवरणः
• शौचालय के बायोगैस सेटलेर (दिनबंधु मॉडल) के साथ जोड़ दिया गया है।
• मानवमल को बहा ले जाने वाला मटियाला जल शौचालय से बायोगैस सेटलर में ले जाया जाता है।
• सृजित बायोगैस ‘सेटलर’ में ही भंडारित रहता है। अब गैस को गैस-पाइप के माध्यम से चूल्हे तक भोजन पकाने के लिए अथवा प्रकाश के लिए प्रकाश व्यवस्था तक ले जाया जाता है। इसका स्टोव (चूल्हा) एल0 पी0 जी) स्टोव से कुछ भिन्न होता है, परंतु बाजार में सुलभ है।
• इस परियोजना के संचालन एवं अनुरक्षण कार्य तथा ‘महिला स्वंय सहायता समूह’ की सदस्याओं के द्वारा किया जाता है।
• अवमल (गाढ़ा कीचड़) को निकालने का कार्य तथा ‘कंकड़ फिल्टर’ एवं वातनिरपेक्षी ‘बैफल रियेक्टर’ को साफ करने का कार्य 3 साल में एक बार किया जाता है, जो ‘एक्सनोरा’ के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा संपन्न होता है।
• इस परियोजना का कुल व्यय रू0 8 लाख है। प्रतिदिन करीब 4000 लीटर जल का उपचार किया जाता है और कृषि कार्य हेतु उसका पुनर्प्रयोग किया जाता है।
• प्रतिदीन तीन घनमीटर गैस का सृजन होता है।
• विकेंद्रीत अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली (डेवाट्स) में उपचारित जल की गुणवत्ता की जांच नियमित रूप से तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जाती है। इसके अलावे जल गुणवत्ता की जांच तमिलनाडु वाटर ऐंड ड्रेनेज बोर्ड की प्रयोगशालाओं में भी की जाती है।

तिरूचि सिटी कारपोरेशन सामुदायिक शौचालय में विकेंद्रित अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली (डेवाट्स)
• शौचालय तिरूचि सिटी कारपोरेशन कौन्सिल के स्वामित्व में है।
• पूर्व देवाधानम स्लम एरिया में करीब 400 व्यक्ती प्रतिदिन शौचालय का उपयोग करते हैं।
• पुरुषों के लिए दस तथा महिलाओं के लिए दस सीट वाले शौचालय से प्रतिदिन करीब 4000 लीटर मटियाले जल (गांव के गंदे पानी) का सृजन होता है।
• परिसर के भीतर जल की आपूर्ति बोरवेल के द्वारा होती है।
• ‘डेवाट्स’ का ढांचा इस प्रकार बनाया गया है, जिससे 10 घनमीटर जल का उपचार किया जा सके और 3 घनमीटर गैस का सृजन प्रतिदिन हो सके।
• 4 बजे पूर्वाह्न से 11 बजे अपरहान् तक शौचालय खुला रहता है।
• प्रयोग शुल्क-प्रति व्यक्ति प्रतिप्रयोग – 50 पैसे।
• अनुरक्षण-महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्याओं द्वारा। ऐसे सात समूह दो महिलाओं- को देखभाल करने के लिए प्रत्येक सप्ताह में प्रतिदिन पारी के आधार पर भेजते हैं।
• देखभाल करने वाली महिलाओं को प्रत्येक को 40 रू0 का भुगतान किया जाता है।
• मोटर और प्रकाश के लिए बिजली का चार्ज 800 रू0 से 900 रू0 प्रतिमाह स्वयं सहायता समूह द्वारा किया जाता है। स्वयं सहयता समूह की सदस्याओं को वेतन प्रतिमाह 2400 रू0 दिया जाता है। सफाई पाउडर, नल, लाइट आदि की मरम्मत पर करीब 200/- प्रतिमाह खर्च होता है। महीने में 1500/- रू0 का लाभ होता है।

कृषि कार्यः
• कृषि क्षेत्र की व्यवस्था स्वयं सहायता समूह के सदस्यों द्वारा की जाती है। पहली छमाही में साग-सब्जी उगाकर उसकी बिक्री से करीब 5000/- रू0 की आमदनी हुई। वर्तमान में स्वयं सहायता समूह के सदस्यों द्वारा कृषि क्षेत्र में नारियल, केला, अमरूद, अनार, नीम इत्यादि के पेड़ लगाए गए हैं।
• पांच वर्ष के नीचे के बच्चों के लिए उनके अनुरूप शौचालय बनाए गए हैं। इनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
• समुदाय के किसी सदस्य द्वारा गरम करने के लिए या खाना पकाने के लिए बायोगैस का प्रयोग करने पर प्रति प्रयोग 5 से 10 रू0 चार्ज लिया जाता है।
• ‘डेवाट्स’ से उपलब्ध होने वाले बायोगैस का उपयोग कर स्वयं सहायता समूह एक जलपान गृह स्थापित करने की योजना बना रहा है।

प्रभावः
• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण का लाभ मिला है।
• स्वस्थ एवं स्वच्छ वातावरण। हरे-भरे मैदान एवं रंगबिरंगें पौधों से शौचालय परिसर एक पार्क की तरह दिखता है।
• अनुरक्षण के लिए निगम के अधिकारियों पर निर्भरता नहीं रह गयी है।
• सृजित बायोगैस से खाना पकाने, गरम करने और प्रकाश करने के कारण बिजली की बचत हो रही है।

प्रतिकृति बनानाः
संचालन एवं अनुरक्षण कार्य के प्रभारी व्यक्तियों को प्रशिक्षण देकर उनकी क्षमता का विकास किया जाए तो वे आसानी से ‘प्रतिकृति’ (नकल) तैयार कर सकते हैं। अभिकल्पन (ढांचा बनाना) एवं निर्माण कार्य में स्थान एवं समुदाय को ध्यान में रखते हुए अंतर लाया जा सकता है। अस्तु, ‘प्रतिकृति’ तैयार करने के लिए सीडीडी बंगलोर से नया अभिकल्प (ढांचा) प्राप्त किया जाना चाहिए।

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

नया ताजा