बाह्यग्रह में जल

Submitted by admin on Fri, 09/17/2010 - 09:45
अमेरिकी खगोलवैज्ञानिकों के एक दल ने केवल 40 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक लाल-वामन तारे की परिक्रमा करते हुए पृथ्वी जैसे ग्रह की खोज की है जिस पर जल के महासागरों की संभावना है। यह ग्रह, जिसे ‘जीजे1214बी’ (GJ1214b) नाम दिया गया है, पृथ्वी से मात्र लगभग 2.7 गुना बड़ा और लगभग 6.5 गुना भारी है।अमेरिकी खगोलवैज्ञानिकों के एक दल ने केवल 40 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक लाल-वामन तारे की परिक्रमा करते हुए पृथ्वी जैसे ग्रह की खोज की है जिस पर जल के महासागरों की संभावना है। यह ग्रह, जिसे ‘जीजे1214बी’ (GJ1214b) नाम दिया गया है, पृथ्वी से मात्र लगभग 2.7 गुना बड़ा और लगभग 6.5 गुना भारी है। इसके घनत्व के आधार पर वैज्ञानिकों का विचार है कि ‘जीजे1214बी’ का लगभग तीन चैथाई भाग जल से बना है। उसमें ठोस आयरन (लोहे) और निकिल का क्रोड तथा हाइड्रोजन एवं हीलियम का वायुमंडल है। इसके खोजकर्ताओं के अनुसार ‘जीजे1214बी’ पृथ्वी की अपेक्षा अधिक गर्म है और उसका वायुमंडल हमारे वायुमंडल की अपेक्षा 10 गुना अधिक सघन है (नेचर, 17 दिसंबर 2009)।

बाह्यग्रह ‘जीजे1214बी’ की खोज के लिए खगोलविज्ञानियों के दल ने अपेक्षाकृत छोटे (40 सेंटीमीटर) टेलीस्कोपों का उपयोग किया जिनमें खगोलिक सीसीडी कैमरे लगे हुए थे। उन्होंने एरिज़ोना में टक्सोंन के निकट माउंट हॉपकिंस वेधशाला में लगे आठ लघु टेलीस्कोपों के एक विन्यास का उपयोग किया जिन्हें एम-अर्थ विन्यास कहते हैं। इन्हें एम-वामन कहलाने वाले धुंधले अभिरक्त तारों की दीप्ति में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों का पता लगाने के लिए स्थापित किया गया है। एम-अर्थ विन्यास, एम-तारों की दीप्ति को परिशुद्धता के साथ बार-बार मापता है ताकि इनके सामने से निकलने वाले बाह्य ग्रहों का पता लग सके। यदि ग्रह बड़े होते तो वे तारों पर ग्रहण लगाते, परंतु क्योंकि पारगमन करने वाले ग्रह तारों की अपेक्षा बहुत छोटे हैं इसलिए वे केवल अल्प मात्रा में तारों के प्रकाश को मंद करते हैं। इसलिए तारों के प्रकाश में आवर्ती क्षीणता का प्रेक्षण इसके चारों ओर घूमते ग्रह की विद्यमानता का सूचक होता है। एम-वामनों की दीप्ति हमारे सूर्य जैसे तारों से कम होती है, इसलिए पृथ्वी के आकार के छोटे ग्रहों के कारण इनकी दीप्ति में होने वाली कमी को आसानी से पहचाना जा सकता है। इसके अतिरिक्त क्योंकि ‘जीजे1214बी’ अपने तारे के सामने से पारगमन पृथ्वी से देखने पर करता है, इसलिए जिन पदार्थों से वह बना है, उनका पता लगाना संभव है।

घनत्व ज्ञात करने के लिए द्रव्यमान को आयतन से विभाजित किया जाता है। किसी ग्रह की त्रिज्या और द्रव्यमान ज्ञात कर लेने के बाद खगोलविज्ञानी उसके घनत्व का परिकलन कर सकते हैं। ‘जीजे1214बी’ का घनत्व जल के घनत्व का लगभग 1.9 गुना है। घनत्व का यह मान एक ऐसे ग्रह का हो सकता है जिसमें एक चट्टानी क्रोड को अत्यंत गहरे सागरों ने घेर रखा हो। इसलिए खगोलविज्ञानियों का मानना है कि ‘जीजे1214बी’ एक जल बहुल ग्रह है। परंतु ‘जीजे1214बी’ पर विद्यमान जल बहुत गर्म है।

‘जीजे1214बी’ अपने तारे की एक परिक्रमा 38 घंटे में पूरी करता है। उसकी कक्षा की त्रिज्या 20 लाख किलोमीटर है जो सूर्य एवं बुध ग्रह के बीच की दूरी का लगभग 40वां भाग है। परंतु निकट कक्षा के बावजूद इस ग्रह का ताप लगभग 280 सेल्सियस तक ही पहुंचता है क्योंकि उसका तारा अपेक्षाकृत बहुत ठंडा है। खगोलविज्ञानियों ने गणना की है कि ‘जीजे1214बी’ के पृष्ठ का तापमान 190 सेल्सियस है। अतः ‘जीजे1214बी’ एक गर्म वाष्पमय दुनिया है।

‘जीजे1214बी’ को महा-भू ग्रह (सुपर अर्थ प्लेनेट) अर्थात् एक ऐसा बाह्य ग्रह कहा जा सकता है जो पृथ्वी से 1 से 10 गुना तक भारी है। अभी तक खोजे गए लगभग 400 बाह्य ग्रहों में से केवल 28 ही महा-भू ग्रहों की श्रेणी में रखे जा सकते हैं।

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