चित्रकूट में लुप्त हो गर्इं दो पावन नदियां

Submitted by admin on Fri, 04/18/2014 - 11:27

गंदे नालों की शक्ल में बचे हैं निशान


लुप्त होतीं नदियां ...यह आश्चर्यजनक है, लेकिन सच है... इस तथ्य से बहुत कम ही लोग वाकिफ हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पावन तपोधाम चित्रकूट में कभी सदानीरा रहीं दो पावन नदियां -पयस्वनी और सरयू देखते ही देखते लुप्त हो गर्इं। इंसानों की शैतानी करतूतों के कारण यह अचंभा पिछले 60 साल के अंदर हुआ।

वक्त के साथ बढ़ते प्रदूषण,बेजा अतिक्रमण और दो गज जमीन को भी बेच खाने की भूमाफिया की अंतहीन भूख इन दो पावन नदियों को निगल गई। अब इन नदियों के निशान गंदे नालों की शक्ल में बचें हैं। एक विडंबना यह भी है कि इन्हीं नालों में अभी भी आधा सैकड़ा से ज्यादा अवैध पक्के निर्माण सीना तान कर खड़े हैं।

भूमाफिया के साथ सरकारी गठजोड़ इतना सख्त है कि ग्रीन ट्रिब्यूनल और दीगर अदालतों की सख्ती भी बेअसर है। चित्रकूट के बड़े-बुजुर्ग कहते हैं, नई पीढ़ी अब शायद ही इस सच को स्वीकार कर पाए कि - “इधर एमपी के रेस्ट हाउस और उधर यूपी की ओर आज सड़ांध मारते नाले कभी ऐसी पुण्य सलिला थे, जिनके आचमन मात्र के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ता था।...

चित्रकूट में अब यही चुनौती मोक्षदायिनी मां मंदाकिनी के सामने है...वस्तुत: मंदाकिनी को जीवनदान के लिए एक बड़े जनांदोलन की जरुरत है, एक ऐसे जनांदोलन की... जिसकी शुरूआत हम-आप और हम सब से होनी चाहिए...आज और अभी से...

पयस्वनी और सरयू:


नालों में तब्दील हो चुकी पयस्वनी और सरयू नदियों में से सरयू नदी जहां श्रीकामद गिरि पर्वत के पूर्वी तट पर स्थित प्राचीन ब्रम्हकुंड से एक धारा के रूप में उद्गमित थीं, वहीं दूसरी ओर श्रीकामदगिरी पर्वत से दूर ब्रम्हकुंड से पयस्वनी उद्गमित थी। दोनों नदियां एमपी-यूपी की सरहद पर मंदाकिनी गंगा के राघवप्रयाग घाट पर मिल कर संगम बनाती थीं। यानि तीन पवित्र नदियों का परस्पर मिलन...कभी इसी राघवप्रयाग घाट पर था...ऐसा जनविश्वास है कि इसी राघवप्रयाग घाट में त्रेतायुग में वनवासी श्रीराम ने अपने दिवंगत पिता राजा दशरथ की शांति के लिए पिंडदान कर तर्पण और अन्य कर्मकांड किए थे।

आज मदांकिनी के तट पर साक्षी राघवप्रयाग घाट तो है लेकिन न तो सरयू रही और न ही पयस्वनी...इनकी जगह अब दो गंदे नालों के मुहाने खुलते हैं और बेखटके गंगा मैली करते हैं। यह वही गंदे नाले हैं जिन पर अवैध रूप से काबिज होटल और रेस्टोरेंट की मलबा बहाती नालियां खुलती हैं।

मोक्षदायिनी मां मंदाकिनी के भी प्राण संकट में:


महर्षि अत्रि की भार्या सती अनुसुइया के तपोबल से अनुसुइया आश्रम में असंख्य जलधाराओं के रूप में प्रकट मां गंगा को लेकर मंदाकिनी कहते हैं। उद्गम स्थल से तकरीबन 35 किलोमीटर के रमणीक क्षेत्र से गुजरती हुई मंदाकिनी चित्रकूट में राघव प्रयाग और रामघाट होते हुए आगे महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर में यमुना से मिल जाती है। यही यमुना और आगे चल कर प्रयाग में गंगा के साथ मिल कर संगम बनाती है।

लुप्त होतीं नदियांविडंबना यह है कि चित्रकूट की मोक्षदायनी मंदाकिनी के प्राण भी अब संकट में हैं। एमपी-यूपी के अंतरप्रांतीय सरहदी इलाकों में स्थित आदिवासी बहुल्य पाठा इलाके की जीवन रेखा भी यही मंदाकिनी है। एशिया की सबसे बड़ी पाठा पेयजल योजना इसी मंदाकिनी के भरोसे है।

जानकीकुंड से लेकर बालाजी मंदिर तक दोनों ओर अंधाधुंध अवैध अतिक्रमण और भारी प्रदूषण पर ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद भी लगाम नहीं लग पा रही है। चित्रकूट नगर पंचायत का रवैया भी इस मामले में गैर जिम्मेदाराना है। इस वजह से मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। करोड़ों की सरकारी कार्ययोजनाएं अपना असर नहीं दिखा पा रही हैं। करोड़ों के कांक्रीट वर्क भी नदी के असंख्य नैसर्गिक जलस्रोतों का ही मुंह बंद कर रहे हैं। मठ-मंदिरों का मलबा सीधे मंदाकिनी में जा कर उसका गला घोंट रहा है।

अमावस हो या पूर्णिमा, दीवाली और दशहरा हो या फिर सोमवती, कुंभ हो या फिर मकर संक्रांति...हर, पुण्य स्नान पर प्रदूषित हो चुकी इस पवित्र नदी के तट पर लाखों लाख श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब आज भी उमड़ता है।

इनका कहना है:


मयार्दापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पावन तपोधाम का अस्तित्व संकट में है। केंद्र हो या राज्य सरकारों से सच छिपा नहीं है। लाखों लाख आस्थाओं के केंद्र चित्रकूट में पौराणिक और धार्मिक महत्व के स्थल तेजी के साथ अपनी पहचान खो रहे हैं। इस संकट के खिलाफ स्थानीय लड़ाइयां बेअसर हैं। शांतिपूर्ण एक बड़े जनांदोलन की जरुरत है।
राकेश शर्मा,समाजसेवी और पत्रकार

चित्रकूट की पवित्र मंदाकिनी की रक्षा के लिए हम कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त एक्शन लिए हैं। मंदाकिनी पर अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त करने के आदेश दिए गए हैं। उम्मीद है, चित्रकूट की चिंता नाहक नहीं जाएगी। न्याय हर हाल में मिलेगा।
नित्यानंद मिश्रा, अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट

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