सिंचाई की संस्थानगत व्यवस्थाएं

Submitted by admin on Tue, 09/16/2008 - 08:34
केन्द्रीय सरकार पर एक राष्ट्रीय संसाधन के रूप में जल के विकास, संरक्षण और प्रबन्ध के लिए अर्थात जल संसाधन विकास और सिंचाई, बहुद्देश्यीय परियोजनाओं, भूजल अन्वेषण तथा दोहन, कमान क्षेत्र विकास, जल निकास, बाढ़ नियंत्रण, जलग्रस्तता, समुद्र कटाव समस्याओं, बांध सुरक्षा तथा नौसंचालन और जल विद्युत के लिए जल वैज्ञानिक संरचनाओं के सम्बन्ध में राज्यों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के निमित्त सामान्य नीति के लिए केन्द्रीय स्तर पर जल संसाधन मंत्रालय जिम्मेदार है। यह मंत्रालय अन्तर्राज्यीय नदियों के विनियमन और विकास पर भी निगाह रखता है। ये कार्य विभिन्न केन्द्रीय संगठनों द्वारा किए जाते हैं। शहरी जल आपूर्ति तथा जलमल निपटान की देखभाल शहरी विकास मंत्रालय करता है जबकि ग्रामीण जल आपूर्ति ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन पेयजल विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है। जल-विद्युत ऊर्जा और तापीय विद्युत का विषय विद्युत मंत्रालय की जिम्मेदारी है। प्रदूषण और पर्यावरण, पर्यावरण और वन मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।

क्योंकि पानी एक राज्य-विषय है इसलिए इस संसाधन के प्रयोग और नियंत्रण की मौलिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर है। पानी के प्रशासनिक नियंत्रण और विकास की जिम्मेदारी विभन्नि राज्य सरकारों और निगमों के ऊपर है। वृहद और मध्यम सिंचाई की देखभाल सिंचाई/जल संसाधन विभागों द्वारा की जाती है। लघु सिंचाई की देखभाल अंशतः जल संसाधन विभागों, लघु सिंचाई निगमों, जिला परिषदों/पंचायतों तथा कृषि जैसे अन्य विभागों द्वारा की जाती है। शहरी जल आपूर्ति आमतौर पर जन स्वास्थ्य विभागों की जिम्मेदारी है जबकि ग्रामीण जल आपूर्ति पंचायतों का काम है। सरकारी नलकूपों का निर्माण और देखभाल सिंचाई/जल संसाधन विभाग द्वारा अथवा इस प्रयोजन के लिए स्थापित नलकूप निगमों द्वारा की जाती है। जल-विद्युत राज्य विद्युत बोर्डों की जिम्मेदारी है।

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