बूंद बूंद से 'हिवरे' बना अमीर

Submitted by HindiWater on Thu, 10/15/2020 - 15:50

 पोपटराव पवार

अहमदनगर शहर से 17 किलोमीटर दूर एक हरा-भरा गांव है, जिसका नाम है 'हिवरे बाजार इस गांव में न तो किसी राजनीतिक दल की शाखा है और न ही किसी पार्टी का कोई होर्डिंग। इच्छाशक्ति के साथ जनसहयोग हो, तो बदलाव कैसे आता है, इस गांव ने पिछले 24 सालों में वो करके दिखाया है। इस गांव के 70 परिवार करोड़पति हैं। 47 प्राथमिक शिक्षक हैं। 68 युवक सेना में चुने गए हैं। गांव के लोगों में 3 डॉक्टर, 6 प्रोफेसर और 00 से ज्यादा इंजीनियरिंग, फार्मा जैसे विषयों में उच्च शिक्षित लोग हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे हैं।

 

1972 से लेकर 1982 के बीच कई लोग गांव से चले गए

 

एक हजार हेक्टेयर में बसे ,650 लोगों के इस गांव में कुल 35 परिवार हैं। महीने की प्रति व्यक्ति आय औसतन 32 हजार रुपये है। लेकिन ये स्थिति हमेशा से ऐसी नहीं थी। 972 से 982 के बीच गांव के हालात बहुत खराब थे। प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 832 रुपये थी। तब लगातार तीन साल सूखा पड़ा। कई परिवार गांव तक छोड़कर चले गए|

उसी दौरान पोपटराव पवार भी चौथी कक्षा पढ़ने के बाद गांव छोड़कर चले गए| क्रिकेट के शौकीन पवार आगे जाकर राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेलने लगे। वे बीच-बीच में गांव आते और हालात देखकर दुखी होते रहते। 989 में जब ग्राम पंचायत के चुनाव होने थे, तो लोगों ने उन्हीं से चुनाव लड़ने का आग्रह किया। वो मान गए| पवार चुनाव लड़े और जीतकर सरपंच बने। तब गांव में हरियाली नज़र ही नहीं आती थी, इसलिए पास की पहाड़ियों पर लोगों के श्रमदान से पौधरोपण शुरू किया गया।

26 जनवरी 1990 को गांव में पहली ग्रामसभा हुई, जिसमें पोपट पवार ने लोगों को गांव के कायाकल्प की पूरी रूपरेखा समझाई। वन संरक्षण के लिए गांव में कुल्हाड़ी पर पाबंदी लगा दी गई। तब किसानों का रुझान गन्ना, अनार, केले जैसी फसल की ओर था, जिनमें बहुत पानी लगता था। इसलिए भूमिगत जल लेने पर पाबंदी लगा दी गई।

 

गांव में रोज होता है 5 हजार लीटर दूध का उत्पादन

 

आज गांव में 350 कुएं और एक तालाब है। रिचार्जिंग से भू-जलस्तर बढ़ने लगा। शासन की मदद से बड़ी संख्या में स्टॉप डेम बनाए गए। इससे पालतू जानवरों को चारा मिलने लगा और दुग्ध व्यवसाय बढ़ने लगा। आज गांव में रोज 4-5 हजार लीटर दूध का उत्पादन होता है। स्कूल के छात्र पानी का ऑडिट करते हैं। कितनी वर्षा हुई, कितना पानी बह गया और कितना जमीन में गया?

गांव के विकास को देखकर गांव से बाहर गए 70 परिवार लौट आए हैं। आज पास के गांवों को हिवरे बाजार से पानी की आपूर्ति की जाती है।

आदर्श गांव योजना के तहत हिवरे बाजार में वृक्षारोपण के साथ-साथ मिट्टी और पानी को रोकने के सफल प्रयास किए गए, जिससे देखते ही देखते यह क्षेत्र हरा-भरा हो गया। इससे यहां की 300 एकड़ जमीन में सिंचाई होने लगी, जबकि पहले 5 एकड़ जमीन की भी सिंचाई नहीं हो पाती थी। जंगल फिर से बढ़ने लगा। साथ ही कृषि का उत्पादन चौगुना बढ़ गया। चारे की बढ़त से दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ी और यह गांव समृद्ध गांवों की श्रेणी में आ गया।

हिवरे बाजार की इसी कामयाबी के कारण महाराष्ट्र सरकार इस गांव में एक ऐसा प्रशिक्षण केंद्र खोलने जा रही है, जहां महाराष्ट्र के सभी सरपंचों को प्रशिक्षण दिया जा सके

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