समाज के संरक्षक चुप क्यों

Submitted by admin on Wed, 02/04/2009 - 08:26
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अनशन का ग्यारहवां दिनअनशन के उन्नीस दिन पूरे

भागीरथी गंगा के नैसिर्गक स्वरूप की सुरक्षा पर समाज के संरक्षक चुप क्यों


देश के श्रेष्ठत्तम वैज्ञानिक डा. जीडी अग्रवाल विगत 19 दिन से ´भागीरथी गंगा के नैसिर्गक स्वरूप की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आमरण अनसन कर रहे है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अविवेकपूर्ण विकास और विजली परियोजना के नियोजन से भारतीय सस्कृति की हजारों हजार वर्षो की पहचान मॉ गंगा अब समाप्त होने जा रही है।

इस परिस्थिति में सरकार जिस तरह से दुर्लभ विषयवस्तुओं को संरक्षण प्रदान कर संरक्षित करती है उसी प्रकार से भगीरथी और उसका गंगाजल न कि हमारे देश में बल्कि पूरे विश्व में दुर्लभ जल है,और अब यह पूर्ण समाप्त होने जा रहा है इसे संरक्षित करना अतिआवश्यक है।

यदि हम पूरी गंगा का संरक्षण नही कर सकते है तो कम से कम गंगोत्री से उत्तरकाशी तक हमें भगीरथी गंगा को उनके नैसिर्गक स्वरूप में अवश्य संरक्षित करना अनिवार्य है। भगीरथी गंगा के संरक्षण करने के महत्व को समाज के संरक्षक और सरकार दोनों भली प्रकार समझते है परन्तु हमारी लोकतंत्र की सरकार जहॉ जनवल और हिसंक प्रदर्शन विश्वास करने वाली है वह डा. अग्रवाल के ज्ञान, अहिंसात्मक बलिदान पर अभितक पूर्णतया चुप है और उन्नीस दिन के आमरण अनशन के बाद भी किसी भी परिणात्मक स्थिति पर जाने को नही पहुचीं है।

क्या भगीरथी गंगा समाप्त हो जाय और हम देखते रहें तथा उनके संरक्षक दम भरतें रहें कि हम उनकी रक्षा करेंगें आज हमारे साथ रहें। डा. अग्रवाल के आमरण अनशन पर ये दोंनो संस्थायें स्पष्ट करें कि डा अग्रवाल द्वारा लिया गया निर्णय बहुत ही यथोचित और समय की आवश्यकता है, और वे मॉ भगीरथी गंगा के नैसिर्गक स्वरूप के सुरक्षा में किये जा रहे बलिदान के पूर्ण सर्मथन में है। या फिर कहें कि डा. अग्रवाल यथोचित नहीं है और भगीरथी गंगा की संरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है न ही उनका हिन्दू संस्कृति में कोई ऐसा स्थान है जो उन्हें संरक्षण करनें की आवश्यकता है। भगीरथी गंगा में आस्था रखनें वाले प्रबुद्ध जनों का अखिल भारत हिन्दू महासभा भवन नई दिल्ली में डा अग्रवाल से मिलने का क्रम अनवरत जारी है। वे डा. अग्रवाल से पूछते है कि सरकार और हिन्दू समाज के संरक्षक संस्थायें एंव साधु, सन्त क्या कर रहे है। तो डा अग्रवाल बड़े ही सहज रूप से कहतें है कि मुझसे जो बन सकता है में वह कर रह हूं। शेष आप उन्हीं से जानिए कि आपकी सरकार और संस्थायें एवं साधु सन्त क्या कर रहे है।

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