सामुदायिक जलाशयों का विकास

Submitted by admin on Tue, 09/09/2008 - 10:49
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सामुदायिक जलाशयसामुदायिक जलाशयग्रामीण स्तर पर वर्षा के दिनों में सतही-अपवाह को जलाशयों में एकत्र करके सिंचाई, जलापूर्ति, मत्स्य पालन आदि कार्यो में प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे जलाशयों का उन क्षेत्रों में बड़ा उपयोग है जो वर्षा पर आधारित हैं। जल स्रोतों के प्रकार तथा उपलब्धता के आधार पर जलाशयों को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है-

मिट्टी खोदकर बने जलाशयों को निर्धारित स्थान पर बनाया जा सकता है, तथा खोदी गयी मिट्टी को गड्ढे के चारों ओर ठीक प्रकार बिछाकर उसकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
भूमि की सतह पर बने जलाशयों को आंशिक रूप से खोदकर मिट्टी को चारो ओर बॉध बनाकर पानी रोका जा सकता है। ऐसे जलाशयों को उन स्थानों पर बनाना लाभप्रद है जहॉ पहले से ही निचली भूमि अर्थात गड्ढेदार भूमि उपलब्ध है ताकि जलाशय की क्षमता स्वतः ही बढ़ जाए। पर्वतीय क्षेत्रों में जल स्रोतों के बहते पानी को भी पास ही जलाशय बनाकर एकत्र किया जा सकता है।

मौसमी जल धाराओं के किनारे की भूमि पर भी जलाशयों का निर्माण किया जा सकता है।-

जलाशयों की पद्धति के मुख्य भाग हैं- संचय क्षेत्र, मिट्टी-बंध, जल प्रयोग हेतु निकासद्वार, तथा जलाशय की सुरक्षा हेतु जलाशय से अतिरिक्त जल का निकासद्वार।

आवरित जल-नलिकाएं -

सिंचाई के जल को सुरक्षात्मक व पूर्ण रूप से जल श्रोत से खेतों तक ले जाने के लिए नालियों का प्रयोग किया जाता है। इन मिट्टी की नालियों में जल की मात्रा व दूरी से होने वाले जल-रिसाव या टूट-फूट के कारण खेत तक पहुंचते-पहुंचते काफी जल का ह्रास हो जाता है। अतः इन नालियों में आवरण लगाना आवश्यक हो जाता है ताकि जल रिसाव न हो तथा मजबूती भी मिले। निम्नलिखित प्रकार के पदार्थो का उपयोग मुख्यतः आवरण बनाने में किया जाता है -

प्राकृतिक चिकनी मिट्टी (क्ले) की 15-30 से0मी0 मोटी परत नाली के भीतरी भागों पर पूर्णतः लगाना चाहिए ताकि रंध्रो से पानी का रिसाव न हो सके।
नाली में भट्टी द्वारा पकी मिट्टी या टाइल बिछाने से रिसाव रूक जाता है तथा मजबूती भी मिलती है, परन्तु इसमें अधिक व्यय लगता है।
मिट्टी की कीचड़ के साथ तारकोल आदि के मिश्रण का लेप करना।
नाली व जलाशयों में रबड़ या प्लास्टिक पदार्थो को भी प्रयोग करके रिसाव रोकने में काम लाया जाता है। प्लास्टिक की चादर पर मिट्टी का लेप लगाना चाहिये ताकि धूप से चादर नष्ट न हो सके।
ईंट या पत्थरों को नाली में बिछाकर रिसाव रोकने के साथ-साथ मजबूती भी दी जाती है। पूर्व-निर्मित पक्के नाली के टुकड़े भी बाजार में उपलब्ध हैं, जिन्हें खेत में ही जोड़ा जा सकता है।

 

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