‘मगध जल जमात संस्था’ द्वारा संगोष्ठी का आयोजन

Submitted by admin on Thu, 08/20/2009 - 12:53
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-शिवगोपाल शर्मा

गया में ‘मगध जल जमात संस्था’ की ओर से पानी की समस्या पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन 7 जुलाई 2009 को वजीरगंज के किसान भवन में हुआ।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक के. एन. गोविन्दाचार्य ने कहा, ”यह दुर्भाग्य है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण हमारे देश में पानी की समस्या पर गोष्ठी करानी पड़ रही है, जहां सबसे ज्यादा पानी बरसता है। देश में सूर्य की कृपा कुछ ऐसी है कि वह यहां के कुएं में भी शुद्ध रूप से बराबर उपलब्ध रहता है। शुद्धता की दृष्टि से नदियों का बहता पानी सूर्य की इन्हीं सतरंगी किरणों से निरंतर शोधित होता रहा है। जबकि इग्लैंड जैसे देशों को यह सौभाग्य प्राप्त नहीं है क्योंकि वर्ष के साढ़े दस माह सूर्य की किरणें वहां अपना प्रकाश नहीं फैला पातीं। इसलिए गैर भारतीय संस्कृति की मूल अवधारणा को समझे-बूझे बिना सरकार द्वारा नदियों को जोड़ने का प्रयास अन्याय होगा और साथ ही साथ नुकसानदेह भी।”

के. एन. गोविन्दाचार्य के भाषण से पूर्व पत्रकार प्रभात कुमार शांडिल्य ने जल से जुड़े मुद्दों पर आधारित प्रस्ताव ‘पानी के लिये काम रोको’ का पूर्ण आलेख पाठ किया।

मध्य प्रदेश से आये ‘लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघु ठाकुर के गोष्ठी के विषय पर विचार थे, ”प्रकृति हमारी हजारों-हजार साल की संस्कृति का एक अंग रही है। लेकिन आज वन पर्यावरण के साथ खिलवाड़ का असर यह है कि बारिश न होने से जल संकट उपस्थित हो गया है। यदि पानी की समस्या को मिटाना है तो पर्यावरण को भी बचाना होगा। इसके अलावा बाढ़-सूखाड़ के नाम पर करोड़ों का वारा-न्यारा होता है। अधिकारी तो इंतजार करते हैं कि कब बाढ़ या सूखाड़ की स्थिति पैदा हो, कब सरकारी सहायता मिले जिसका अधिकांश हिस्सा उचित जगह पहुंचने की बजाए उनकी तिजोरी में पहुंच जाए।”

रांची से प्रकाशित ‘जन ज्वार’ के संपादक त्रिवेणी सिंह ने भी पानी के मुद्दे पर चिंता जताई, ”80 प्रतिशत पेट की बीमारियों के मूल में पानी ही प्रमुख कारण होता है। प्रकृति के साथ अत्यधिक खिलवाड़ और भूगर्भ जल के दोहन-शोषण के फलस्वरूप ही पानी के गुणों में नकारात्मक परिवर्तन आ जाता है। स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पानी की सुरक्षा बहुत जरूरी है। इसलिए जल संचयन करना होगा और भूगर्भ जल भी कम से कम इस्तेमाल करना होगा।

इनके अलावा कई अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने पानी के मुद्दे पर उपस्थित लोगों के बीच अपने विचार प्रस्तुत किये। संगोष्ठी में संकल्प लिया गया कि आगामी 2-12 अक्टूबर तक वजीरगंज से गया तक पानी की समस्या पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यात्रा निकाली जाएगी।
 
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