बाढ़ के समय के साथ समायोजन

Submitted by Hindi on Sat, 09/15/2012 - 15:55
Author
डॉ. दिनेश कुमार मिश्र
Source
डॉ. दिनेश कुमार मिश्र की पुस्तक 'दुइ पाटन के बीच में'
हमारे देश में वर्षा के साथ यह खूबी है कि उसका समय प्रायः निश्चित है और बाढ़ की गणना भी उसी दौरान की जाती है। ऐसे समय में ही हम अपने स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थाओं के वार्षिक छुट्टी की योजना बना सकते हैं क्या? मेडिकल तथा वेटनरी कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को ऐसे समय में बाढ़ के इलाकों में सेवा के लिए उतारा जा सकता है क्या? इसके लिए उन्हें कुछ अंक भी दिये जा सकते हैं। असम में पिछले समय में ऐसा किया जाता रहा है और वहाँ के बाढ़ पीड़ित आमतौर पर मेडिकल सहायता न मिलने की शिकायतें नहीं करते। विपरीत परिस्थितियों में यह छात्र-छात्राएँ लोगों की मदद का काम बड़ी गर्मजोशी से करते हैं और उनकी मौजूदगी का फायदा उठाया जाना चाहिये।

वह इलाके जहाँ बाढ़ का पानी ज्यादा समय तक रहता है वहाँ नौका चालित घुमन्तू डाकघर, दवाखाना और बैंक आदि की सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जा सकती हैं। हाल के वर्षों तक सुन्दरबन में यूनाइटेड बैंक की नौका शाखाएं चलती थीं जो कि ज्वार-भाटे को ध्यान में रख कर विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएँ प्रदान करती थीं।

उपेक्षित पशुधन


बाढ़ों से निपटने की जब भी योजनाएँ बनती हैं तो पशु अक्सर छूट जाया करते हैं। उनके लिए चारा और औषधियाँ बहुत ही महत्वपूर्ण सामग्री हैं जो कि उपलब्ध रहनी चाहिये। बाढ़ वाले क्षेत्रों में जानवरों को लम्बे समय तक पानी के सम्पर्क में रहना पड़ जाया करता है और चारे के अभाव में वह जलकुम्भी जैसी अखाद्य वस्तुओं को खाने पर मजबूर होते हैं।

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