बिहार में बारिश का पानी अब नहीं जाएगा बेकार

Submitted by UrbanWater on Sat, 07/04/2020 - 08:06

बिहार में बारिश मूल रूप से मॉनसून में ही हुआ करती है। यहां जून मध्य से सितंबर तक लगभग 1000 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन बारिश के इस पानी के संचयन की व्यवस्था नहीं थी। इससे होता ये था कि बारिश का पानी बर्बाद चला जाता था और दूसरी तरफ गर्मी का सीजन आते ही बिहार के ग्रामीण इलाकों में जल संकट बढ़ जाता था। पिछले साल ही बिहार के एक दर्जन से ज्यादा जिलों के दर्जनों गांव सूखे की चपेट में आ गए थे।

 

लेकिन, अब बिहार सरकार ने वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था कर ली है। इससे बारिश का पानी यहां-वहां बर्बाद नहीं होगा बल्कि इसका इस्तेमाल भूगर्भ जल को रिचार्ज करने में किया जाएगा। जल-जीवन-हरियाली मिशन के अंतर्गत बिहार सरकार ने पूरे राज्य के 33 हजार 712 सरकारी भवनों को चिन्हित किया था, जिनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जाना था। इनमें से लगभग 13 हजार 600 भवनों पर ये सिस्टम तैयार कर लिया है।

 

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जितने भवनों पर ये सिस्टम विकसित किया गया है, उनसे होकर करीब 3.25 करोड़ वर्गफुट बारिश का पानी भूगर्भ में जाकर भूगर्भ जल को रिचार्ज करेगा। 

 

विभाग के एक अधिकारी ने कहा,  “जिन सरकारी भवनों का चयन इसके लिए किया गया था, वे शिक्षा, स्वास्थ्य, शहरी विकास विभाग, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग, आपदा प्रबंधऩ विभाग व अन्य विभागों के हैं। हमने जितने भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखा था, इसका 40 प्रतिशत से ज्यादा पूरा कर लिया है और इस साल ही बाकी चयनित भवनों पर भी ये सिस्टम लग जाएगा।” 

 

गौरतलब हो कि बिहार में मॉनसून के सीजन में हाल के समय में सामान्य ज्यादा बारिश हो रही है। हालांकि कुछ साल पहले तक मॉनसून की बारिश सामान्य से कम हुआ करती थी। पिछले साल मॉनसून की बारिश सामान्य से काफी अधिक हुई थी और इस साल मॉनसून के आए अभी तीन हफ्ते भी नहीं हुए हैं, लेकिन मॉनसून की औसत बारिश का 40 प्रतिशत हिस्सा अभी बरस चुका है। इसका मतलब है कि अगले तीन महीनों में और ज्यादा बारिश होगी।

 

यहा ये भी बता दे कि वर्षा जल संचयन के लिए बिहार सरकार सरकारी भवनों पर तो वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित कर ही रही है। इसके साथ साथ निजी भवनों पर इस तरह की व्यवस्था तैयार करने को भी प्रोत्साहित कर रही है। फिलहाल ये व्यवस्था शहरी क्षेत्रों के लिए है। नगर विकास विभाग के सूत्रों की मानें, तो शहरी क्षेत्रों में मकानों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग और वाटर रिचार्ज पिट स्थापित करने पर होल्डिंग टैक्स में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसको लेकर नगर विकास विभाग की तरफ से सभी जिलों के अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा गया है कि वे अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैला कर लोगों को मकानों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग और ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने की व्यवस्था स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करें।

 

भारत में पानी की किल्लत एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। पिछले कुछ सालों में भारत में बारिश का परिमाण कम हुआ है जिससे सूखे की समस्या बढ़ी है। एक अनुमान के मुताबिक, कम वर्षा के कारण देश के 50 फीसदी हिस्से में सूखे का संकट बना हुआ है। 

 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 12 फीसदी आबादी ‘डे जीरो’ की स्थिति में है। ‘डे जीरो’ वो स्थिति होती है, जहां पानी के सारे स्रोत सूख जाते हैं और ऐसी सूरत में सरकार हर व्यक्ति के लिए पानी का कोटा तय कर देती है। लोग कतार में लगकर टेंकरों से अपना पानी का कोटा लेते हैं।

 

दूसरी तरफ, नीति आयोग भी जल संकट को लेकर चिंता व्यक्त कर चुका है। नीति आयोग की तरफ से दो साल पहले जारी की गई कम्पोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स नाम की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि साल 2020 के अंत तक दिल्ली, बंगलुरू, हैदराबाद समेत देश के 21 अहम शहरों में भूगर्भ जल शून्य स्तर पर पहुंच जाएगा। नीति आयोग की इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वर्ष 2030 तक देश में पानी की मांग मौजूदा मांग से दोगुनी हो जाएगी, जिसका मतलब है कि आने वाले सालों में लाखों लोग पानी के लिए तरसेंगे। यही नहीं जल संकट के चलते देश के सकल घरेलू उत्पाद को इससे 6 प्रतिशत का नुकसान होगा। भविष्य में जल संकट के गहराने की आशंका के मद्देनज़र जल सुरक्षा के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग एक बेहतर विकल्प हो सकता है। 

 

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