अश्वगंधा

Submitted by Hindi on Thu, 10/28/2010 - 14:09
अश्वगंधा एक पौधा है जो खानदेश, बरार, पश्चिमीघाट एवं अन्य अनेक स्थानों में मिलता है। हिंदी में इसे साधारणतया असगंध कहते हैं। लैटिन में इसका नाम वाइथनिया सोम्निफ़ेरा है। यह पौधा दो हाथ तक ऊँचा हाता है और विशेषकर वर्षा ऋतु में पैदा होता है, किंतु कई स्थानों पर बारहों मास उगता है। इसकी अनेक शाखाएँ निकलती हैं और घुँघची जैसे लाल रंग के फल बरसात के अंत या जाड़े के प्रारंभ में मिलते हैं। इसकी जड़ लगभग एक फुट लंबी, दृढ, चेपदार और कड़वी होती है। बाजार में गंधी जिसे असगंध या असगंध की जड़ कहकर बेचते हैं, वह इसकी जड़ नहीं, वरन्‌ अन्य वर्ग की लता की जड़ होती है, जिसे लैटिन भाषा में कॉन्वॉल्वुलस असगंधा कहते हैं। यह जड़ जहरीली नहीं होती किंतु अश्वगंध की जड़ जहरीली होती है। अश्वगंधा का पौधा चार पाँच वर्ष जीवित रहता है। इसी की जड़ से असगंध मिलती है, जो बहुत पुष्टिकारक है।

राजनिघंटु के मतानुसार अश्वगंधा चरपरी, गरम, कड़वी, मादक गंधयुक्त, बलकारक, वातनाशक और खाँसी, श्वास, क्षय तथ व्राण को नष्ट करने वाली है इसकी जड़ पौष्टिक, धातुपरिवर्तक और कामोद्दीपक है; क्षयरोग, बुढ़ापे की दुर्बलता तथा गठिया में भी यह लाभदायक है। यह वातनाशक तथा शुक्रवृद्धिकर आयुर्वेदिक औषधियों में प्रमुख है; शुक्रवृद्धिकारक होने के कारण इसको शुक्रला भी कहते हैं।

रासायनिक विश्लेषण से इसमें सोम्निफ़ेरिन और एक क्षारतत्व तथा राल और रंजक पदार्थ पाए गए हैं। इसमें

निद्रा लानेवाले और मूत्र बढ़ानेवाले पदार्थ भी प्रचुर मात्रा में होते हैं।चित्र : अश्वगंधा

उपयोगइसका ताजा तथा सूखा फल औषधि के काम में आता है, किंतु सिंध, पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी सरहदी प्रांत, अफगानिस्तान तथा ब्लूचिस्तान में इसे रेनेट के स्थान पर दूध जमाने के काम में लाते हैं। इसका पाचक द्रव नमक के पानी में जल्दी आ जाता है (१०० भाग पानी में ५ भाग नमक का होना चाहिए)। इस पानी के उपयोग से दही शीघ्र जमता है, जो पेट में पाचक अम्ल के समान लाभ पहुँचाता है। कुछ वैद्यों ने इस वनस्पति की जड़ को प्लेग में उपयोगी पाया है।

वैद्य असगंध से चूर्ण, घृत, पाक इत्यादि बनाते हैं और औषधि के रूप में इसका उपयोग गठिया, क्षय, बंध्यत्व, कटिशूल, नारू नामक कृमि, वातरक्त इत्यादि रोगों में भी करते हैं। इस प्रकार असगंध के अनेक और विविध उपयोग हैं।

सं.ग्रं.चंद्रराज भंडारी : वनौषधि चंद्रोदय; हरिदास वैद्य : चिकित्सा चंद्रोदय (हरिदास ऐंड कंपनी, कलकत्ता)। (भ.दा.व.)

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