अलकनंदा

Submitted by Hindi on Thu, 10/28/2010 - 12:36
अलकनंदा गंगा की एक प्रधान शाखा अथवा सहायक है। यह हिमालय से निकलकर संयुक्त प्रांत के गढ़वाल जिले के ऊपरी भाग में बहती हुई टिहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग नामक स्थान पर बाईं ओर से आनेवाली भगीरथी से मिलकर गंगा का निर्माण करती है। अलकनंदा भी भारत की पवित्र नदियों में गिनी जाती है। माउंट कैमेट (२५,४४७ फुट) के पार्श्वद्धय से धौली तथा सरस्वती नदियां आती हैं और गंगोत्तरी केदारनाथ-बदरीनाथ शिखरसमूह (२२,०००-२३,००० फुट) के पूर्वी पार्श्व में उनके मिलने से अलकनंदा नदी बन जाती है। इस शिखरसमूह के पश्चिमी अंचलों से भागीरथी निकलती है और टिहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग नामक स्थान में अलकनंदा के संगम से पुण्यसलिला गंगा का निर्माण होता है। भागीरथीसंगम के पूर्व अलकनंदा नदी में पिंदर, नंदाकिनी एवं मंदाकिनी नदियाँ मिलती हैं और इन संगमों पर क्रमानुसार कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग और रुद्रप्रयाग नामक तीर्थस्थान हैं।

बद्रीनाथ से थोड़ी दूर ऊपर अलकनंदा नदी की चौड़ाई १८ या २० फुट है, पथ उथला एवं धारा तीव्र है। इसके ऊपर नदी का मार्ग हिमपुंजों के भीतर ढंका रहता है। शास्त्रों में उल्लिखित 'अलकापुरी'कुबेर की महानगरीइसके उत्तरांचल में स्थित है। देवप्रयाग में नदी की चौड़ाई १४०-१५० फुट हो जाती है। नदी के पार्श्व में ७,००० फुट की ऊँचाई तक हिमोढ़ (मोरेंस) पाए जाते हैं जब कि आज की हिमनदियाँ १३,००० फुट से नीचे नहीं मिलतीं। अलकनंदा के तट पर श्रीनगर नामक नगर सुशोभित है। (का.ना.सिं.)

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